दोस्ती और सामाजिकता का दायरा है बड़ा तो मजबूत रहेगी याददाश्त

ज्यादा दोस्त होने और सामाजिक दायरा बढ़ने से दिमाग पर उम्र का असर देर से होता है।

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : June 2, 2018 3:49 AM IST

इंसान की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती जाती है उसकी मेमोरी भी शरीर की तरह कमजोर होने लगती है। बुढ़ापा आते-आते स्मरण क्षमता भी कमजोर होने लगती है। दिमाग पर उम्र का असर वैसे ही होता है जैसे शरीर पर होता है। कुछ लोगों में स्मरण शक्ति उम्र के आखिरी पड़ाव तक कमजोर नहीं होती। इसका एक मुख्य कारण शायद सामाजिक सक्रियता होती है। हाल में हुए एक रिसर्च में यह बात सामने आयी है कि यदि हम अपने सामाजिक जीवन के दायरे को बड़ा रखते हैं तो स्मरण शक्ति भी मजबूत रहती है।

ज्यादा दोस्त होने और सामाजिक दायरा बढ़ने से दिमाग पर उम्र का असर देर से होता है, दिमाग सुरक्षित रहता है और जीवन स्तर में सुधार होता है। यह खुलासा एक नए रिसर्च में हुआ है। रिसर्च के अनुसार, यादों, भावनाओं और प्रेरणाओं को महसूस करने वाला दिमाग का हिस्सा स्पष्ट रूप से उम्र के साथ प्रभावित होता है। लोगों के दिमाग के इस हिस्से में सामाजिक संबंध संरक्षित रहते हैं।

अमेरिका के कोलंबस में 'ओहियो स्टेट विश्वविद्यालय' में 'न्यूरोलॉजिकल इंस्टीट्यूट' की मुख्य शोधकर्ता एलिजाबेथ किर्बी ने बताते हैं कि, "हमारे शोध में यह खुलासा हुआ कि सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्ति के दिमाग पर उम्र का प्रभाव कम पड़ता है।"

जर्नल 'फ्रंटियर इन एजिंग न्यूरोसाइंस' प्रकाशित रिसर्च के तहत शोधकर्ताओं के दल ने 15-18 महीने के चूहों के दो समूह बनाकर तीन महीनों तक अध्ययन किया जब उनकी प्राकृतिक स्मरण शक्ति में गिरावट आने लगती है।

चूहों को एक खिलौना पहचानने का रिसर्च कर उनकी स्मरण शक्ति परखी गई। शोध के परिणामों के अनुसार समूह में रहने वाले चूहों की स्मरण क्षमता बेहतर थी।

आजकल की बदलती जीवनशैली में वर्चुअल दुनिया का संसार बढ़ रहा लेकिन सामाजिक तौर पर दोस्तों की संख्या में गिरावट आयी है। हम ऐसे कई लोगों को जानते हैं जो हमारी वर्चुअल दुनिया के दोस्त तो है लेकिन सामाजिक जीवन में उनसे कोई नाता नहीं हैं। यह रिसर्च इस मायने में अहम संकेत देता है कि इंसान के लिए सामाजिक जीवन कितना महत्वपूर्ण है।

स्रोत:IANS Hindi.

चित्र स्रोत- Shutterstock Images

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