
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Published : June 20, 2018 3:52 PM IST
फोर्टिस एस्कार्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के डॉक्टरों ने हाल ही में 32 वर्षीय इथियोपियाई रोगी की जोखिम भरी सर्जरी की। मोहम्मद नामक इस व्यक्ति को दर्दरहित प्रोग्रेसिव अपर एब्डोमिनल सूजन की शिकायत होने पर अस्पताल लाया गया था, जांच में पाया गया उन्हें 1.25 किलोग्राम का ट्यूमर है, जो उनके बाएं गैस्ट्रिक आर्टरी, स्प्लीनिक आर्टरी और हेपेटिक आर्टरी के बीच अटका हुआ था। इस ट्यूमर की वजह से उनका पेन्क्रियाज नीचे आ गया था और उनके पेट की आंतरिक संरचना को व्यापक रूप से डिस्प्लेसमेंट कर रहा था। डॉ. संजय वर्मा (सीनियर कंसल्टेंट, मिनिमल ऐक्सेस, बैरिएट्रिक और जीआई सर्जरी, फोर्टिस लिवर एंड डाइजेस्टिव्स इंस्टीट्यूट) और डॉ. विवेक विज (डायरेक्टर- लिवर ट्रांसप्लांट और जीआई सर्जरी, फोर्टिस हेल्थकेयर) के साथ ही उनकी टीम ने रोगी की स्थिति का आकलन किया और चुनौतीपूर्ण सर्जरी पूरी की।
पेट में सूजन की शिकायत के साथ अस्पताल आने वाले मोहम्मद की अपर गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल एंडोस्कोपी की गई, जिससे डायग्नोसिस की पुष्टि हुई। इसके बाद रोगी की एक्सप्लोरेटरी लैपरोटोमी (एक तरह का सर्जिकल आपरेशन जिसमें पेट खोला जाता है और चोट या बीमारी के लिए पेट के अंगों की जांच की जाती है) की गयी और ट्यूमर को हटाया गया। सर्जरी की गंभीरता और मुश्किल इस तथ्य से जुड़ी थी कि सेलिएक ऐक्सिस (सेलिएक आर्टरी एब्डोमिनल महाधमनी की पहली प्रमुख शाखा है) और उसकी शाखाएं विस्थापित हो गई थीं, क्योंकि इसकी वजह से सभी धमनियां एक-दूसरे और ट्यूमर में उलझी हुईं थीं। नतीजतन, सर्जरी के दौरान स्प्लेनिक आर्टरी को छोड़कर हेपेटिक आर्टरी को सेलिएक ऐक्सेस पर फिर से इम्प्लांट किया जाना था।
डॉ. संजय वर्मा ने कहा, ‘‘ऑपरेशन के बाद स्पिलीन की संवहनीयता और सेलिएक ऐक्सिस तथा हेपेटिक आर्टरी में रक्त के सामान्य प्रवाह की पुष्टि के लिए यूएसजी कलर डॉप्लर टेस्ट का इस्तेमाल किया गया। यह एक नॉन-इन्वेसिव प्रक्रिया है, जिसमें डिवाइस लाल रक्त कोशिकाओं को सर्कुलेटिंग से फैली उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों (अल्ट्रासाउंड) की उछाल के द्वारा रक्त वाहिकाओं से रक्त के प्रवाह का अनुमान लगाने में मदद करता है। रोगी ने उपचार को संतोषजनक तरीके से सहन किया और अच्छी रिकवरी की।
ऑपरेशन के पांच दिन बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया और अब ऑपरेशन के बाद की जांच (फॉलो-अप्स) में अच्छे परिणाम दिख रहे हैं।’’
डॉ. विवेक विज ने बताया, ‘‘यह एक तरीके का दुर्लभ मामला था क्योंकि रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर सेलिएक प्लेक्सस में फंसा हुआ था और स्प्लीनिक आर्टरी तथा हेपेटिक आर्टरी को बढ़ा रहा था। ऐसे मामले में ट्यूमर को पूरी तरह हटाना सामान्य तरीके से संभव नहीं था, और अगर ऐसा करने का प्रयास किया जाता तो स्प्लीनिक और हेपेटिक आर्टरी को नुकसान हो सकता था जो रोगी के लिए घातक हो सकता था। अगर ट्यूमर निकलाते समय स्प्लीनिक आर्टरी डैमेज हो जाती तो स्प्लीनेक्टोमी करने की जरूरत पड़ती। इसी तरह अगर हेपेटिक आर्टरी को नुकसान पहुंचता तो लिवर में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता और लिवर के बड़े हिस्से में संवहनीयता होती। सर्जरी में स्प्लीनिक तथा हेपेटिक आर्टरी को सेलिएक ट्रंक में वैस्कुलर एनास्टोमोसेस के द्वारा रिप्लांट करने की प्रक्रिया अपनाई गई। यह दुर्लभ प्रक्रिया है और कुछ गिने-चुने अस्पतालों में ही इसकी सुविधा उपलब्ध है।’’
सेलिएक आर्टरी संपीड़न के अपेक्षाकृत उच्च प्रसार के बावजूद चिकित्सकीय रूप से प्रासंगिक सेलिएक आर्टरी संपीड़न सिंड्रोम दुर्लभ है। सेलिएक आर्टरी सांपीड़न सिंड्रोम के लक्षण आमतौर पर क्रोनिक और गैर-निर्दिष्ट होते हैं, जिनमें बिना कारण पेट फूलना, पेट दर्द, मिचली और उल्टियां शामिल हैं। अगर ये परेशानिया लंबे समय तक बरकरार रहें तो मरीज का वजन घट सकता है।
डॉ. कौसर अली शाह (जोनल डायरेक्टर, फोर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट) ने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि हमारे पास अच्छे डॉक्टरों की टीम है, जो इस तरह के नाजुक मामलों की हैंडलिंग का सही तरीका जानती है। डॉ. संजय वर्मा और डॉ. विवेक विज की निगरानी और देख-रेख में इस सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया गया और पूरी प्रक्रिया में रोगी ने भी अच्छा सहयोग दिया। डॉक्टरों की टीम ने इस मामले के उपचार के लिए बेहद व्यापक और दुर्लभ प्रक्रिया को अपनाया और उनकी कोशिशों का नतीजा अच्छा रहा और आज मरीज एक अच्छी ज़िंदगी जी रहा है।’’
स्रोत: Press Release.