
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : October 28, 2018 10:45 AM IST
मदन लाल खुराना पिछले कुछ वर्षों से कोमा में थे। © file photo.
भाजपा नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना का शनिवार देर रात निधन हो गया। भाजपा की दिल्ली इकाई ने उनके निधन की पुष्टि की है। 82 वर्षीय खुराना ने रात 11 बजे कीर्ति नगर के अपने घर में आख़िरी सांस ली।
मदन लाल खुराना पिछले कुछ वर्षों से कोमा में थे। उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था जिसके बाद से खुराना कोमा में थे।
Dad I will miss u forever.
RIP #MadanLalKhurana@arunjaitley@Ramlal@SushmaSwaraj @ pic.twitter.com/6knuRbtomd — Harish Khurana (@HarishKhuranna) October 27, 2018
ब्रेन को जब ब्लड नहीं पहुंचता तब स्ट्रोक का खतरा होता हैं। बिना ब्लड के ब्रेन सेल्स को नुकसान पहुंचता हैं और वो मर जाते हैं। स्ट्रोक होने की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि वह ब्रेन के कौन-से हिस्से में हुआ है, और कितनी जल्दी इसका इलाज हुआ है इस बात पर मरीज के ठीक होना निर्भर करता है। स्ट्रोक का परिणाम व्यक्ति को चलने-फिरने, बोलने, सोचने, महसूस और समझने पर होता है।
कई भाजपा नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने ट्विटर पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। मदनलाल खुराना के बेटे और दिल्ली भाजपा प्रवक्ता हरीश खुराना ने बताया है कि उनके पिता का आज तीन बजे निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।
दिल्ली भाजपा प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने बताया है कि खुराना का पार्थिव शरीर रविवार 12 बजे 14, पंडित पंत मार्ग स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।
मदनलाल खुराना 1993 से 1996 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे। लेकिन इसके बाद भाजपा ने दिल्ली में साहिब सिंह वर्मा को अपना चेहरा चुन लिया। केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वह पर्यटन मंत्री भी रहे। साल 2004 में वे कुछ महीनों के लिए राजस्थान के राज्यपाल भी रहे।
दिल्ली भाजपा प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने बताया है कि खुराना का पार्थिव शरीर रविवार 12 बजे 14, पंडित पंत मार्ग स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।
मदनलाल खुराना 1993 से 1996 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे। लेकिन इसके बाद भाजपा ने दिल्ली में साहिब सिंह वर्मा को अपना चेहरा चुन लिया। केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वह पर्यटन मंत्री भी रहे। साल 2004 में वे कुछ महीनों के लिए राजस्थान के राज्यपाल भी रहे।