ऑफिस में थकान सिर्फ नौकरी का हिस्‍सा है, बीमारी नहीं : WHO

पिछले दिनों डब्‍ल्‍यूएचओ की ओर से जारी बीमारियों की सूची में ऑफि‍स में काम काज के दौरान होने वाली थकान यानी बर्नआउट को भी बीमारियों की सूची में डाल दिया गया था। जबकि अब उसे कामकाज का ही हिस्‍सा माना जा रहा है।

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Written By: Yogita Yadav | Published : May 30, 2019 1:52 PM IST

ऑफि‍स में लगातार काम करने से किसी को भी थकान हो सकती है। ऑफिस में होने वाली इस थकान से उबरने के लिए बीच-बीच में ब्रेक की भी सलाह दी जाती है। पर यह शरीर की एक नेचुरल प्रक्रिया है, बीमारी नहीं। जबकि पिछले दिनों जारी बीमारियों की लिस्‍ट में WHO ने इसे भी बीमारी मान लिया था। इसी पर स्‍पष्‍टीकरण देते हुए मंगलवार को जारी नई लिस्‍ट से बर्न आउट को बाहर कर दिया गया है।  अब यह कहा जा रहा है कि ऑफिस में थकान सिर्फ नौकरी का हिस्‍सा है, बीमारी नहीं।

बर्नआउट नहीं है बीमारी

कल तक जहां ऑफिस स्ट्रेस से परेशान लोग इस बात से खुश थे कि WHO ने बर्न आउट को बीमारी मान लिया है वहीं, अब इसमें बदलाव हो गया है। WHO ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि बर्न आउट अब भी व्यावसायिक घटना ही है और बीमारी नहीं। मंगलवार को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन WHO ने कहा कि बर्न आउट यानी ऑफिस में बहुत ज्यादा थकान और स्ट्रेस महसूस करना अब भी एक व्यावसायिक घटना ही है। इसे अब तक बीमारी नहीं माना गया है। WHO की तरफ से यह स्पष्टीकरण एक दिन बाद आया है। बताया जा रहा है कि WHO ने सोमवार को गलती से बर्न आउट को अपने इंटरनैशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीज ICD की लिस्ट में शामिल कर दिया था।

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ये है पार्ट ऑफ जॉब

WHO की प्रमुख वार्षिक मीटिंग, वर्ल्ड हेल्थ असेंबली जो 28 मई को संपन्न हुई, उसमें वीकेंड पर लेटेस्ट बीमारियों और चोट (इन्ज्युरीज) को ICD-10 में शामिल किया गया था। इसमें बर्न आउट को भी बीमारी की कैटिगरी में रखा गया था। लेकिन लेटेस्ट अपडेशन में से बर्न आउट को बीमारी की लिस्ट से हटा दिया गया है और उसकी परिभाषा भी बदल दी गई है।

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बर्न आउट की परिभाषा को किया गया परिवर्तित

WHO के प्रवक्ता ने कहा, मौजूदा रिसर्च के आधार पर बर्न आउट की परिभाषा को परिवर्तित किया गया है। अब बर्न आउट एक ऐसा सिंड्रोम है जो क्रॉनिक वर्कप्लेस स्ट्रेस की वजह से होता है। ऐसा स्ट्रेस जिसे सफलतापूर्वक मैनेज न किया गया हो।

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गेमिंग का माना गया बीमारी

WHO की ICD-11 की लिस्ट में हद से ज्यादा गेमिंग खेलने को भी आधिकारिक रूप से बीमारी माना गया है। इसके अलावा ट्रांसजेंडर होने को WHO ने मानसिक बीमारी की सूची से हटा दिया है। यानी अब अगर कोई व्यक्ति ट्रांसजेंडर है तो उसे मानसिक रूप से बीमार नहीं कहा जा सकता।

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