
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : July 14, 2020 7:01 PM IST
Fatality due to Covid-19: कोरोना वायरस के मामलों में लगातार आ रही तेज़ी के कारण इस समस्या से जल्द छुटकारा पाने के आसार नहीं दिख रहे हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक दुनिया का हर 8वां कोविड-19 का मरीज़ भारत से है। देश में भी हर दिन कोविड-19 30 हजार नये मरीज सामने आ रहे हैं। तो वहीं रोज़ाना कोविड-19 की वजह से होने वासी मृत्यु दर भी बढ़ती जा रही है। (Fatality due to Covid-19)
एक्सपर्ट्स के अनुसार ऐसे मरीज जिन्हें पहले से कोई बीमारी है, उनके लिए कोविड-19 बहुत ख़तरनाक साबित हो रहा है। ऐसे मरीज़ों के लिए मौत का खतरा भी ज़्यादा है। एक हालिया रिसर्च पेपर में कहा गया है कि, जिन लोगों को कोविड-19 के साथ डायबिटीज़ भी है, उनके लिए मृत्यु का खतरा बहुत अधिक है। जिन मरीज़ों का फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल हाई होता है उनको कोविड-19 होने पर मृत्यु का खतरा दोगुना हो जाता है। साथ ही कोविड-19 इंफेक्शन के गम्भीर होने का भी डर बहुत अधिक हो जाता है।
पिछले रिसर्च पेपर्स में यह बात सामने आयी कि हाइपरग्लाइसेमिया (एक ऐसी स्थिति जिसमें ब्लड शुगर लेवल बहुत असामान्य तरीके से बढ़ जाता है) के कारण कोविड-19 होने पर मरीज़ों के लिए मौत का ख़तरा बहुत अधिक बढ़ सकता है। चीन के हुआझेंग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स और इस रिसर्च पेपर के लेखकों के अनुसार, इस रिसर्च में पहली बार पता चला कि कोविड-19 होने के बाद अस्पताल में दाखिल होने के बाद अगर फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल हाई होता है तो, अगले 28 दिनों में मरीज़ के लिए मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
इस रिसर्च के परिणाम डायबेटोलॉजिया जर्नल में छापे गए। इस रिसर्च के दौरान एक्सपर्ट्स ने दो अस्पतालों में दाखिल कराए गए कोविड-19 मरीजों के फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल और अन्य कोरोना मरीज़ों की 28 दिनों में होने वाली मौत के मामलों को बारीकी से समझने की कोशिश। रिसर्च के दौरान लगातार 28 दिनों तक मरीज़ों के ब्लड शुगर लेवल की जांच की गयी। इसके अलावा, चीन के वुहान के 2 अस्पतालों में आने वाले मरीजों का भी फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज़ लेवल जांचा गया। (Fatality due to Covid-19)
रिसर्च के रिज़ल्ट्स के अनुसार हाई फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल वाले मरीजों की मृत्यु दर उन मरीज़ों की तुलना में 2.3 गुना तक अधिक थी जिनका फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल कम रहा। जबकि, प्री-डायबिटिक और लो फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज़ लेवल वाले मरीज़ों में की तुलना में मृत्यु का खतरा 71 फीसदी अधिक थी।