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भारत बायोटेक और एस्ट्राजेनेका को मिली आपातकालीन उपयोग की मंजूरी से नाखुश हैं कुछ एक्सपर्ट?
भारत में लोगों को कोविड-19 वायरस (Coronavirus) से बचाने के टीके के आपातकालीन उपयोग के लिये यूके-स्वीडिश बायोफार्मास्युटिकल कंपनी एस्ट्रोजेनेका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित टीके के अनुमोदन का नया फैसला हुआ है। इसके बाद कई विशेषज्ञ कोरोना वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति मिलने के आधार पर प्रश्न उठा रहे हैं और यह भी पूछ रहे हैं कि स्पूतनिक V और फाइज़र जैसे दूसरे उम्मीदवारों की इस प्रक्रिया में उपेक्षा क्यों की गई।
डीसीजीआई के अनुसार, ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका कोविड वैक्सीन (Oxford-AstraZeneca Covid Vaccine) इस वायरस की रोकथाम में औसतन 70 प्रतिशत प्रभाव दर्शाती है। इस पर सीके बिरला हॉस्पिटल्स में कंसल्टेन्ट क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट और इंफेक्शन कंट्रोल के हेड डॉ. देबकिशोर गुप्ता ने कहा, "यह सामान्य समूह के बीच का औसत प्रभाव है, जिसमें दो फुल डोज (62 प्रतिशत) और हाफ-डोज और फुल डोज (90 प्रतिशत) होता है। भारत ने फुल-डोज रेजिम का अनुमोदन किया है। अनुमोदित होने वाले दोनों शॉट्स के लिये फुल डोज रेजिम के आधार पर एज़ेड ने 62 प्रतिशत प्रभाव दर्शाया, जिसका आधार उनका अपना पेपर है, जो उन्होंने लैंसेट मैगज़ीन को दिया था; यह दुनियाभर में स्वीकृति प्राप्त किसी भी दूसरी वैक्सीन से बहुत कम है, लेकिन इसे अभी डीसीजीआई द्वारा मंजूरी मिलनी बाकी है।"
डॉ. गुप्ता ने आगे कहा, "ट्रायल अभी भारत में पूरा नहीं हुआ है। लैंसेट के अनुसार- दो मानक डोज लेने वाले लोगों में वैक्सीन का प्रभाव 62.1 प्रतिशत था और जिन्होंने मानक डोज के बाद एक लो डोज लिया, उनमें प्रभाव 90.0 प्रतिशत था। कुल मिलाकर दोनों ग्रुप्स में वैक्सीन का प्रभाव 70.4 प्रतिशत था। चूंकि भारत संभवतः 2 फुल डोज रेजिम में जाएगा, इसलिये प्रभाव 62.1 प्रतिशत तक होना चाहिये। इस मामले में कुल मिलाकर 70 प्रतिशत प्रभाव भ्रामक है। इसके अलावा, एस्ट्राजेनेका दोनों टीकों के लिये एक और उसी कम्पोनेन्ट का उपयोग करती है, जबकि रूसी वैक्सीन दो अलग टीकों में दो अलग कम्पोनेन्ट्स का उपयोग करती है। लंबे समय तक चलने वाली प्रतिरोधकता के लिये रूसी एप्रोच ज्यादा क्षमतावान साबित हो सकती है।"
एस्ट्रजेनेका वैक्सीन पर संशय रहा है, जब से पिछले साल के नवंबर में लैंसेट जर्नल में यह डाटा प्रकाशित हुआ था, जो प्रमाणित करता था कि दो फुल शॉट्स 62.1 प्रतिशत प्रभावी थे। बाद में एस्ट्राजेनेका ने स्पूतनिक V के साथ मिलकर काम करने की घोषणा की, जिसका प्रभाव क्लिनिकल ट्रायल्स के फाइनल कंट्रोल पॉइंट के डाटा के विश्लेषण के आधार पर 91.4 प्रतिशत था। दोनों भागीदार गेमेलिया सेंटर द्वारा विकसित स्पूतनिक V वैक्सीन के एक कम्पोनेन्ट और एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित एज़ेडडी1222 वैक्सीन के एक कम्पोनेन्ट के मिश्रित उपयोग की प्रतिरोधकता बनाने की क्षमता और सुरक्षा का मूल्यांकन करेंगे। ऐसा मिश्रण एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के प्रभाव को 90 प्रतिशत पर पहुँचा सकता है।
इस बीच, स्पूतनिक V (Sputnik V) के निर्माता ट्विटर पर आए और लिखा, "भारतीय विनियामक ने फेज 3 क्लिनिकल डाटा के आधार पर एस्ट्राजेनेका के वैक्सीन के फुल-डोज रेजिम को स्वीकृति देने की अनुशंसा की है, जिसका प्रभाव 62.1 प्रतिशत है। स्पूतनिक V एज़ेड वैक्सीन के प्रभाव को 90 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिये एज़ेड के साथ क्लिनिकल ट्रायल्स पर काम कर रहा है।"
जिंदल स्कूल ऑफ लॉ के डीन और एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. आशीष भारद्वाज ने कहा, "इस कार्यक्रम की लॉजिस्टिकल, वित्तीय और प्रबंधकीय जरूरतों और वायरस के तेजी से फैलने के बावजूद प्राथमिकता उस वैक्सीन को मिलनी चाहिये, जिसका प्रभाव उच्च हो और जिसके साथ गंभीर साइड-इफेक्ट्स की संभावना सबसे कम हो। एस्ट्राजेनेका ने अपने दो शॉट वाले वैक्सीन के लिये द लैंसेट में जो प्रभाव बताया है, वह शीर्ष उम्मीदवारों के बीच सबसे कम है।"
पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ . गजेन्द्र सिंह ने कहा, "प्राथमिक आधार पर भारत बायोटेक और एस्ट्राजेनेका टीकों के अनुमोदन से टीकाकरण अभियान शुरू हो जाएगा। हालांकि, भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश की मांग और भारत द्वारा दूसरे देशों से किये गये वादों को ध्यान में रखते हुए लंबी अवधि में फाइजर और स्पूतनिक V जैसे अन्य टीकों का अनुमोदन भी अत्यंत महत्वपूर्ण होगा, जोकि कतार में हैं। दूसरे भागीदार उतने ही महत्वपूर्ण हैं और घरेलू तथा वैश्विक मांग की पूर्ति के लिये जन-साधारण का टीकाकरण जरूरी है।"
इन विशेषज्ञों के इन सवालों और अनुशंसाओं के साथ, हमें उम्मीद है कि भारत सरकार सोच-समझकर फैसला लेगी और दूसरे टीकों को भी त्वरित अनुमोदन या आपातकालीन उपयोग की अनुमति देगी।