दिन के समय ज्‍यादा सोना, बढ़ा देता है अल्‍जाइमर का खतरा

डिस्‍टर्ब स्‍लीप से बढ़ जाता है मस्तिष्‍क में बीटा एमिलॉयड का जमाव।

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Written By: Yogita Yadav | Published : September 10, 2018 1:35 PM IST

जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में अल्‍जाइमर सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है। इसके लिए अव्‍यवस्थित जीवनशैली जिम्‍मेदार है। अभी तक नींद को लेकर बहुत ज्‍यादा नहीं कहा जा रहा था। पर अब एक नए अध्‍ययन में यह बात सामने आई है कि रात के मुकाबले यदि आप दिन में ज्‍यादा सोते हैं तो इससे आपके लिए अल्‍जाइमर का जोखिम तीन गुना ज्‍यादा बढ़ जाता है।

बढ़ जाता है बीटा एमिलॉयड का जमाव

एक नए अध्ययन से यह बात सामने आई है कि लंबे समय तक दिन में ज्‍यादा सोने की आदत रहने के कारण अल्‍जाइमर का जोखिम तीन गुना बढ़ जाता है। दिन में सोने से  मस्तिष्क में बीटा एमिलॉयड के जमा होने की संभावना ज्‍यादा बढ़ जाती है। मस्तिष्‍क में जमा होने वाला यह प्रोटीन अल्जाइमर रोग की संभवना को तीन गुना अधिक बढ़ा देता है।

स्‍लीप (एसएलईईपी) पत्रिका में प्रकाशित शोध ने एक बार फि‍र से इस तथ्‍य को स्‍तयापित कर दिया है कि रात के समय की पर्याप्‍त नींद बुजुर्गों को अल्‍जाइमर से बचा कर रखती है। जबकि दिन में ली गई नींद इसके खतरे को और ज्‍यादा बढ़ा देती है।

ये है नया शोध

जॉन्स हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्‍थ के मेंटल हेल्‍थ डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर एडम पी स्पिरा कहते हैं, , "आहार, व्यायाम और संज्ञानात्मक गतिविधि अल्जाइमर के रोग के उपचार और रोकथाम में महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। हालांकि नींद उतना ज्‍यादा असर नहीं करती पर बेहतर और स्‍वस्‍थ नींद के जरिए अल्‍जाइमर की संभावनाक को बहुत हद तक रोका जा सकता है।

नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ एजिेंग और ब्‍लूमबर्ग स्‍कूल के साझा अध्‍ययन का निर्देशन कर रहे स्पिरा आगे कहते हैं, "यदि खराब नींद अल्जाइमर रोग को बढ़ाने में मदद करती है तो हम स्‍वस्‍थ नींद के जरिए इस बीमारी को रोकने के प्रयास कर सकते हैं। हम नींद के इसी फेक्‍टर पर गहनता से शोध कर रहे हैं।

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ऐसे किया गया अध्‍ययन 

बाल्टीमोर लांगिट्यूडिनल स्टडी ऑफ एजिंग (बीएलएसए) के 1 9 58 में किए गए अध्‍ययन का इस्‍तेमाल करते हुए हजारों स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों और कार्यकर्ताओं के अनुभ्‍वों को इसमें शामिल किया गया। 1991 से 2000 के दौरान जारी अध्‍ययन में शामिल लोगों से यह सवाल पूछा गया कि आप दिन के समय सोते हैं।

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यानी जिस समय आपको जागना चाहिए आप उस समय नींद में होते हैं। इसी प्रश्‍नावली के दूसरे प्रश्‍न के जवाब के रूप में उन्‍हें कुछ विकल्‍प भी दिए गए। उनसे पूछा गया कि आप सप्‍ताह में कितनी बार दिन मे सोते हैं, एक बार, दो बार या सप्‍ताह में पांच बार।

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यह रहा निष्‍कर्ष

इस अध्‍ययन में इस पूरी अवधि में प्राप्‍त डाटा में जिन लोगों ने यह माना कि वे दिन में ज्‍यादा सोते हैं, उनमें अल्‍जाइमर के लिए जिम्‍मेदार कारक ज्‍यादा पाए गए। इससे इस बात को और बल मिला कि अल्‍जाइमर का खतरा कम करने के लिए दिन की बजाए रात को सोना ज्‍यादा बेहतर होता है।

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