
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 2, 2020 6:49 PM IST
फेस शील्ड और एन-95 मास्क मिलकर भी कोरोना को नहीं रोक सकते, एक्सपर्ट्स का दावा
Covid-19 Spread: कोरोनाकाल में महामारी (Coronavirus Pandemic) से बचने के लिए उचित सावधानियां बरतने की सलाह दी जा रही है, लेकिन कई बार हमारी नजरों में कई ऐसे लोग भी आते हैं, जिन्हें हम बिना मास्क लगाए सड़कों पर घूमते हुए देखते हैं और कई लोग ऐसे भी हैं जो इन्हें हर वक्त पहने रहते हैं। इस पर ही हुए एक शोध का नतीजा अब सामने आया है। भारतीय-अमेरिकी शोधकर्ताओं द्वारा किए एक शोध में यह चेताया गया कि एक्सहेलेशन वाल्व वाले मास्क के साथ फेस शील्ड पहनने के बाद भी कोरोना की चपेट में आसानी से आया जा सकता है। (covid-19-spread)
एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब कोरोना से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता है, तो उसकी खांसी के साथ निकलने वाली छींटों में मौजूद वायरस फेस शील्ड की दीवारों के बीच घूमते रहते हैं।
फ्लोरिडा अटलांटिक यूनीवर्सिटी (एफएयू) में सीटेक के निदेशक, प्राध्यापक, डिपार्टमेंट ऑफ चेयर मनहर धनक कहते हैं, "समय के साथ ये ड्रॉपलेट्स सामने और पीछे की ओर दोनों ही दिशाओं में काफी बड़े पैमाने पर फैलते हैं, हालांकि वक्त की अधिकता के साथ इनके असर में कमजोरी आती जाती है।"
शोधपत्र के मुख्य लेखक सिद्धार्थ वर्मा रहे हैं, जिनके साथ मिलकर प्रोफेसर धनक ने इसका सह-लेखन किया है। उनके इस काम में जॉन फ्रैंकफील्ड भी साथ रहे हैं, जो एफएयू के डिपार्टमेंट ऑफ ओशन एंड मेकैनिकल इंजीनियरिंग के तकनीकि विशेषज्ञ हैं।
धनक आगे कहते हैं, "हम यह देखने में समर्थ हो पाए हैं कि शील्ड की मदद से ड्रॉपलेट्स को सामने से चेहरे पर पड़ने से तो रोका जा सकता है, लेकिन हवाओं में विचरण करने वाले से ड्रॉपलेट्स शील्ड की दीवारों में पड़ने के साथ ही इधर-उधर प्रसार करते रहते हैं।"
फिजिक्स ऑफ फ्लुइड्स एकेडेमिक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में एन-95 मास्क के बारे में बताया कि इसमें मौजूद एक्सहेलेशन वाल्व की मदद से बड़ी संख्या में ड्रॉपलेट्स इनमें से होकर आप तक पहुंच सकते हैं।
इस शोध के लिए रिसर्चरों ने प्रयोगशाला में एक लेजर लाइट शीट और ड्रॉपलेट्स के रूप में डिस्टिल्ड वॉटर व ग्लिसरीन का इस्तेमाल करते हुए इनके विचरण पर गौर फरमाया और पाया कि किसी के खांसने या छींकने से निकलने वाले ये ड्रॉपलेट्स सतह पर व्यापक पैमाने पर फैलते हैं।
कुल मिलाकर, ये स्पष्ट है कि फेस शील्ड और एन-95 मास्क मिलकर भी कोरोना को रोकने की दिशा में उस हद तक कारगर नहीं हैं। ऐसे में बिना वाल्व वाले आम मास्क का उपयोग वायरस से बचने के लिए किया जा सकता है।