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एपिलेप्सी (Epilepsy) या मिर्गी एक मेंटली डिसऑर्डर है। कुछ लोग मिर्गी को एक मानसिक रोग भी कहते हैं। इस रोग में मस्तिष्क में मौजूद तंत्रिका कोशिकाओं के कामकाज बाधित होने लगते हैं, जिसके कारण व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव के साथ बेहोशी, लड़खड़ाना और दौरा पड़ने जैसे लक्षण दिखते हैं। मिर्गी का दौरा कभी भी अचानक से शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति का दिमागी संतुलन बिगड़ जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एपिलेप्सी (Epilepsy) एक न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर है जिसकी चपेट में दुनियाभर के करीब 50 मिलियन से भी ज्यादा लोग हैं। WHO यह भी कहता है कि मिर्गी रोग गरीब देशों को ज्यादा प्रभावित करता है। सोमवार को यानि कि 8 फरवरी को विश्व एपिलेप्सी डे (World Epilepsy Day 2021) मनाया जाता है। आज इस मौके पर हम आपको मिर्गी से संबंधित जरूरी बातें बता रहे हैं।
1. एपिलेप्सी या मिर्गी, मस्तिष्क से जुड़ी एक पुरानी बीमारी है जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। मिर्गी एक गैरसंक्रामक बीमारी है। यानि कि छूने से या संपर्क में आने से नहीं फैलती है।
2. दुनियाभर में करीब 50 मिलियन लोगों को एपिलेप्सी है। WHO के एक्सपर्ट कहते हैं कि यह एक कॉमन न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर है।
3. WHO का डाटा यह भी कहता है कि दुनियाभर में 80% गरीब देश के लोगों को मिर्गी रोग होता है। यानि कि लो-एंड-मिडिल-इंनकम देशों में मिर्गी रोग ज्यादा प्रभावित रहता है। (Nearly 80% of people with epilepsy live in low- and middle-income countries.)
4. यदि मिर्गी का समय पर इलाज करा लिया जाए तो 70% लोग दौरा आने की समस्या से बच सकते हैं।
5. मिर्गी के शिकार लोगों में सामान्य लोगों की तुलना में समय से पहले मौत का खतरा लगभग 3 गुना अधिक रहता है।
6. कम आय वाले देशों में रहने वाले तीन चौथाई मिर्गी के रोगियों को सही इलाज नहीं मिल पाता है। हालांकि इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं।
7. दुनिया के कई हिस्सों में मिर्गी रोगियों और उनके परिवार के साथ समाज न सिर्फ भेदभाव करता है बल्कि उन्हें अलग-अलग तरीके से प्रताड़ित भी करता है।
WHO के अनुसार गरीब देशो में जागरुकता की कमी के कारण लोग एपिलेप्सी के ज्यादा शिकार होते हैं। इसके अलावा इलाज की कमी जिसे ट्रीटमेंट गैप (“treatment gap”) कहते हैं वह भी लो-एंड-मिडिल-इंनकम देशों में मिर्गी के बढ़ने का एक कारण है। कई निम्न और मध्य-आय वाले देशों में, एंटीसेज़्योर दवा की कम उपलब्धता है। हाल के एक अध्ययन में निम्न और मध्यम आय वाले देशों के सार्वजनिक क्षेत्र में जेनेरिक एंटीसेज़्योर दवाओं की औसत उपलब्धता 50% से कम पाई गई। उपचार में बाधा आने के कारण गरीब देशों में मिर्गी का इलाज नहीं हो पाता है। ऐसे में इलाज और जागरुकता की कमी गरीब देशों या विकासशील देशों में एपिलेप्सी के बढ़ने का एक बड़ा कारण है।
डॉक्टर्स और एक्सपर्ट कहते हैं कि मिर्गी रोग होने की सबसे ज्यादा संभावना उन लोगों को होती है जिनके परिवार में पहले से किसी को ये रोग हो। जबकि जेनेटिक के अलावा ब्रेन की नर्व्स का ठीक तरह से काम न करना, बिगड़ा हुआ लाइफस्टाइल और जींस में गड़बड़ी होने पर भी व्यक्ति को मिर्गी का दौरा पड़ सकता है। इसके अलावा उस स्थिति में भी कोई व्यक्ति एपिलेप्सी का शिकार हो सकता है जब शिशु को बचपन में कोई ऐसा रोग हुआ हो जिसका संक्रमण उसके दिमाग तक पहुंच जाए मस्तिष्क को ऑक्सिजन न मिले। ऐसी स्थिति में व्यक्ति मिर्गी से पीड़ित हो सकता है। इसके अलावा, स्ट्रोक, सिर पर गंभीर चोट लगना, ब्रेन ट्यूमर और गर्भ में बच्चे के दिमाग को चोट लगना भी मिर्गी का कारण हो सकता है।