पर्यावरण प्रदूषण से अस्थमा मरीजों की संख्या 3 गुना बढ़ी : विशेषज्ञ

वायु प्रदूषण बेहद घातक होने के कारण कई तरह की बीमारियों जैसे ब्रोंकोस्पाज्म, साइनसाइटिस, सांस की बीमारियों आदि का कारण बन सकता है।

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Written By: Editorial Team | Published : November 10, 2018 7:58 PM IST

दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है। हवा गुणवत्ता सूचकांक के अनुसार, नोएडा में हवा की गुणवत्ता गिर कर 444 एक्यूआई के गंभीर स्तर पर आ गई है। इसका बुरा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सांस की बीमारियों, आंखों और त्वचा के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अस्थमा के मरीजों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। नोएडा के जेपी अस्पताल में पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ज्ञानेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि इस मौसम में प्रदूषण के इस स्तर के कारण अस्थमा के मरीजों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है और यदि प्रदूषण में सुधार नहीं हुआ तो यह संख्या और भी बढ़ सकती है। हर बीमारी का कारण है खराब पाचन शक्ति, इसे यूं रखें दुरुस्त

रहें घर के अंदर

उन्होंने कहा, "ऐसे समय में यथासंभव घर के अंदर ही रहें। आउटडोर गतिविधियां जैसे रनिंग, जॉगिंग, साइक्लिंग, जिम आदि न करें। नवम्बर से जनवरी के बीच सुबह के समय घर से बाहर न जाएं। धूल की एलर्जी से बचने के लिए अपने मुंह को रूमाल से ढक कर रखें।"

अस्थमा के मरीज रखें इन्हेलर

उन्होंने कहा, "अस्थमा के मरीज अपने साथ हमेशा इन्हेलर रखें। अच्छी गुणवत्ता का मास्क पहनें, जो पीएम 2.5 को फिल्टर कर सके, ताकि आपके फेफड़ों पर स्मॉग का असर न हो। सांस लेने में परेशानी हो तो भाप लें। विटामिन सी, ई और बीटा-कैरोटीन का सेवन करें। इससे बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। अगर आपको कोई भी परेशानी हो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।"

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डॉ. अग्रवाल ने कहा, "वायु प्रदूषण बेहद घातक होने के कारण कई तरह की बीमारियां और यहां तक कि अपंगता भी हो सकती है। यह ब्रोंकोस्पाज्म, साइनसाइटिस, सांस की बीमारियों का कारण बन सकता है। सांस के साथ अधिक मात्रा में कार्बन के शरीर में जाने से व्यक्ति थकान महसूस करने लगता है।"

यूं बरतें सावधानी

  • घर के भीतर की हवा को साफ करने के लिए प्राकृतिक एयर-प्यूरीफाइंग पौधे लगा सकते हैं जैसे मनी प्लांट, एलोवेरा और स्पाइडर प्लांट। ये सभी पौधे अपने आस-पास की हवा को साफ करते हैं। घर में केमिकल फ्रेशनर या क्लीनर का इस्तेमाल न करें। इसके अलावा बंद कमरे में मोमबत्ती या धुंए वाली चीजें न जलाएं।
  • घर की खिड़कियों को खोल कर रखें, ताकि हवा का सुगम संचार होता रहे। एसी के फिल्टर को नियमित रूप से साफ करें, ताकि कमरे में आने वाली हवा में धूल न हो।
  • घरों में अच्छे एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल कर सकते हैं। कार में बैठने से पहले कुछ देर के लिए खिड़कियां खोल दें, ताकि ताजी हवा भीतर आ जाए। कार के एसी को इन्डोर मोड में रखें।
  • इन दिनों विटामिन सी, मैग्नीशियम और ओमेगा फैटी एसिड से युक्त फलों का सेवन करें तथा पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।

स्रोत: आइएएनएस हिंदी

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