भारत में 45 के बाद दोगुना होता अस्पताल जाने का खतरा, बढ़ती बुजुर्ग आबादी ने बढ़ाई चिंता

Hospitalization risk increases after 45: नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (NSO) द्वारा किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है कि भारत में 45 साल की उम्र के बाद अस्पताल में भर्ती होने का खतरा दोगुना हो जाता है।

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : May 5, 2026 10:20 AM IST

जिम वर्कआउट और हेल्दी खानपान को अपनाने के बाद 40 की उम्र में भी हम लोग खुद को फिट और हेल्दी मानते हैं। खानपान सही होने के कारण न तो हम रूटीन हेल्थ चेकअप करवाते हैं और न ही किसी प्रकार के हल्के लक्षण सामने आने के बाद डॉक्टर के पास जाना सही समझते हैं। लेकिन असल सच्चाई इससे कहीं ज्यादा अलग है। हाल ही में National Statistical Office (NSO) की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि 45 साल की उम्र के बाद अस्पताल में भर्ती होने का खतरा लगभग दोगुना हो जाता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, लोगों को अस्पताल जाने का खतरा दोगुना हो जाता है। सर्वे बताता है कि 40 की उम्र के बाद हमारा शरीर बाहर से सामान्य लगे, लेकिन अंदर से वो बदल रहा होता था। यही वो समय होता है जब छोटी-छोटी दिक्कतें भी बड़ी बीमारी का रूप ले सकती हैं।

उम्र बढ़ने पर क्यों बढ़ता है बीमारी का खतरा?

NSO की रिपोर्ट बताती है कि जैसे- जैसे हमारे शरीर की उम्र बढ़ती है, उसका इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ने लगता है। इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा ज्यादा हो जाता है। साथ ही, उम्र के साथ शरीर की ताकत धीरे-धीरे कम हो जाती है। जिससे इम्यून सिस्टम (रोगों से लड़ने की क्षमता) कमजोर हो जाता है और शरीर जल्दी बीमार पड़ने लगता है। इसके अलावा उम्र बढ़ने पर क्रोनिक डिजीज जैसे- डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है। क्रोनिक और इम्यून सिस्टम से जुड़ी बीमारियां लंबे समय तक चलती हैं और बार-बार अस्पताल जाने की जरूरत पड़ती है। उम्र के साथ हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे गिरने या चोट लगने का खतरा बढ़ता है।

Dieases 45 की उम्र में बीमारियां बढ़ने के कई कारण हैं।

45 की उम्र में अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं युवा

सर्वे के अनुसार, 30 से 44 साल के लोगों में हर 1,000 में से करीब 23 लोग साल में 1 बार अस्पताल में जरूर भर्ती होते हैं। लेकिन 45 से 59 साल की उम्र में यह संख्या बढ़कर 42 लोग प्रति 1,000 हो जाती है। 60 साल या उससे ज्यादा उम्र में यह और बढ़कर लगभग 81 लोग प्रति 1,000 हो जाती है, यानी लगभग दोगुना। इसके मुकाबले 15 से 29 साल के युवाओं में सिर्फ 15 लोग प्रति 1,000 को ही अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है। सर्वे की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 0 -4 साल के छोटे बच्चों में भी अस्पताल में भर्ती होने की दर 34 प्रति 1,000 है, जो युवाओं से ज्यादा है।

इसका मतलब यह है कि सबसे ज्यादा खतरा बहुत छोटे बच्चों और बुजुर्गों में होता है।

भारत में बढ़ रही है बुजुर्गों की संख्या

रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि भारत में अब लोग पहले से ज्यादा लंबा जीवन जी रहे हैं। इसका मतलब है कि बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 60 साल से ऊपर के लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गौर करने वाली बात यह है कि आने वाले समय में यह संख्या और भी ज्यादा बढ़ने वाली है। इसका मतलब है कि अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ेगी। जाहिर सी बात है जब लोग बीमारी ज्यादा होंगे, तो अस्पताल पर भी दबाव बनेगा।

क्या समस्याएं सामने आ रही हैं?

45 की उम्र के लोगों में बीमारियों का बोझ बढ़ने और अस्पताल में भर्ती होने से कई प्रकार की समस्याएं सामने आ रही है। इसमें शामिल हैः

  1. सरकारी और प्राइवेट के अस्पतालों में बेड कम पड़ रहे हैं।
  2. अस्पतालों में डॉक्टर और नर्स की कमी हो सकती है।
  3. विभिन्न प्रकार की बीमारियों का इलाज महंगा होता जा रहा है।
  4. लंबे समय तक इलाज की जरूरत पड़ सकती है।

प्राइवेट अस्पतालों की तुलना में सरकारी अस्पतालों में इस प्रकार की परेशानी ज्यादा देखी जाती है और आने वाले समय में और ज्यादा बढ़ सकती है।

Hospital बढ़ती बीमारियों के कारण अस्पतालों में बोझ बढ़ रहा है।

45 की उम्र में कौन सी बीमारियां होती हैं?

सर्वे बताता है कि 45 की उम्र के बाद हार्ट अटैक और ब्लॉकेज, खराब लाइफस्टाइल के कारण डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, गठिया, सांस की बीमारी, किडनी की समस्या ज्यादा होने का खतरा रहता है। इन बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती होने की संभावना बढ़ जाती है।

गांवों और शहरों के डेटा में है फर्क

NSO की रिसर्च बताती है कि भारत के शहरी इलाकों में 45 साल की उम्र के बाद हॉस्पिटलाइजेशन का आंकड़ा ज्यादा है। शहरों में हॉस्पिटलाइजेशन इसलिए ज्यादा देखने को मिल रहा है, क्योंकि वहां मेडिकल सुविधाएं आसानी से मौजूद हैं और लोगों को समय पर इलाज मिल जाता है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में हॉस्पिटलाइजेशन का आंकड़ा इसलिए कम क्योंकि वहां अस्पतालों की कमी है। इसलिए लोग समय पर अस्पताल पहुंच जाते हैं।

बीमारियों से बढ़ रहा है आर्थिक बोझ

45 साल की उम्र में लोगों में बढ़ रहे हॉस्पिटलाइजेशन के कारण परिवार पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। इससे लोगों की बचत खत्म हो रही है। भारत में अभी भी बहुत से लोगों के पास हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है, जिससे परेशानी और बढ़ जाती है। सर्वे बताता है कि हॉस्पिटलाइजेशन की स्थिति में कई बार लोगों को इलाज, दवा और सर्जरी के खर्च के लिए कर्ज लेना पड़ता है। इससे परिवार पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ समय के साथ बढ़ने लगता है।

45 साल की उम्र के बाद कैसे करें बीमारियों से बचाव

45 साल की उम्र के बाद बीमारियां शरीर को बचाने के लिए 40 साल की उम्र में ही खुद की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है।

  1. साल में 1 बार पूरा हेल्थ चेकअप कराएं
  2. ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल रखें
  3. रोज कम से कम 30 मिनट एरक्सरसाइज करें
  4. 30 की उम्र के बाद धूम्रपान और शराब से दूर रहें
  5. रात को 7 से 8 घंटे की नींद जरूर लें
  6. वजन को कंट्रोल में रखने की कोशिश करें
  7. ऑफिस में सीढ़ियां चढ़ें, लिफ्ट कम इस्तेमाल करें
  8. रोजाना 3 लीटर पानी जरूर पिएं।
  9. घर का बना खाना खाएं
  10. मोबाइल और स्क्रीन टाइम कम करें

Disclaimer: भारत में बढ़ती बुजुर्ग आबादी और 45 साल के बाद अस्पताल में भर्ती होने का बढ़ता खतरा एक गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। National Statistical Office की यह रिपोर्ट हमें समय रहते सावधान करती है। अच्छी बात यह है कि 45 साल की उम्र के बाद जिस प्रकार की बीमारियां बढ़ रही हैं, उसे समय पर कंट्रोल किया जा सकता है। इस प्रकार की बीमारियों से बचाव करने के लिए सही खानपान रखें, नियमित जांच कराएं और एक्टिव लाइफस्टाइल को अपनाएं।

FAQs

डायबिटीज में अचानक मौत क्यों होती है?

अचानक हार्ट अटैक, शुगर का बहुत ज्यादा या कम होना, और DKA जैसी स्थिति में इसका कारण बनती हैं।

डायबिटीज का सबसे खतरनाक असर क्या है?

दिल की बीमारी, किडनी फेलियर और अंधापन इसके सबसे खतरनाक प्रभाव हैं।    

टाइप 2 डायबिटीज का क्या मतलब है?

टाइप 2 डायबिटीज एक पुरानी बीमारी है जिसमें ब्लड शुगर (ग्लूकोज) का लेवल बहुत ज़्यादा हो जाता है क्योंकि शरीर काफ़ी इंसुलिन नहीं बनाता या उसे रोकता है, जिससे ग्लूकोज का ठीक से इस्तेमाल नहीं हो पाता। यह सबसे आम बीमारी है, जो अक्सर वज़न, इनएक्टिविटी और जेनेटिक्स से जुड़ी होती है, जिससे लंबे समय तक सेहत को गंभीर खतरा होता है।

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