
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : May 18, 2026 8:56 AM IST
(this image was edited with the help of chatgpt)
अफ्रीकी देश Democratic Republic of the Congo एक बार फिर खतरनाक इबोला वायरस संक्रमण की चपेट में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, इबोला वायरस से अब तक 80 से ज्यादा लोगों को मौत हो चुकी है, जबकि इससे प्रभावित सैकड़ों लोगों को निगरानी में रखा गया है। कांगो और युगांडा में इबोला वायरस के कहर को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस संक्रामक बीमारी को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। WHO का कहना है कि समय रहते इबोला संक्रमण पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो यह स्थिति कई देशों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। कोरोना महामारी के बाद दुनिया पहले ही संक्रमणों को लेकर सतर्क है, ऐसे में इबोला का नया प्रकोप वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चुनौती बन गया है।
आंकड़ों की बात करें तो 16 मई तक कांगो के इटुरी प्रांत में इबोला के 246 संदिग्ध मामले मिल चुके हैं और 80 लोगों की मौत इस संक्रमण से हो चुकी है। रिपोर्ट्स बताती है कि इबोला सिर्फ कांगों के छोटे इलाकों तक सीमित नहीं है। इस संक्रमण का असर किंशासा और युगांडा की राजधानी कंपाला जैसे बड़े शहरों में भी है।
कांगो के कई ग्रामीण इलाकों में अचानक तेज बुखार और रक्तस्राव के मामलों की संख्या बढ़ने लगी। शुरुआती जांच में डॉक्टरों को इबोला संक्रमण का शक हुआ। बाद में लैब रिपोर्ट्स में इसकी पुष्टि हो गई। संक्रमण फैलने के बाद स्थानीय अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और जागरूकता की कमी ने हालात को और गंभीर बना दिया। कई गांवों में लोग बीमारी को सामान्य बुखार समझकर इलाज नहीं करा रहे थे, जिससे संक्रमण तेजी से फैल गया। WHO और स्थानीय स्वास्थ्य एजेंसियों ने मिलकर संक्रमित इलाकों को हाई रिस्क जोन घोषित किया है। प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों को भेजा गया है और लोगों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है।
कांगो में इबोला वायरस से 80 लोगों की मौत हो गई है।
कांगो में इबोला संक्रमण के मामले सामने आने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। WHO के डायरेक्टर जनरल डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने कहा है कि इबोला ने कहा फिलहाल किसी प्रकार की महामारी जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन अगर इस संक्रमण पर सही तरीके से काम न किया जाए तो आने वाले समय में हालात और भी ज्यादा बिगड़ सकते हैं। WHO की ओर से जारी किए गए बयान में साफ तौर पर कहा गया है कि इबोला को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने का मतलब है कि दुनिया के सभी देशों को इस संक्रमण के प्रति गंभीरता दिखानी होगी। एयरपोर्ट स्क्रीनिंग, मेडिकल निगरानी और संक्रमण नियंत्रण उपायों को मजबूत किया जाएगा।
WHO की रिपोर्ट की रिपोर्ट बताती है कि इबोला एक अत्यंत घातक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों या इंसानों के संपर्क से फैलती है। यह वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद तेज बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त और आंतरिक रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्याएं पैदा करता है। इबोला संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति का सही समय पर इलाज न किया जाए तो उसकी मौत तक हो सकती है। किसी भी अन्य संक्रमण की तुलना में इबोला वायरस की मृत्यु दर काफी अधिक मानी जाती है। कुछ प्रकोपों में यह 50 से 90 प्रतिशत तक देखी गई है। यही कारण है कि इबोला को वैश्विक स्तर पर घातक संक्रमण में गिना जाता है।
शुरुआती स्टेज में इबोला संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति में लक्षण सामान्य वायरल फीवर जैसे लग सकते हैं। लेकिन कुछ समय के बाद स्थिति गंभीर हो सकती है। इबोला के मुख्य लक्षणों में शामिल हैः
ebola virus (Image credit: chatgpt)
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट बताती है कि अगर किसी व्यक्ति में यह लक्षण 4 से 5 दिन से ज्यादा बने रहते थे, तो उसे डॉक्टर से मिलकर इबोला संक्रमण की जांच जरूर करवानी चाहिए।
Disclaimer: इबोला एक घातक संक्रमण है। अगर आपने या आपके परिवार के किसी सदस्य ने हालही में इबोला से संक्रमित क्षेत्र की यात्रा की है या आपको खुद में इबोला के कुछ लक्षण नजर आ रहे हैं, तो इस विषय पर डॉक्टर से बात करें।