इबोला संक्रमण से अब तक 130 लोगों की मौत, WHO ने नए स्ट्रेन की वैक्सीन पर जताई चिंता
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, इबोला वायरस से अब तक 130 से ज्यादा लोगों को मौत हो चुकी है। चिंता की बात यह है कि इबोला वायरस के नए स्ट्रेन से बचाव के लिए फिलहाल कोई वैक्सीन मौजूद नहीं है।
कोरोना महामारी के बाद दुनिया पर एक और वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। कांगो और युगांडा में इबोला संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इबोला वायरस से अब तक 130 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 500 से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। आने वाले कुछ समय में इबोला संक्रमण का कहर और भी ज्यादा देखने को मिल सकता है। आशंका जताई जा रही है कि इबोला के नए स्ट्रेन की वैक्सीन जल्द ही नहीं बनाई गई, तो और लोगों को इस संक्रमण से अपनी जान गवानी पड़ सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि इबोला का एक नया स्ट्रेन तेजी से फैल रहा है, जो पहले के मुकाबले ज्यादा खतरनाक हो सकता है। WHO प्रमुख Tedros Adhanom Ghebreyesus ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि इबोला के नए स्ट्रेन से बचाव करना बहुत जरूरी है। इस बार इबोला संक्रमण बुंडीबुग्यो स्ट्रेन (Bundibugyo strain) से जुड़ा हुआ है। यह इबोला वायरस का दुर्लभ प्रकार माना जाता है, जिसके लिए अभी तक कोई इलाज या वैक्सीन मौजूद नहीं है।
WHO ने घोषित की ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी
इबोला वायरस के मामले इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं कि WHO ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। WHO द्वारा लगातार इस संक्रमण से बचाव करने की एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही है। WHO की ओर से इबोला संक्रमण को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर एहतियात बरती जा रही है।
पहले भी प्रकोप फैल चुका है बुंडीबुग्यो स्ट्रेन
University of Glasgow Centre for Virus Research के अनुसार, इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन पहले भी अफ्रीकी देशों में अपना प्रकोप दिखा चुका है। 2007-08 में युगांडा के बुंडीबुग्यो जिले में बुंडीबुग्यो स्ट्रेन की चपेट में लगभग 131 लोग आए थे, जबकि 42 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद 2012 में बुंडीबुग्यो स्ट्रेन का कहर देखा गया था। 2012 में DRC के इसिरो इलाके में 38 लैब-कन्फर्म केस और 13 मौतें दर्ज की गई थीं। हालांकि इस स्ट्रेन में मृत्यु दर अन्य इबोला प्रकोपों से कम रही है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है।
इबोला ने नए स्ट्रेन के नहीं मौजूद है वैक्सीन
WHO के मुताबिक बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ दो संभावित वैक्सीन विकसित की जा रही हैं, लेकिन अभी तक उनका क्लीनिकल ट्रायल पूरा नहीं हुआ है। WHO सलाहकार Vasee Moorthy ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि नई वैक्सीन को तैयार होने और परीक्षण पूरा करने में कई महीने लग सकते हैं। हालांकि इस दौरान WHO ने साफ किया है कि फिलहाल यह इबोला वायरस के कारण कोई वैश्विक महामारी नहीं है, लेकिन इसे लेकर ग्लोबल हेल्थ वॉर्निंग जारी की गई है ताकि संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके।
इबोला के लक्षण क्या हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार वायरस शरीर में पहुंचने के 2 से 21 दिनों के भीतर लक्षण दिखा सकता है। इबोला के प्रमुख लक्षणों में शामिल हैः
- तेज बुखार और ठंड लगना
- आंखों के पीछे दर्द
- दस्त और उल्टी होना
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
- अत्यधिक कमजोरी और थकान
- तेज सिरदर्द
- उल्टी और मतली
विशेषज्ञों का कहना है कि इबोला कोविड-19 की तरह हवा से नहीं फैलता, लेकिन संक्रमित व्यक्ति के करीब संपर्क में आने से तेजी से संक्रमण फैल सकता है। इसलिए इससे बचाव आसानी से किया जा सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल आपकी जागरुकता के लिए हैं। अगर आपको कोई खास लक्षण महसूस हो तो परेशान न हो, समय पर डॉक्टर को दिखाकर जांच कराएं।