
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : May 21, 2026 12:36 PM IST
इबोला वायरस
Ebola Or Iska Death Rate: इबोला वायरस का प्रकोप दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है और कांगो-युगांडा में इससे मरने वालों की संख्या 100 से अधिक पहुंच गई है। बात दें कि यह वायरस जंगली जानवरों जैसे फ्रूट्स बैट्स, प्रोक्यूपीन्स और नॉन ह्यूमन प्राइमेट्स, से मनुष्यों में फैलता है और फिर संक्रमित लोगों के रक्त, स्राव, अंगों या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क के माध्यम से शरीर में फैलता है और फिर इन तरल पदार्थों से इंफेक्टिड सरफेस और सामग्रियों जैसे बिस्तर और कपड़े आदि के संपर्क के माध्यम से मानव आबादी में फैलता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में इस इबोला प्रकोप को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (PHEIC) घोषित किया है। साथ ही युगांडा और डीआर कांगो में इस वायरस से मरने वालों की संख्या 100 से बार होने के बाद भारत ने एहतियात के तौर पर निगरानी, स्क्रीनिंग और अस्पतालों की तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुन्या सलीला श्रीवास्तव ने बुधवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें इबोला वायरस रोग के खिलाफ तैयारियों और प्रतिक्रिया उपायों की के बारे में चर्चा की गई। इस बैठक का उद्देश्य इबोला संक्रमण से निपटने के लिए देश की तैयारियों और फीडबैक सिस्टम का एसेसमेंट करना था।
बैठक के दौरान तय किया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के हर स्तर पर तैयार किया जाए। इसके लिए किसी के आने से पहले व बाद में स्क्रीनिंग की जाए। साथ ही क्वारेंटाइन प्रोसीजर, लैबोरेस्ट्री टेस्टिंग, केस मेनेजमेंट और और रेफरल मकैनिज्म को कवर करने वाली स्टैंडर्ड ऑप्रेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को पहले ही प्रसारित (सर्कुलेट) कर दिया है।
इस बात पर जोर दिया कि भारत को इबोला से संबंधित तैयारियों से निपटने का पूर्व अनुभव है, और रिपोर्ट के अनुसार उसने अफ्रीका में 2014 के इबोला प्रकोप का हवाला दिया जब इसी तरह के एहतियाती उपायों को सफलतापूर्वक लागू किया गया था। बता दें कि साल 2014 में वेस्ट अफ्रीका में भी इबोला का प्रकोप बढ़ा था। इस दौरान 28 हजार लोग संक्रमित हुए थे और 11 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
उस दौरान भी भारत सरकार ने सतर्कता दिखाई और आज भी भारत किसी भी उभरती स्थिति से तेजी से निपटने के लिए तैयार है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 18 मई तक युगांडा और डीआर कांगो में इबोला के कुल 528 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें 132 मौतें शामिल हैं। रिपोर्स्ट के मुताबित इन दोनों अफ्रीकी देशों में फैले संक्रमण का संबंध बंडीबुग्यो (Bundibugyo) वायरस के स्ट्रेन से है। WHO के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 668 संक्रमितों की पहचान की गई है, जिनमें से 541 डीआरसी में और 127 युगांडा में हैं।
डिस्क्लेमर: भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में फिलहाल इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है। लेकिन एहतियात के तौर पर सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। एयरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग, लैब टेस्टिंग की क्षमता और क्वारंटीन सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।