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Written By: Mousumi Dutta | Published : November 24, 2017 10:01 AM IST
आजकल की लाइफस्टाइल ऐसी हो गई है कि लोगों को सही समय पर और हेल्दी खाना खाने का समय ही नहीं है। शायद आपको पता नहीं कि खाने-पीने में हुए अंसतुलन या सही तरह से नहीं खाने पर उसका सेहत और मन दोनों पर पड़ता है। आजकल के युवा वर्ग तरह-तरह के बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। और इस अकारण बीमार पड़ने के पीछे एक ही कारण है उनका खान-पान। अगर कोई वेट कंट्रोल करने के चक्कर में कैलोरी काउन्ट कम करना चाहते हैं और इसलिए मीठा खाना बिल्कुल बंद कर देते हैं वह हमेशा स्ट्रेस में रहेंगे या बेचैन महसूस करेंगे। ऐसे लोगों को चाहिए कि सही निर्देशन में डायट प्लान करें जो कि शरीर के बनावट के अनुसार होना चाहिए। यूरोपियन ईटिंग डिसऑर्डर रिव्यु के अनुसार सही खान-पान या ईटिंग डिसऑर्डर के अभाव में शरीर का वज़न बढ़ना, कमर में चर्बी होना, मनोवैज्ञानिक तौर पर अच्छा महसूस न करना इसके मूल लक्षण होते हैं। यानि आत्मविश्वास कम महसूस होता है।
उल्ला कारकियान (Ulla Kärkkäinen), यूनीवर्सिटी ऑफ हेल्सिन्की इन फिनलैंड का अनुसंधानकारक का कहना है कि विश्रंखल खान-पान का सीधा असर युवा वर्ग के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। जो लोग लंबे समय तक मनोवैज्ञानिक तौर पर अस्वस्थ और जिनका आत्मविश्वास कम होता है उनका सीधा संबंध खान-पान से होता है। यहां तक कि नकारात्मक मनोभाव का कारण भी खान-पान से जुड़ा होता है।
दस सालों के कई अध्ययनों से ये साबित हुआ है कि जो महिला और पुरूष लोग मनोवैज्ञानिक तौर पर हमेशा दूसरों से कम महसूस करते हैं या नकारात्मक मनोभावना से ग्रस्त रहते हैं उसका कारण उनका विश्रंखल खान-पान की आदत होती है। यहां तक कि ये भी पाया गया है कि ये लक्षण पुरूषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा होता है।
सौजन्य: IANS
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