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नई स्टडी में पाया गया है कि ओमिक्रोन वेरिएंट वर्तमान में मौजूद वैक्सिन से बच पाने में भी सफल है। इसे न्यूट्रिलाइजेशन के समय सेल्स से एस्केप किया जाता पाया गया है। इस कारण यह वायरस सबसे तेजी से फैल रहा है।
जुलाई 19 को, प्रोसीडिंग ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में पब्लिश किया गया कि ओमिक्रोन की म्यूटेशन कोविड के तेजी से फैलने का रिस्क बढ़ाती है और एंटी बॉडी को भी कम करती हैं।
रिसर्चर्स ने पाया कि वायरस वायरस के जैसे पार्टिकल्स का प्रयोग कर रहा है जो SARS COV2 के पार्टिकल्स की ही कॉपी कर रहा है। चार कोविड के वेरिएंट के मरीजों के सैंपल लिए गए जोकि कुछ लोग वैक्सिनेटेड थे और कुछ लोगों का वैक्सिन नहीं लगी थी।
इस स्टडी में यह पाया गया कि बी 1 स्ट्रेन के मरीजों में जिनको वैक्सिन लग चुकी थी वायरस का प्रभाव ओमिक्रोन के मुकाबले 15% कम था। जिन मरीजों ने तीसरी वैक्सिन लगवा ली थी उनके अंदर न्यूट्रिलाइज प्रभाव ज्यादा पाया गया था। इसमें पाया गया कि केवल बेबटेलोविमेब ओमिक्रोन के प्रति सबसे ज्यादा प्रभावी पाई गई।
हालांकि ओमक्रोन न्यूट्रिलाइज करने के मामले में सबसे ज्यादा कठिन वेरिएंट था। रिसर्चर ने पहले से ही एक्सिस्ट हो रही मोनोक्लोनल एंटीबॉडी को पाया जो इस वेरिएशन को विट्रो न्यूट्रलाइज करने में मददगार था।
इसका इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि मोलेकुलर फैक्टर किस तरह से समझे गए हैं और यह रेस्पिरेटरी सिंड्रोम को किस प्रकार से प्रभावित कर रहे हैं।
रिसर्चर का मानना है की जिस हिसाब से स्ट्रक्चरल प्रोटीन के प्रभाव को इवेलुएट किया जा रहा है उस तरीके के कुछ नेगेटिव पॉइंट्स भी है। म्यूटेशन का नंबर ज्यादा होने के कारण कोई भी एक निष्कर्स निकालना संभव नहीं है। हर तरह के नतीजों में कोई न कोई उतार चढ़ाव आ सकता है।