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Written By: IANS | Published : October 5, 2019 9:20 PM IST
ई सिगरेट यानी इलैक्ट्रॉनिक सिगरेट भी साधारण सिगरेट की ही तरह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। जबकि ई-सिगरेट लॉबी अपने घाटे से परेशान है और सरकार के इस प्रतिबंध को हटवाने की कोशिश कर रही है। © Shutterstock.
वैपिंग पर प्रतिबंध से बेफिक्र ई-सिगरेट ट्रेड बॉडी टीआरईएनडीएस अब सभी सांसदों से मुलाकात करेगा और उन्हें समझाएगा कि सरकार के इस कदम (Ban on E-cigarette) से उनका 350 करोड़ रुपये का कारोबार चौपट हो गया है। टीआरईएनडीएस (ईएनडीएस के व्यापार प्रतिनिधि) के संयोजक, प्रवीण रिखी ने कहा, "हमारे सांसद प्रबुद्ध लोग हैं। वे निश्चित रूप से नागरिकों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित होंगे। अभियान के अगले कदम के तहत हम हर सांसद से मिलने जा रहे हैं।"
इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम्स (ईएनडीएस) में विभिन्न तरह के वैपिंग उपकरण आते हैं, जैसे ई-सिगरेट, हीट-नॉट-बर्न डिवाइस, वेप, ई-शीशा और ई-निकोटिन फ्लेवर्ड हुक्का तथा अन्य उपकरण। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खासतौर से युवाओं में स्वास्थ्य समस्याओं का जिक्र करते हुए पिछले महीने एक अध्यादेश के जरिए ईएनडीएस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया।
इस निर्णय से ईएनडीएस के कारोबारियों को बड़ा झटका लगा है। टीआरईएनडीएस ने इस निर्णय को विडंबनापूर्ण और अस्थिरकारी बताया और कहा कि यह प्रतिबंध चुनिंदा वैज्ञानिक एवं चिकित्सकीय राय के आधार पर लगाया गया है। रिखी ने कहा, "मुझे लगता है कि इसका असर उद्योग से अधिक भारत के नागरिकों पर पड़ने जा रहा है।" उन्होंने कहा कि ईएनडीएस धूम्रपान का अपेक्षाकृत कम हानिकारक विकल्प है।
स्वास्थ्य रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि ई सिगरेट यानी इलैक्ट्रॉनिक सिगरेट भी साधारण सिगरेट की ही तरह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इसमें निकोटीन भरा जाता है। यह जब गर्म होता है तो इससे धुआं जनरेट होता है, जिसे लोग कश की तरह खींचते हैं। यह फेफड़ों के लिए खतरनाक है। कुछ ई सिगरेट में अलग-अलग तरह के फ्लेवर डाले जाते हैं। यह मेंटल हेल्थ के लिए काफी खतरनाक है। जिससे ड्रग एडिक्शन बढ़ने का जोखिम रहता है।
जिसका उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने और सजा का प्रावधान रखा गया है। पहली बार ई सिगरेट के इम्पोर्ट, प्रचार या बिक्री में दोषी पाए जाने पर 1 साल की जेल और 1 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। जबकि एक से अधिक बार इस मामले में दोषी पाए जाने पर जुर्माने की रकम पांच लाख और सजा तीन साल तक की हो सकती है।