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Written By: Atul Modi | Published : November 13, 2021 10:17 PM IST
COPD is the second most common cause of non-communicable disease -related mortality in India.
पिछले 1 सप्ताह से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के शहर वायु प्रदूषण से बुरी तरह से प्रभावित हैं। दिल्ली एनसीआर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बेहद बुरे स्तर पर हैं। कई जगहों पर AQI 500 के पार पहुंच गया है। जिसके चलते दिल्ली के अस्पतालों में सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। वायु प्रदूषण के कारण बच्चे भी अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। दिल्ली सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट की बाद दिल्ली के सभी स्कूलों को 1 सप्ताह के लिए बंद कर दिया है और सरकारी व निजी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम के निर्देश दिए हैं।
दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल के एमडी डॉक्टर सुरेश कुमार ने कहा कि, प्रदूषण का स्तर बड़ी चिंता का विषय है। इससे बुजुर्गों, स्कूल जाने वाले बच्चे, वे मरीज़ जिन्हें सांस की तक़लीफ है या वे मरीज़ जिन्हें पहले कोविड हो चुका है, उनकी समस्या बढ़ गई है। हमारे वार्ड में ऐसे मरीज़ आ रहे हैं जिन्हें सांस लेने में तकलीफ़ हो रही है।
डॉक्टर सुरेश बताया कि, प्रदूषण के चलते हमारे यहां 10-15 प्रतिशत मरीज़ों में बढ़ोतरी हुई हैं। सांस की तकलीफ़ के मरीज़ों की संख्या हमारे यहां बढ़ी है। उन्होंने कहा कि, दीपावली के बाद ऐसे बच्चे आ रहे हैं, जिन्हें सांस लेने में तकलीफ़ हो रही है।
वायु प्रदूषण को लेकर आज सुबह सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई तो सीवी रमन सुबह सरकार से सवाल पूछे उन्होंने कहा कि आप देख रहे हैं कि स्थिति कितनी खतरनाक है। हमें घरों पर भी मास्क लगाकर बैठना पड़ेगा। आखिर क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इस पर केंद्र की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वायु प्रदूषण का पहला कारण पराली जलाया जाना है। एसजी ने कहा कि किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए कुछ नियम होने चाहिए, जिससे राज्य सरकारें उन पर कार्रवाई कर सकें। चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना ने कहा कि ऐसी स्थिति में तो लगता है कि घर में भी मास्क पहनकर ही बैठना होगा। कोर्ट ने केंद्र सरकार को वायु प्रदूषण से निपटने की तरकीब निकालने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वायु प्रदूषण को लेकर एक आपात बैठक बुलाई जिसके बाद उन्होंने 1 सप्ताह के लिए स्कूल बंद करने के आदेश दिए और साथ ही सरकारी दफ्तरों और प्राइवेट कंपनियों को वर्क फ्रॉम होम के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन जारी रहेगी।