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आखिर मोदी सरकार के इस फैसले का क्‍यों विरोध कर रहे हैं दिल्‍ली के AIIMS और LNJP के चिकित्‍सक?

आखिर मोदी सरकार के इस फैसले का क्‍यों विरोध कर रहे हैं दिल्‍ली के AIIMS और LNJP के चिकित्‍सक?

मोदी सरकार के फैसले को लेकर, डॉक्टरों का मानना है कि इस कदम से फर्जी चिकित्सालयों को बढ़ावा मिलेगा और मरीजों की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और लोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल (एलएनजेपी) सहित दिल्ली के कई सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों ने शुक्रवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) द्वारा दिए गए विरोध प्रदर्शन के आह्वान को समर्थन दिया। वे अपने काम के दौरान काले रिबन पहने रहेंगे। गौरतलब है कि आईएमए, केंद्र द्वारा दिए गए आयुर्वेदिक डॉक्टरों को विभिन्न सामान्य सर्जरी करने की अनुमति का विरोध कर रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, यह अनुमति आधुनिक चिकित्सा विज्ञान पर हमला है।

मोदी सरकार के फैसले का क्‍यों हो रहा है विरोध?

एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के अध्यक्ष आदर्श प्रताप सिंह ने कहा, "हम आधुनिक चिकित्सा बिरादरी के बाकी लोगों के साथ सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम) से अपने गजट नोटिफिकेशन के आधार पर 'मिक्सोपैथी' के लिए सरकार के उस कदम का विरोध करते हैं, जो आयुर्वेद के पीजी छात्रों को सामान्य सर्जरी करने की अनुमति देता है।"

चिकित्‍सकों की मांग क्‍या है?

एलएनजेपी के डॉक्टरों ने भी हड़ताल में भाग लेने की घोषणा की और सरकार से सीसीआईएम अधिसूचना को वापस लेने की मांग की। एलएनजेपी के आरडीए अध्यक्ष डॉ. केशव सिंह ने कहा, "हम दवा की स्वदेशी प्रणाली का समर्थन करते हैं। हालांकि, हम सरकार के उस नियम का विरोध करते हैं जो एलोपैथिक प्रक्रियाओं का अभ्यास करने के लिए आयुर्वेद को अनुमति दे रहा है।"

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मेडिकल कॉलेज, सरकारी सेवाओं, सामान्य चिकित्सकों, विशेषज्ञों, रेजीडेंट डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों के चिकित्सक केंद्र द्वारा तीन विवादास्पद कदमों के खिलाफ एकजुट हुए हैं, जिसमें सीसीआईएम द्वारा नवीनतम संशोधन शामिल हैं। इसमें आयुर्वेदिक स्नातकोत्तर छात्र 66 प्रकार की चिकित्सा प्रक्रियाओं को करने के लिए औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने की भी बात कही गई है।

डॉक्टरों का मानना है कि इस कदम से फर्जी चिकित्सालयों को बढ़ावा मिलेगा और मरीजों की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।

डॉ. आदर्श ने कहा, "आधुनिक चिकित्सा वर्षों के दौरान साक्ष्य पर आधारित अनुसंधान के माध्यम से विकसित हुई है, जिसने प्रभावशीलता और सुरक्षा दोनों को सुनिश्चित किया है। यह कदम न सिर्फ पहले से ही व्यापक फर्जी चिकित्सालयों को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि जनता की सुरक्षा को भी खतरे में डाल सकता है। हम भारत सरकार से इस अधिसूचना को तुरंत वापस लेने का अनुरोध करते हैं।"

डॉ. केशव ने अपना तर्क दिया, "आयुष चिकित्सक जो प्रक्रियाएं अपनाने वाले हैं वे हमारे द्वारा अध्ययन और अभ्यास के वर्षों के बाद सीखी जाती हैं। यदि वे (आयुष चिकित्सक) प्रक्रियाओं का पालन करते हैं, तो यह रोगियों के जीवन को खतरे में डाल देगा। मीडिया में पहले ही कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें फर्जी चिकित्सालयों के खतरनाक परिणाम सामने आए हैं।"

--आईएएनएस

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