
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : October 23, 2025 3:54 PM IST
Medically Verified By: Dr Piyush Goel
Delhi Ke Air Pollution Se Kaise Bache: दिल्ली की हवा बमुश्किल ही किसी दिन साफ होती है, लेकिन दिवाली से कुछ दिन पहले और उसके बाद तो हवा में जैसे जहर घुल गया है। इस साल लोगों को पटाखे जलाने के परमिशन क्या मिली, लोगों ने तो हद ही कर दी है। पटाखे जलाने से जन हानी तो बहुत हुई है, साथ ही पॉल्यूशन भी इतना ज्यादा मात्रा में दूषित हुआ है कि कमरे में बैठे-बैठे आंखों में जलन हो रही है। पॉल्यूशन न सिर्फ आंखों को दिक्कत करता है, बल्कि और भी समस्याएं जो इस जहरीली हवा में रहने से दिल्ली वालों को परेशान कर रही हैं।
दरअसल दिल्ली की हवा की गुणवत्ता इतना खराब हो गई है कि व्यापक रूप से सांस से संबंधित समस्याएं पैदा हो रही हैं। ऐसे में हर किसी के लिए जरूरी हो गया है कि वह घर से बाहर निकलने से पहले कुछ जरूरी बचाव करें। इसलिए हमने नारायणा हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉक्टर पीयूष गोयल से बात की और विस्तार से जाना कि इस बढ़ते पॉल्यूशन से किसे सबसे ज्यादा खतरा है? और नेचुरल तरीके से हम अपने लंग्स की सुरक्षा कैसे कर सकते हैं। आइए जानते हैं डॉक्टर ने क्या कहा।
डॉक्टर ने बताया कि 'दिल्ली में वर्ष 2025 की सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण का स्तर एक बार फिर खतरनाक सीमा तक पहुंच गया है। यह प्रदूषण न केवल आंखों में जलन या गले में खराश पैदा कर रहा है, बल्कि धीरे-धीरे फेफड़ों की कार्यक्षमता को भी प्रभावित कर रहा है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण, खासकर PM2.5 और PM10- फेफड़ों में सूजन और संक्रमण का कारण बनते हैं, जिससे सांस लेने में कठिनाई और पुरानी श्वसन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टर ने अहम जानकारी शेयर करते हुए बताया कि 'इस प्रदूषण के सबसे अधिक शिकार बच्चे, बुजुर्ग और ऐसे लोग होते हैं जिन्हें पहले से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या हृदय संबंधी रोग हैं। इसके अलावा गर्भवती महिलाएं और खुले वातावरण में काम करने वाले लोग भी उच्च जोखिम में रहते हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से फेफड़ों की क्षमता घटती है और ऑक्सीजन का आदान-प्रदान प्रभावित होता है, जिससे थकान, खांसी और सांस फूलने जैसी शिकायतें बढ़ जाती हैं।
डॉक्टर ने राय दी कि 'ऐसे समय में फेफड़ों की देखभाल प्राकृतिक तरीकों से करना अत्यंत आवश्यक है। नियमित भाप लेना श्वसन मार्ग को साफ रखने में मदद करता है, जबकि पर्याप्त पानी पीने से बलगम पतला होकर आसानी से बाहर निकलता है। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आहार- जैसे आंवला, अमरूद, संतरा और हरी सब्जियां- फेफड़ों को प्रदूषण से होने वाले ऑक्सीडेटिव नुकसान से बचाते हैं। घर के भीतर स्वच्छ वायु बनाए रखने के लिए एयर प्यूरीफायर या ऐसे पौधों का प्रयोग लाभकारी है जो हवा को शुद्ध करते हैं, जैसे एरेका पाम और स्नेक प्लांट।
सुबह के शुरुआती घंटों में व्यायाम करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक होता है। बाहर निकलते समय N95 मास्क का उपयोग, गहरी सांस लेने के अभ्यास, और पर्याप्त विश्राम से फेफड़ों की क्षमता को बनाए रखने में सहायता मिलती है। वर्तमान प्रदूषण संकट के बीच व्यक्तिगत सावधानी और सामूहिक प्रयास ही फेफड़ों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने का एकमात्र उपाय हैं।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।