वायु प्रदूषण से दिल्ली वासियों में बढ़ी सांस से जुड़ी समस्याएं, दिवाली के बाद 10 प्रतिशत अधिक मरीज पहुंचे इलाज के लिए अस्पताल

दिल्ली के लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल में दिवाली के बाद बढ़े प्रदूषण के कारण सांस की समस्या से पीड़ित मरीजों की संख्या में 8 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गयी है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : November 15, 2021 10:28 AM IST

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण का असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता दिखायी दे रहा है।  दिल्ली वासियों में बीते कुछ दिनों से सांस की तकलीफों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। दिल्ली के लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल में दिवाली के बाद बढ़े प्रदूषण के कारण सांस की समस्या से पीड़ित मरीजों की संख्या में 8 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गयी है। समाचार एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल से जुड़े  डॉ. सुरेश कुमार ने जानकारी दी कि उनके अस्पताल में प्रति दिन  10-12 मरीज ऐसे आते हैं जिन्हें सांस लेने से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं।

बच्चों और बुजुर्गों को हो रही हैं समस्याएं

गौरतलब है कि दिल्ली में दिवाली के बाद वायु प्रदूषण (Air pollution in Delhi) एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। डॉ. सुरेश ने कहा कि, प्रदूषित हवा के सम्पर्क में आने से  फेफड़ों की कार्य करने की क्षमता कमजोर हो जाती है।  अधिक उम्र के लोगों और बच्चों में ये समस्याएं सबसे अधिक देखी जा रही हैं। बुजुर्ग और बच्चे लम्बे समय तक हाई पीएम 2.5 के स्तर के वायु प्रदूषण के सम्पर्क में  रहने के कारण फेफड़ों से जुड़ी तकलीफें महसूस कर रहे हैं।

बता दें कि, दिल्ली में हवा की गुणवत्ता (Air quality in Delhi) में रविवार को थोड़ा-सा सुधार देखा गया जो कि, शनिवार के 'गंभीर' से 'बेहद खराब श्रेणी' में पहुंच गयी। वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के पूवार्नुमान के मुताबिक, शहर में मंगलवार तक एक्यूआई कम से कम  'बहुत खराब' श्रेणी में बनी रहेगाी। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए डॉ. कुमार ने कहा कि उनके पास 120 रोगियों की क्षमता है, लेकिन दिवाली के बाद प्रदूषण से संबंधित बीमारियों के प्रकोप के कारण, उन्हें अस्पताल में हर दिन लगभग 140 रोगी मिल रहे हैं।

लंग इंफेक्शन और अस्थमा के मामलों में बढ़ोतरी

उन्होंने कहा कि इमरजेंसी और ओपीडी वार्ड्स (OPD Wards) में कुल 140 मरीज आ रहे हैं, जिनमें सभी तरह की समस्याएं हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर मरीज सांस और ऑक्सीजन के स्तर में कमी से पीड़ित हैं। इसमें बच्चों में अस्थमा के मामलों की बढ़ती संख्या भी शामिल है।उन्होंने कहा कि इस समय पीएम 2.5 कणों के उच्च स्तर से फेफड़ों में संक्रमण, आंखों में जलन और सांस लेने से जुड़ी समस्या हो सकती है।

इन समस्याओं से जुड़े निवारक उपायों के बारे में बात करते हुए डॉ.कुमार ने कहा कि प्रदूषण के ऐसे बढ़ते स्तर से अपनी रक्षा करने के लिए केवल दो बातों का ध्यान रखना है -

  • मास्क ज़रूर पहनें और
  • घर से बाहर निकलने से जितना हो सके बचें

(आईएएनएस)

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