इस वजह से कोविड के बजाए स्वाइन फ्लू के बढ़ रहे मामले! 99 फीसदी रोगियों ने की है ये गलती

एक अंग्रेजी वेबसाइट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड वैक्सीन काम कर रही हैं इसलिए H1N1 और दूसरे इंफ्लूएंजा वायरस कोरोनावायरस की जगह ले रहे हैं।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 1, 2022 7:16 PM IST

कोविड वैक्सीन लगवाकर भले ही आपने कोरोनावायरस से सुरक्षा हासिल कर ली हो लेकिन H1N1 (स्वाइन फ्लू) समेत इंफ्लूएंजा के खिलाफ अभी भी बहुत से लोग कमजोर हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि मौजूदा वक्त में आईसीयू में भर्ती 99 से 100 फीसदी मरीजों ने साल में एक बार लगाए जाने वाले फ्लू शॉट्स तक नहीं लिए हैं। ए और बी इंफ्लूएंजा वायरस के खिलाफ हमारी कमजोर इम्यूनिटी ही स्वाइन फ्लू का कारण बनती है। बुजुर्गों में कोरोनावायरस, न्यूमोकॉकस और इंफ्लूएंजा वायरस से भी निमोनिया हो सकता है।

बुजुर्गों में स्वाइन फ्लू ज्यादा

एक अंग्रेजी वेबसाइट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, नोबल हॉस्पिटल के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित द्रविड का कहना है कि ज्यादातर स्वाइन फ्लू के मामले फिलहाल बुजुर्गों में देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्योंकि कोविड वैक्सीन काम कर रही हैं इसलिए H1N1 और दूसरे इंफ्लूएंजा वायरस कोरोनावायरस की जगह ले रहे हैं। इससे ये साफ होता है कि हम सितंबर तक इंफ्लूएंजा सीजन में पूर्ण सुरक्षा प्राप्त नहीं कर पाएंगे।

नहीं ली फ्लू वैक्सीन

डॉ. अमित का कहना है कि बुजुर्गों के अलावा, कई गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्यून सिस्टम के रोगी भी स्वाइन फ्लू के कारण अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्वाइन फ्लू से पीड़ित ज्यादातर मरीजों ने चार महीने में लगवाई जाने वाली फ्लू वैक्सीन भी नहीं ली है। ये वैक्सीन H1N1 और इंफ्लूएंजा ए व बी वायरस से सुरक्षा प्रदान करती है।

6 महीने से बुजुर्गों के लिए वैक्सीन

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, Quadrivalent Influenza Vaccine (QIV) आगामी सीजन में इंफ्लूएंजा वायरस को रोकने के लिए सालाना लोगों को लगाई जाती है। ये वैक्सीन छह महीने के बच्चे से लेकर बुजुर्गों को भी लगाई जाती है।

इन्हें ज्यादा खतरा

जिन लोगों को ये वैक्सीन सबसे ज्यादा लगाने की सलाह दी जाती है उनकी उम्र 65 साल से ऊपर होती है। इसके अलावा जिन्हें डायबिटीज, हार्ट डिजीज, लंग डिजीज, फेफड़ों की बीमारी, कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग और गर्भवती महिलाओं को इस वैक्सीन की सलाह दी जाती है ताकि उन्हें गंभीर रूप से निमोनिया, स्वाइन फ्लू का खतरा कम रहे।

5 में से 3 को वेंटिलेटर की जरूरत

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कुछ अस्पतालों में स्वाइन फ्लूके गंभीर मामलों की संख्या 5 में से 3 मामलों में देखने को मिल रही है। जिन लोगों को एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम है उन्हें गंभीर रूप से वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है। इस तरह के मरीजों में से ज्यादातर ने इंफ्लूएंजा वैक्सीन नहीं ली है।

स्वाइन फ्लू का खतरा ज्यादा

सहैदरी हॉस्पिटल के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. महेशकुमार लखे का कहना है कि निमोनिया या फिर श्वसन तंत्र की शिकायत वाले 10 में 5 से 6 रोगी स्वाइन फ्लू का शिकार हो रहे हैं और दो से तीन रोगी इंफ्लूएंजा ए व बी के शिकार। इसलिए 90 फीसदी रोगी में इंफ्लूएंजा देखने को मिल रहा है।

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