Doctor's Day 2020 : गरीबों के लिए भगवान से कम नहीं हैं ये डॉक्टर्स, फ्री में इलाज के साथ-साथ समाज में ला रहे हैं बदलाव

भारत के मशहूर चिकित्सक डॉ. बिधान चन्द्र रॉय को श्रद्धांजलि देने के लिए 1 जुलाई को 'डॉक्टर्स डे' (Doctor's Day 2020) मनाया जाता है। 'डॉक्टर्स डे 2020' के मौके पर चलिए जानते हैं, पांच ऐसे भारतीय डॉक्टर्स के बारे में जो धरती पर गरीबों के लिए भगवान से कम नहीं हैं-

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Written By: Kishori Mishra | Updated : June 27, 2020 10:35 AM IST

Doctor's Day 2020 : 1 जुलाई को भारत में 'डॉक्टर्स डे' सेलिब्रेट किया जाता है। भारत के मशहूर चिकित्सक डॉ. बिधान चन्द्र रॉय (Dr. Bidhan Chandra Roy) को श्रद्धांजलि देने के लिए 'डॉक्टर्स डे 2020' (Doctor's Day 2020) मनाया जाता है। हमारे समाज में डॉक्टर्स को भगवान का दर्जा दिया गया है। गंभीर परिस्थियों में डॉक्टर्स लोगों की जान बचाकर उनके भगवान बन जाते हैं। कुछ ऐसे ही डॉक्टर्स हमारे आसपास मौजूद हैं, जो ना सिर्फ लोगों का मुफ्त में इलाज करते हैं, उनकी जान बचाने के लिए समर्पित होकर उनकी सेवा करते हैं, बल्कि समाज में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ ही लगातार परिवर्तन लाने की कोशिश भी कर रहे हैं। 'डॉक्टर्स डे' (Doctor's Day 2020) के मौके पर चलिए जानते हैं, भारत के कुछ ऐसे डॉक्टर्स के बारे में जो धरती पर गरीबों के लिए हैं भगवान-

डॉ. योगी ऐरन

  • डॉ. योगी ऐरन उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के निवासी हैं। इनकी उम्र करीब 80 वर्ष है। इन्होंने अपना पूरा जीवन ऐसे लोगों को समर्पित कर दिया, जो जंगली जानवर के शिकार बनें या फिर किसी कारणवश आग से झुलस गए हैं।
  • इन परिस्थितियों से जूझ रहे लोगों को डॉ. योगी बचाने की कोशिश करते हैं। हर साल करीब 500 से अधिक लोगों का यह मुफ्त में सर्जरी करते हैं। इस अभियान में उनके साथ एक असिस्टेंट भी है, जो करीब 25 सालों से उनके साथ काम कर रहा है। इतना ही नहीं डॉ. ऐरन का बेटा भी उनकी मदद करता है।
  • डॉ. योगी क्लीनिक चलाने के साथ-साथ गांव-गांव जाकर 15-15 दिनों का कैंप लगाते हैं। इस कैंप में वे करीब 15 डॉक्टर्स की टीम को शामिल करते हैं। इस टीम में अमेरिका के डॉक्टर्स को भी शामिल किया जाता है, जो फ्री में मरीजों का इलाज करते हैं।
  • डॉक्टर कैंप के लिए ऐसे गांव को चुनते हैं, जहां पर किसी तरह की कोई सुविधा नहीं होती है। कैंप के दौरान डॉक्टर योगी डॉक्टर्स के साथ मिलकर रोजाना 10 मरीजों की सर्जरी करते हैं। इसके साथ ही डॉ. योगी ने साइंस पार्क का भी निर्माण किया है।
  • इनके सेवाभाव को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2020 में इन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा है।

डॉ. अभिजीत सोनवाणे

  • डॉ. अभिजीत सोनवाणे ने 5 साल पहले इस्तीफा देकर सोहम ट्रस्ट की शुरुआत की। इनका लक्ष्य है सड़क पर मौजूद गरीबों का फ्री में इलाज करना।
  • अभिजीत का मानना है कि सड़क किनारे रहने वाले लोगों और भीख मांगने वाले लोगों की मदद करना उनका कोई अभियान नहीं है, बल्कि यह उनकी जिम्मेदारी है, जिसे वे निष्ठाभाव के साथ निभाना चाहते हैं।
  • एक न्यूज वेबसाइट को उन्होंने बताया कि उनकी शुरुआत पहले लोगों के इलाज से हुई, लेकिन उन्होंने इन लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की कोशिश की। उन्होंने अपने इस पहल का नाम  'बैगर टू आंत्रप्रेन्योर' रखा। उन्होंने इस पहल के तहत भिखारियों को पैसे कमाकर सम्मान से साथ जीना सिखाया गया।
  • डॉ. अभिजीत ने कई ऐसे भिखारियों को नाई की दुकान खोलने, दीया बनाने,  मंदिर के बाहर फूल बेचने जैसे काम को शुरू करने में मदद की। इस अनोखे पहल का नतीजा यह है कि आज 37 से भी अधिक भिखारी लोगों से पैसे मांगने के बदले खुद पैसा कमा रहें हैं।

  डॉ. मनोज दुरईराज

  • पेशे से कार्डियक सर्जन डॉ. मनोज दुरईराज पुणे में एक क्लीनिक चलाते हैं। क्लीनिक के साथ-साथ डॉ. मनोज दुरईराज मेरियन कार्डियक सेंटर और रिसर्च फाउंडेशन चला रहे हैं।
  • इस फाउंडेशन की शुरुआत उनके पिता डॉ. मैनुअल दुरईराज ने की थी। डॉ. मनोज के पिता भी कार्डियोलॉजिस्ट थे। इनके पिता ने 2 दशक तक भारतीय आर्मी और तीन पूर्व राष्ट्रपतियों की देखभाल की। इसके बाद  डॉ. मनोज दुरईराज भी 1991 में इस फाउंडेशन से जुड़े और 2005 में इन्होंने दिल्ली के एम्स से अपनी पढ़ाई पूरी की और पिता के इस विरासत को आगे बढ़ाया।
  • इस फाउंडेशन के तहत डॉ. मनोज अब तक 350 से ज्यादा लोगों का फ्री में हार्ट सर्जरी कर चुके हैं। इसमें अधिकतर छोटे बच्चे शामिल हैं, जिन्हें जन्मजात दिल की बीमारी थी।
  • मनोज ऐसे ऐसे लोगों की मदद करते हैं, जिनके पास इलाज के लिए पैसा नहीं होता है। ये लोग काफी दूरदराज से आते हैं। मनोज को इन लोगों की बातों से काफी प्रेरणा मिलती है।
  • यह फाउंडेशन सिर्फ फ्री में सर्जरी ही नहीं, बल्कि ऑपरेशन के बाद फ्री में दवाइयां और देखरेख भी उपलब्ध करता है।

डॉ. मनोज कुमार

  • डॉ. मनोज कुमार ने करीब 15 सालों तक ब्रिटन में मनोचिकित्सक के रूप में काम किया। इसके बाद यह केरल लौटे और ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे मानसिक रोगियों का मुफ्त में इलाज करना अपना लक्ष्य बनाया।
  • केरलवासी डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि सरकार मानसिक रोगियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराती है। इसलिए मैं खुद अपने राज्य के लोगों की मदद कर रहा हूं।
  • इन्होंने 2008 में केरल के कोझिकोड में मेंटल हेल्थ एक्शन ट्रस्ट की स्थापना की। इस पहल में उनके साथ कई लोगों ने अपना हाथ आगे बढ़ाया। वर्तमान में इस ट्रस्ट के साथ करीब 1 हजार लोग जुड़े हैं। इनमे रिटायर्ड प्रोफेशनल,  होममेकर और ऐसे लोग शामिल हैं जो दूसरों की मदद करना चाहते हैं।
  • केरल के मलप्पुरम, कोझिकोड,  वायनाड, अलेप्पी,  त्रिशूर समेत केरल में इस ट्रस्ट के 25 सेंटर्स हैं। इसके हर केंद्र की स्थापना गांव में ही की गई है।

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