
... Read More
Written By: Dr Aniruddha Malpani | Updated : May 2, 2014 3:15 PM IST
(राहुल कुमार द्वारा अनुदित)
ज़्यादातर लोगों के लिए डॉक्टर के पास जाना एक जटिल प्रक्रिया सा होता है। रोगियों की भीड़ से भरे प्रतीक्षा कक्ष में कभ न ख़त्म होने वाले इंतज़ार से शुरू होती यह प्रक्रिया आपकी बीमारी की हालत को और बुरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ती। और इंतज़ार ख़त्म होने के बाद बस डॉक्टर के कुछ मिनटों से ही तसल्ली करनी पड़ती है। क्यों, है न? ज़्यादातर मामलों का सच यही है,पर डॉक्टर के उन कुछ मिनटों का भरपूर फायदा कैसे उठाया जा सकता है?इसी मसले पर आपकी मदद के लिए पेश है डॉ। अनिरुद्ध मालपाणी की आगामी किताब ‘How to get thebest medical care’ के इस विषय से सम्बंधित मुख्य अंश। किसी शादी की तरह ही डॉक्टर और मरीज़ का रिश्ता भी भरोसे और आपसी बातचीत पर ही टिका होता है जो वक्त के साथ बनता है और इस रिश्ते के लिए थोड़ा समय देना और बातचीत को ठीक से आगे बढ़ाना इसकी बेहतरी के लिए बेहद ज़रूरी है। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण नुस्खे बताए गए हैं जिनकी मदद से आप अपने डॉक्टर को अपनी बीमारी ठीक तरह से समझाने में कारगर होंगे। उपाय #1: डॉक्टर के स्टाफों से दोस्ती बनाएंआपके मेडिकल केयर में डॉक्टर के स्टाफों की भूमिका अहम होती है, और आपको क्लिनिक की कार्य-प्रणाली को ठीक से समझने की ज़रुरत होगी। स्टाफ मेंबर (जो रिसेप्शनिस्ट, नर्स या कोइ असिस्टेंट हो) के साथ आपका अच्छा सम्बन्ध बहुत सहायक साबित हो सकता है। अच्छी चिकित्सा का मूल मंत्र है कि यदि आप स्टाफ के साथ ठीक से ट्रीट करेंगे तो आपकी ट्रीटमेंट भी ठीक से होगी! और यह तब आपके लिए बेहद मददगार साबित हो सकता है जब आपको डॉक्टर से प्रायोरिटी बेसिस पर बात करनी हो। आप चाहें तो उन्हें बदले में कोइ छोटा सा “थैंक-यू” गिफ्ट भी दे सकते हैं ताकि वे आप पर विशेष ध्यान दे सकें। स्टाफ के साथ अगर आपके सम्बन्ध अच्छे हुए तो आपको पता चल सकता है कि कब डॉक्टर का शेड्यूल बहुत व्यस्त है और कब उनके पास खाली समय है। स्टाफ के साथ अच्छे सम्बन्ध बनाना इस लिहाज़ से भी मददगार हो सकता है कि इमरजेंसी की स्थिति या किसी अन्य स्थिति में कहाँ कॉल करना है या किस डेस्क पर जाना है, इन सब बातों की जानकारी आपको आसानी से मिल जाएगी। उपाय #2: तैयारी के साथ जाएंडॉक्टर के पास जाने से पहले अच्छी तरह होमवर्क कर लें! डॉक्टर के दिए समय का बिलकुल सही इस्तेमाल करने के लिए आपको पूरी तैयारी करनी होगी। ऐसा करना आपके लिए बहुत सही साबित होगा! पूरी सूची तैयार करें कि आपकी समस्याएँ क्या-क्या हैं, और ऐसा करने में थोड़ा समय लें। सोच-समझकर अच्छी तरह अपनी सारी चिंताएं नोट-डाउन कर लें। ऐसा करके आप डॉक्टर को बिलकुल सटीक उपचार देने में मदद करेंगे जो आपके लिए ही फायदेमंद रहेगा। कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि डॉक्टर के सामने हम अपनी कई समस्याएँ रखना ही भूल जाते हैं, साथ ही डॉक्टर के सलाहों को भी आधा ही याद रख पाते हैं। तो बेहतर यह होगा कि हम सब कुछ लिखकर रखें। इससे आपको एक ही बात बार-बार पूछने की ज़रुरत भी नहीं पड़ेगी। उपाय #3: अपने डॉक्टर को सब कुछ बताएं, झूठ न बोलेंबीमारी से जुड़े अपने सारे सिम्पटम्स डॉक्टर को बताना याद रखें। उन्हें कालानुक्रम में सूचीबद्ध करें, और बीमारी का पहला लक्षण आपने जब से महसूस किया था, तब से शुरू करें। उन सारे कारकों को रिकॉर्ड करना ज़रूरी है जो बीमारी से जुड़े आपके लक्षणों को सुधारता या बिगाड़ता है, क्योंकि डॉक्टर को इनसे महत्वपूर्ण सुराग मिलते हैं। साथ ही, अपने डॉक्टर को उन नुस्खों या दवाइयों के बारे में भी बताएं जो आपने इनसे बचने के लिए इस्तेमाल की है, और यह भी कि क्या उनसे आपको कोइ राहत मिली। उपाय #4: अपने इलाज के बारे में सब कुछ पूछेंअपने डॉक्टर से मिलने के बाद, ज़ाहिर हैं, आप यह जानना चाहेंगे कि अकहिर आप किस मर्ज़ के शिकार हैं। तो यह पूछने में हिचकें नहीं कि आपकी समस्या क्या है। कई डॉक्टर मरीजों को उनकी दिक्कतों का ठीक-ठीक नाम नहीं बताते, तो अगर आप ख़ास तौर पर यह सवाल नहीं पूछेंगे तो आपको सही जवाब भी नहीं मिलेगा। उपाय #5: अगर आप उनसे सहमत न हों, तो स्पष्ट रूप से अपनी बात रखेंअगर आप डॉक्टर के बताए उपचार से सहमत नहीं हैं, तो उन्हें यह साफ़-साफ़ बताएं, क्योंकि ज़ाहिर है, यदि आप सहमत नहीं हैं तो उनके सलाहों और उपचार को अपनाएंगे भी नहीं। अक्सर आपके डॉक्टर यह भी कह सकते हैं कि अभी उन्होंने उपचार का तरीका तय नहीं किया है। ऐसे जवाब का यह मतलब कतई नहीं है कि वे अच्छे डॉक्टर नहीं हैं; इसका सीधा मतलब यह है कि आपकी समस्या थोड़ी जटिल है और उन्हें इसका आकलन करने के लिए और परीक्षणों की ज़रुरत है। इसका यह अर्थ भी हो सकता है कि उपचार के लिए थोड़ा और इंतज़ार करने की ज़रुरत है। या यह भी कि वे शायद आपको किसी और डॉक्टर से रायशुमारी के लिए भेजना चाहते हों। याद रखें, कि डॉक्टर के पास हमेशा आपके सारे सवालों के जवाब हों, यह ज़रूरी नहीं है। आपको यह मालूम होना चाहिए कि उपचार एक प्रक्रिया है और इसके लिए सही निष्कर्ष तक पहुँचना बहुत ज़रूरी होता है इसलिए समय लग सकता है। उपाय #6: अपने डॉक्टर से आपके उपचार की पूरी प्रक्रिया बताने को कहें और यह भी कि वह आपको और आपके परिवार को किस तरह प्रभावित कर सकता हैआप निम्न प्रश्न पूछ सकते हैं:मेरा उपचार क्या है? पूरी प्रक्रिया को मेडिकल साइंस में क्या कहते हैं – डॉक्टर को आम भाषा में समझाने को कहें!मेरी बीमारी का कारण क्या है (आगे क्या-क्या होने की संभावना है)?मेरे दैनिक जीवन में किस तरह के बदलावों की गुंजाइश बनेगी?क्या यह भी मुमकिन है कि मेरे परिवार में भी किसी को यह बीमारी हो सकती है?क्या मुझे घर पर किसी अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता होगी? अगर हाँ, तो किस तरह की सहायता?उपाय #7: संकोच न करें; छोटा से छोटा डिटेल भी आपकी उलझनों को दूर कर सकता हैआपका डॉक्टर अन्तर्यामी नहीं है और इसलिए आपको उन्हें वह सब कुछ बताना चाहिए जो आपके मन में चल रहा हो, इससे आपको सटीक उपचार और बेहतर उपचार योजना मिलेगी। जहां तक आपके डॉक्टर का सवाल है, उनसे किसी भी संवेदनशील विषय या यौन समस्याओं के बारे में पूछने से संकोच न करें। डॉक्टर के लिए ये सवाल सामान्य होते हैं और इसलिए इन उलझनों को अपने सर पर मत लें कि वे आपके बारे में क्या राय बनाएंगे। वे आप पर नैतिक राय बनाने के लिए नहीं बल्कि आपका इलाज करने के लिए बने हैं। उपाय #8: अपनी स्थिति से सम्बद्ध पूरी जानकारी लेंचूंकि समस्या आपकी है, बीमारी से आप जूझ रहे हैं, मानसिक तनाव से आप ग्रस्त हैं, इसलिए खुद से जुड़े सारे सवालों को उठाना जायज़ है और आपको ये सवाल पूछने और इनका जवाब जानने का हक़ है। अगर आप डॉक्टर की बताई बातों को नहीं समझ पाते तो उनसे आम भाषा में दोहराने को कहें। उनसे आपकी स्थिति से जुड़े चित्र, लिखित सामग्री आदि दिखाने को कहें जिसे आप बाद में सुविधानुसार पढ़ और समझ सकें। आप निम्न प्रश्न कर सकते हैं:कृपया इस बारे में और बताएं। सरल भाषा में इसका क्या मतलब है?क्या आप फिर से बताएंगे?क्या आप इसे लिखकर बताएंगे?इस विषय से सम्बंधित और जानकारी कहाँ से मिलेगी?थोड़ा आराम से बताइए प्लीज़। इस बारे में और जानने के लिए मैं आपको दोबारा कब कॉल कर सकती हूँ?उपाय #9: नियत शेड्यूल फॉलो करें डॉक्टर के साथ हो रहे परामर्श सत्र के अंत में अगली मुलाक़ात का समय तय करने की कोशिश करें। यदि अगला सत्र फोन पर मैनेज किया जा सकता है, तो वैसा ही करने की कोशिश करें। ऐसा करके आप वक्त और पैसा दोनों बचा सकते हैं। उपाय #10: किसी करीबी को साथ रखेंपरामर्श के लिए जाते हुए किसी दोस्त या संबंधी को अपने साथ रखने की कोशिश करें, क्योंकि उनकी मौजूदगी आपके काम आ सकती है। उनके होने से आपका तनाव कम होगा और आपको प्रासंगिक प्रश्न पूछने का साहस मिलेगा। और कुछ भूली-भटकी चीज़ें याद दिलाने में वो कारगर होंगे। उपाय #11: अपने डॉक्टर के साथ सम्मान से पेश आएंअगर किसी उपचार को लेकर आपकी और आपके डॉक्टर की राय में भिन्नता हो, तो? याद रखिए किसी भी बात को रखने के दो तरीके होते हैं – सही और ग़लत। यह बस आपसी सम्मान का मामला है। आपको किसी भी सूरत में यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि डॉक्टर आपका बुरा चाहेंगे, इसलिए कोई पूर्वाग्रह न पालें! सम्मान करें और उनसे भी सम्मान की अपेक्षा रखें!उपाय #12: वैसे डॉक्टर के पास जाने से बचें जहाँ आपको लम्बे वक्त तक इंतज़ार करना पड़ता हो, अपने समय का सही प्रबंधन करने वाले डॉक्टर के पास जाएंमरीजों की सबसे बड़ी शिकायत यही होती है कि उन्हें डॉक्टर से मिलने के लिए बहुत लंबा इंतज़ार करना पड़ता है! कई मरीजों को यह भी लगता है कि जिस डॉक्टर से मिलने के लिए मरीजों की कतार सबसे लम्बी होती है वे सबसे अच्छे डॉक्टर होते हैं। यह बहुत बड़ा मिथक है! चाहे डॉक्टर पर कितना भी प्रेशर हो वह अपने अपॉइंटमेंट को अच्छी तरह मैनेज करने में सक्षम होना चाहिए, ताकि आपको किसी भी सूरत में एक घंटे से ज़्यादा इंतज़ार न करना पड़े। कभी-कभार का इंतज़ार ठीक है पर हमेशा ऐसी ही सूरत नहीं बनी होनी चाहिए। उपाय#13:अपनी मूल टेस्ट रिपोर्ट वापस लेना कभी न भूलेंसुनिश्चित करें कि आप अपने तमाम मेडिकल रिकॉर्ड और परीक्षणों की फोटोकॉपी साथ लेकर जा रहे हैं। ज़रुरत हो तो आप डॉक्टर को ये कॉपी दे सकते हैं, पर मूल कॉपी हमेशा अपने साथ रखें – वह आपकी संपत्ति है! यह भी सुनिश्चित करें कि आप मेडिकल रिकॉर्ड में मौजूद सारे कंटेंट को अच्छी तरह समझते हैं। उपाय#14:कुछ ऐसा न करें जिससे डॉक्टर या उनके स्टाफ को चिढ़ हो, सलीके से पेश आएंकई बार मरीज़ों का स्वभाव बेहद चिड़चिड़ा होता है। जो चीज़ आपके लिए बहद मामूली हो सकती है वही किसी और को चिढाने के लिए पर्याप्त। तो अगर आप अच्छी ट्रीटमेंट चाहते हैं तो बीमारी के दौरान भी अपने स्वभाव पर नज़र रखें। डॉक्टर को वे मरीज़ नापसंद हैं जो:चाहते हैं कि उन्हें सबसे पहले देखा जाए। हमेशा देर से आते हैं। बिना मतलब भी समय बर्बाद करते हैं। बार-बार एक ही सवाल दोहराते हैं। मानते हैं कि उन्हें सब कुछ पता है। जो डॉक्टर की निजता या उनके वक्त को अहमियत नहीं देते। बता एगे निर्देशों का अनुसरण नहीं करते। बार-बार डॉक्टर बदलते हैं। समय पर फीस का भुगतान नहीं करते। उपाय #15: अच्छे मरीज़ बनें, इन दिशानिर्देशों का अनुसरण करें:अच्छा मरीज़ वह होगा जो:मुलाक़ात के लिए तय किए गए समय पर आता हो या न आ सके तो कॉल करके उस दिन के लिए मुलाक़ात रद्द करवाता हो। यह बताने की कोशिश करता है कि असल में उसकी समस्या क्या है, यानी वो अपनी दिक्कतों को ठीक-ठीक स्पष्टता से बता सकता हो। सवालों का ईमानदारी से जवाब देता हो। अपनी समस्या से जुड़ी हर जानकारी स्वतः देने को तैयार रहता है। डॉक्टर को यह बताता हो कि वह उनके बताए निर्देशों पर अमल नहीं कर पाएगा और ऐसा क्यों है। बताई गयी दवाइयों को निर्धारित समय पर लेता हो। अपनी असंतुष्टि को शालीनता से सामने रखता हो।