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Written By: Jitendra Gupta | Published : May 18, 2022 5:38 PM IST
डॉक्टरों ने नई पीढ़ी का फ्लो डायवर्टर स्टेंट लगाकर बचाई 48 साल की महिला की जान, ब्रेन हेमरेज का खतरा टला
मेडिकल इतिहास में रोजाना नए-नए चमत्कार होते हैं, इसका अंदाजा डॉक्टरों द्वारा की जाने वाली नई तकनीक की मदद से इलाज है। हाल ही में डॉक्टरों ने ब्रेन एन्यरिज्म से पीड़ित 48 साल की महिला की जिंदगी बचाई। एन्यरिज्म के इलाज के लिए उपलब्ध फ्लो डायवर्टर सबसे प्रभावी और सबसे नई टेक्नोलॉजी मानी जाती है और ब्रेन की बड़ी रक्तनलिकाओं में सिर्फ इसे ही लगाया जा सकता है। डॉक्टर्स सबसे छोटे डायवर्टर को सफलतापूर्वक मस्तिष्क में प्रत्यारोपित कर मरीज की जान बचा ली।
आर्टमिस हॉस्पिटल की न्यूरोइंटरवेंशन टीम का कहना है कि कुछ साल पहले एन्यरिज्म क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण मरीज को ब्रेन हेमरेज हो गया था जिसके लिए आपात स्थिति में उसका कॉयलिंग से इलाज किया गया। इससे वह पूरी तरह रिकवर भी हो गई। लेकिन रक्तनलिकाएं बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण एन्यूरिज्म का छोटा हिस्सा छूट गया और एंजियोग्राफी से पता चला कि यह फिर से बढ़ने लगा है। चूंकि मरीज को फिर से हेमरेज होने का खतरा था और दोबारा बढ़े हुए एन्यूरिज्म का इलाज कॉयलिंग से संभव नहीं था इसलिए डॉक्टरों की टीम ने फ्लो डायवर्टर का इस्तेमाल करने का फैसला किया।
आर्टमिस हॉस्पिटल के एग्रिम इंस्टीट्यूट फॉर न्यूरोसाइंसेज में न्यूरोइंटरवेंशन के निदेशक डॉ. विपुल गुप्ता ने कहा, 'देश में पहली बार किसी मरीज पर पाइपलाइन वेंटेज फ्लो डायवर्टर इस्तेमाल करने वाली टीम बनने पर हमें गर्व है। एन्यरिज्म चूंकि छोटी रक्तनलिका पर थी, इसलिए हमने आधुनिक पाइपलाइन वेंटेज डिवाइस का इस्तेमाल किया। यह प्रक्रिया सफल रही और मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गया। इस पतले डिवाइस को छोटे—छोटे ट्यूबों के जरिये डाला जाता है इसलिए यह प्रक्रिया सफल और सुरक्षित रही। इस डिवाइस का इस्तेमाल जटिल ब्रेन एन्यरिज्म से पीड़ित कई मरीजों पर किया जा सकता है जिसमें आधुनिक फ्लो डायवर्टर डिवाइस का सफल इस्तेमाल होता है।
खोपड़ी में उभार के कारण मस्तिष्क की रक्तनलिकाएं कमजोर होने से सेरेब्रल एन्यरिज्म सूजने लगते हैं। इससे ये फट भी सकते हैं और मस्तिष्क में बड़ी मात्रा में रक्तस्राव भी हो सकता है जिसे सबआर्कनॉयड हेमरेज (एसएएच) कहा जाता है। यदि सही समय पर इसका इलाज नहीं किया गया तो मरीज को फिर से रक्तस्राव होने की संभावना रहती है और इस बीमारी से शायद ही कोई बच पाता है। क्षतिग्रस्त सेरेब्रल एन्यरिज्म लगातार मौत का मुख्य कारण बनता है इसलिए एसएएच को हमेशा आपात स्थिति माना जाता है।
समय पर इसका इलाज होने से मरीज के जीवित रहने की संभावना रहती है। एन्यरिज्म के दोबारा क्षतिग्रस्त होने से पुन: रक्तस्राव को बहुत गंभीर माना जाता है जिसमें शीघ्र इलाज बहुत महत्वपूर्ण होता है। आधुनिक सर्जिकल और इंटरवेंशनल (एंडोवैस्कुलर) तकनीकों की बदौलत एन्यरिज्म के ज्यादातर मामलों का पूरी सुरक्षा के साथ सफल इलाज संभव हो सकता है।
डॉ. गुप्ता ने बताया, 'पहले इस तरह की बीमारी में ओपन सर्जरीही एकमात्र इलाज होता था। लेकिन बड़ी सर्जरी और मस्तिष्क को सामान्य स्थिति में नहीं आने का खतरा हमेशा बना रहता था। इन दिनों ज्यादातर ऐसे मरीजों का एंडोवैस्कुलर कॉयलिंग तकनीक के जरिये न्यूनतम शल्यक्रिया से इलाज किया जाता है।'