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बाइक दुर्घटना में घायल व्यक्ति के लिवर और फेफड़ों को बिना सर्जरी की मदद से डैमेज होने से बचाया

झायनोव्हा शाल्बी अस्पताल में डॉक्टरों ने बिना सर्जरी के ही एक नया करिश्मा कर दिखाया है। 34 वर्षीय एक व्यक्ति के एक्सीडेंट में घायल होने के बाद बिना सर्जरी की मदद से ही उसके लिवर व फेफड़ों को खराब होने से बचाया

बाइक दुर्घटना में घायल व्यक्ति के लिवर और फेफड़ों को बिना सर्जरी की मदद से डैमेज होने से बचाया
Surgeons performing operation in operation theater of hospital

Written by Mukesh Sharma |Published : May 11, 2024 11:13 AM IST

बाइक दुर्घटना में घायल 34 वर्षीय व्यक्ति के लिवर और फेफड़ों को बचाने में मुंबई स्थित झायनोव्हा शाल्बी अस्पताल के डॉक्टरों को सफलता हासिल हुई हैं। खास बात यह है कि मरीज के लिवर और फेफड़ों को किसी सर्जिकल तकनीक से नहीं बल्कि बिना सर्जरी की मदद से ही बचा लिया गया है। झायनोव्हा शाल्बी अस्पताल के जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. हेमंत पटेल ने मरीज का इलाज किया हैं। मरीज को पेट दर्द, सीने में तकलीफ, सांस लेने में कठिनाई, रक्त विषाक्तता और गुर्दे की विफलता के साथ आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया था। लेकिन मरीज पर इलाज करने डॉक्टर ने उसे नई जिंदगी दी हैं।

लिवर और फेफड़े हुए घायल

घाटकोपर निवासी प्रशांत कदम एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। कुछ हफ्ते पहले सुबह करीब 9:30 बजे ऑफिस जाते वक्त उनकी बाइक की दुर्घटना हो गई। इस दुर्घटना में उनका लीवर गंभीर रूप से घायल हो गया। शरीर के अंदर खून का बहाव फेफड़ों तक भी पहुंच गया था। ऐसे में स्थानीय निवासियों ने उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया. यहां प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें झायनोव्हा शाल्बी अस्पताल में शिफ्ट करने की सलाह दी। यहां अस्पताल के जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. हेमंत पटेल ने मरीज पर इलाज शुरू किया। वैद्यकीय जांच के बाद पता चला कि मरीज के लीवर और फेफड़ों में चोट लगी थी। ऐसे में डॉक्टरों ने बिना सर्जरी के मरीज का लीवर बचाया है।

झायनोव्हा शाल्बी अस्पताल में जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉक्टर हेमंत पटेल ने कहा कि, दुर्घटना के बाद जब मरीज को इलाज के लिए लाया गया तो उसका सीटी स्कैन और एमआरआई टेस्ट किया गया। इस वैद्यकीय जांच में, हीमोथोरेक्स और दायां लिवर लोब 50-75% प्रभावित हुआ था। मरीज को नाक की ऑक्सीजन, अंतःशिरा एंटीबायोटिक्स, अंतःशिरा तरल पदार्थ, नेफ्रोप्रोटेक्टिव और हेपटोप्रोटेक्टिव दवाओं के साथ रूढ़िवादी तरीके से प्रबंधित किया गया था। मरीज के स्थिर होने के बाद हीमोथोरेक्स हटा दिया गया। १२ दिनों के उपचार के बाद, मरीज की सेहत में सुधार देखकर उसे डिस्चार्ज दिया गया। मरीज का पेट दर्द बिल्कुल बंद हो गया था। अब यह मरीज पहले की तरह अपने सभी दैनिक कार्य कर रहा है।

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मरीज प्रशांत कदम ने कहा कि, दुर्घटना के बाद मेरा लीवर और फेफड़े गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दुर्घटना में बचने की संभावना कम थी। लेकिन आज मुझे तुरंत इलाज मिलने से नई जिंदगी मिल गई। मेरी प्राण बचाने के लिए में डॉक्टरों का आभारी हूं। अब मैंने फिर से पहले की तरह काम करना शुरू कर दिया है।