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Written By: Editorial Team | Updated : June 29, 2018 8:09 PM IST
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने इस साल डॉक्टर्स डे को 'डॉक्टरों और चिकित्सा संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के खिलाफ हिंसा पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए इस दिन को हिंसा के प्रति शून्य सहनशीलता' के रूप में मनाने की घोषणा की है। आईएमए चिकित्सा समुदाय को सुरक्षित क्षेत्र घोषित करने के लिए 1 से 8 जुलाई तक सुरक्षित ''भाईचारा सप्ताह'' मनाएगा।
डॉक्टरों और क्लिनिकल प्रतिष्ठानों के खिलाफ हिंसा एक ज्वलंत समस्या है और यह चिकित्सा जगत के साथ-साथ चिकित्सा प्रतिष्ठानों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। यह मुद्दा अब बहुत ही गंभीर स्थिति तक पहुंच चुका है और इससे सबसे अधिक प्रभावित केवल मरीज हो रहे हैं।
आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रवि वानखेडकर के अनुसार, "चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने का खर्च पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ा है, जिसके लिए डॉक्टरों को गलत तरीके से जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। हालांकि काम करने के असमान घंटों और तनावपूर्ण वातावरण जैसी कई परेशानियों के बावजूद, डॉक्टर अभी भी अपनी सर्वश्रेष्ठ संभव सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। लेकिन जो लोग वास्तव में सरकारी स्वामित्व वाले अस्पतालों में जाते हैं, उन्हें ज्यादातर समय चिकित्सा समुदाय को लेकर गुमराह किया जाता है।"
उन्होंने कहा कि इस तरह के हिंसक व्यवहारों ने डॉक्टरों के लिए बेहद तनावपूर्ण कामकाजी परिस्थितियों का निर्माण किया है और इससे स्वास्थ्य देखभाल में सेवा और सुरक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसके शिकार मरीज हो रहे हैं।
आईएमए के महासचिव डॉ. आर.एन. टंडन ने कहा, "साक्षरता की कमी, स्वास्थ्य देखभाल के बारे में जानकारी की कमी, बीमारियों, बीमारियों के प्राकृतिक इतिहास, प्रबंधन के नुकसान और फायदों, अनुचित उम्मीदों, निहित हितों के लिए राजनीतिक समर्थन और सरकार के स्वास्थ्य के कुप्रबंधन के खिलाफ क्रोध डॉक्टरों के खिलाफ हो रही बड़े पैमाने पर हिंसा के लिए जिम्मेदार है।
उन्होंने कहा, "आईएमए मौजूदा स्थिति का समाधान करने की मांग करता है। हम सुरक्षित, नैतिक, गुणवत्ता वाले स्वास्थ्य देखभाल के लिए प्रतिबद्ध हैं जो हमारे डॉक्टरों को पेशेवरता प्रदान करते हैं। लेकिन साथ ही, हमारे डॉक्टरों को नैदानिक प्रतिष्ठानों में अस्वीकार्य हिंसा से बचाने और इलाज करने के लिए सुरक्षित, निडर वातावरण प्रदान करना हमारे एजेंडे में सबसे ऊपर है।"
डॉ. टंडन ने कहा कि आईएमए नैदानिक प्रतिष्ठानों के साथ इस मामले को सुलझाने के लिए अपने हाथों में कानून लेने वाले अनौपचारिक तत्वों की बुराई के खिलाफ लोगों की चुप्पी से भी निराश है।
वहीं, डॉ. वानखेडकर ने कहा, "19 राज्यों ने मेडिकेयर एक्ट को हालांकि अपना लिया है, लेकिन अब तक कई हिंसक घटनाओं के बावजूद किसी को अपराधी नहीं ठहराया गया है। इस तरह की हिंसक घटनाएं चिकित्सकों के आत्मविश्वास को घटाती है। हम स्वास्थ्य कर्मियों और चिकित्सा संस्थानों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत और सक्रिय पहल के तौर पर केंद्रीय चिकित्सा कानून बनाए जाने की मांग करते हैं।"
स्रोत: IANS Hindi.
चित्रस्रोत: Shutterstock.