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बेहतर ट्रॉमा केयर से ही दुर्घटना के शिकार लोगों का जीवन बचाया जा सकता है - डीओए

देश में हर दिन 413 लोगों की और हर घंटे 17 लोगों की मौत केवल सड़क दुर्घटनाओं में होती है। सड़क हादसों में हर साल 15 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है।

दिल्ली आर्थोपेडिक एसोसिएशन (डीओए) की ओर से यहां रविवार को आयोजित 'मिडकॉन, 2018' में देश भर से जुटे 200 से अधिक चिकित्सा विशेषज्ञों ने घायलों की चिकित्सा में सुधार के तौर-तरीकों पर चर्चा की, और कहा कि बेहतर और सर्वसुलभ ट्रॉमा केयर से ही जीवन बचाया जा सकता है।

मिडकॉन, 2018 के वैज्ञानिक अध्यक्ष डॉ. राजू वैश्य ने कहा, "हादसों में लगने वाली चोटें, सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली क्षति, गिरने से लगने वाली चोटें एवं फ्रैक्च र आदि के इलाज का खर्च गरीब लोगों की पहुंच से बाहर होता है। खास तौर पर गांवों में गरीब परिवारों के लिए ऐसे हादसे आर्थिक विपदा लेकर आते हैं।

दिल्ली आथोर्पेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रोफेसर रमेश कुमार ने कहा, "हमारे देश में ज्यादातर लोगों के पास स्वास्थ्य बीमा नहीं होने के कारण घायलों का इलाज निजी अस्पतालों में नहीं हो पाता है। घायलों के इलाज के लिए बेहतर सरकारी चिकित्सा सुविधाएं सुलभ हो तथा गरीब लोगों को स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध हो तो हादसों के घायलों का बेहतर और तत्काल इलाज हो सकता है और काफी घायलों की जान बचाई जा सकती है।"

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विशेषज्ञों के अनुसार, "देश में हर साल विभिन्न हादसों में पांच लाख लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं और इनमें से ज्यादातर की उम्र 18 से 30 वर्ष होती है। इन हादसों में 22.8 प्रतिशत सड़क परिवहन से संबंधित होते हैं, जबकि अन्य 77.8 प्रतिशत हादसे उंचाई से गिरने (खास तौर पर कम उम्र के बच्चों में), खेती से संबंधित हादसे, आग्नेयास्त्र एवं अन्य हथियारों से नुकसान पहुंचने, हमले, भारी वस्तुओं के गिरने, आग लगने, डूबने, प्राकृतिक आपदा और आतंकवादी हमलों से संबंधित होते हैं।"

आंकड़ों के अनुसार, देश में हर दो मिनट पर हादसों के कारण एक व्यक्ति की मौत होती है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की एक रपट के अनुसार, देश में हर दिन 413 लोगों की और हर घंटे 17 लोगों की मौत केवल सड़क दुर्घटनाओं में होती है। सड़क हादसों में हर साल 15 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है। सड़क हादसों के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है।

हादसों (ट्रॉमा) को प्रमुख स्वास्थ्य समस्या मानते हुए दिल्ली आर्थोपेडिक एसोसिएशन (डीओए) घायलों की देखभाल एवं चिकित्सा में सुधार के उद्देश्य से सर्वसम्मत दिर्शानिर्देश बनाने के लिए दिन भर के सम्मेलन का आयोजन किया।

'ट्रॉमा केयर में होने वाली जटिलताओं की रोकथाम' विषय वाले सम्मेलन में शरीर के सभी हिस्सों में होने वाले फ्रैक्च र के प्रबंधन पर चर्चा हुई, जिसमें ब्रिटेन के विशेषज्ञों के अलावा देश के सभी हिस्सों तथा दिल्ली के चिकित्सा विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

सम्मेलन के दौरान डीओए के सदस्यों के लिए पोस्टर प्रतियोगिता तथा इस सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले स्नातकोत्तर छात्रों के लिए क्विज आयोजित किया गया।

स्रोत: IANS Hindi.

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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