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Written By: Editorial Team | Published : December 5, 2017 6:37 PM IST
बच्चों की एक खास बात ये होती है कि वे बड़े कौतुहल स्वभाव के होते हैं। हर बात को जानने की इच्छा होती है। पैरेंट्स जवाब तो देते हैं लेकिन पर्दे की आड़ में सब कुछ छिपा कर देते हैं। उनका सबसे आम और जिज्ञासु सवाल ये होता है कि शिशु कहां से आते हैं?ऐसे ही कुछ सवाल होते हैं कि जिनका जवाब देना मुश्किल हो जाता है, जैसे- एचआईवी या एड्स क्या होता है? इसका जवाब देना या उनसे खुलकर बात करना बहुत मुश्किल होता है। वैसे तो आजकल इंटरनेट और गुगल एक ऐसा साधन बन गया है कि कुछ भी सर्च करना असंभव नहीं रह गया है। लेकिन उन्हें अगर गलत जानकारी मिल गई तो क्या होगा? इसलिए आपको इस बारे में जिम्मेदार माता-पिता बनकर उनसे बात करनी पड़ेगी।
माइन्ड वेलनेस फोर्टिस हेल्थकेयर की कंसल्टेंट न्युरोसाइक्रैटिस्ट डॉ. एरा दत्ता का कहना है कि आज का युग अलग है, ये बीस साल पहले जैसा नहीं है। बच्चे किशोरावस्था में कदम रखने के पहले से ही सेक्चुअल जानकारी लेने की उत्सुकता दिल में उफाने लेने लगती है। वे यंग हुए कि नहीं इंटरनेट पर पोनोग्राफी आदि देखने लगते हैं और वह सब देखकर खुद पर भी आजमाने के लिए उत्साहित हो जाते है। परिणाम ये होता है कि कम उम्र में ही प्रेगनेंसी या सेक्चुअल डिज़ीज हो जाने का खतरा बढ़ने लगता है।
इसके पहले कि इस बारे में चर्चा शुरु करें पहले मशहुर सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. राजन भोंसले की एक बात पर ध्यान देते हैं कि बच्चों को सेक्स के बारे में बताने से पहले ये बताना ज़रूरी होता है कि युवावस्था में कदम रखते ही स्त्री और पुरूष का आकर्षण क्या होता है।
डॉ, दत्ता का कहना है कि बच्चों को सेक्स एजुकेशन की जानकारी देना बहुत ज़रूरी होती है। और अकेले में ये सब बताने से अच्छा है ग्रूप में सेक्स के बारे में बेसिक चीजों की जानकारी सबसे पहले देनी चाहिए।
यहां तक कि डॉ. भोंसले का कहना है कि बच्चों को समझाते वक्त उनके उम्र और समझ के हिसाब से शब्दों का व्यवहार करना चाहिए। सबसे पहले उन्हे वाटरबॉर्न और एयरबोर्न डिज़ीज के बारे में जानकारी होनी चाहिए। उसके बाद उन्हें बतानी चाहिए कि कैसे केयरलेस तरीक से सेक्चुअल एक्टिविटी करने से एचआईवी या एड्स होने का खतरा होता है।
डॉ. दत्ता का कहना है कि बच्चों को ये समझाना ज़रूरी होता है कि कैसे असुरक्षित तरीके से सेक्स करने पर ऐसी बीमारी होने का खतरा होता है। साथ ही इस रोग से संक्रमित इंसान बुरा नहीं होता है। वह हमारी तरह ही नॉर्मल होते हैं बस थोड़ी एहतियात बरतने की ज़रूरत होती है। लेकिन इसके पहले ये जरूरी होता है कि इस बारे में आपका क्या नजरिया है। एक सकारात्मक नजरिया या सोच ही बच्चे को सही राह दिखा पायेगा।
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अनुवादक : Mousumi Dutta
चित्र स्रोत : Shutterstock