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Written By: Jitendra Gupta | Published : July 7, 2022 1:16 PM IST
...तो इस वजह से वैक्सीनेटेड और अनवैक्सीनेटेड लोगों को शिकार बना रहा ओमिक्रोन! स्टडी में बताया खतरे का लेवल
कोविड की मौजूदा लहर ने कोविड के ओमिक्रोन वेरिएंट से होने वाले रिइंफेक्शन के बढ़े हुए खतरे को दिखाया है। लेकिन ऐसा क्यों हो रहा है इसके पीछे की वजह अब शोधकर्ताओं ने ढूंढ निकाली है। शोधकर्ताओं ने कोविड के मूल स्ट्रेन और अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा, जीटा और ओमिक्रोन (सब वेरिएंट BA.1) से संक्रमित 120 लोगों में एंटीबॉडी को बेअसर करने की क्षमता का विश्लेषण किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि ओमिक्रोन अपने पहले के वेरिएंट की तुलना में एंटीबॉडी को भेद पाने में सक्षम है, खासकर जो कि दूसरे वेरिएंट से बनी थीं।
जेनेवा यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के सेंटर फॉर इमरजिंग वायरल डिजीज के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन के निष्कर्ष नेचर कम्युनिकेशन में प्रकाशित हुए हैं।
जिन लोगों को वैक्सीन लगी हुई है उनमें एंटीबॉडी के बेअसर होने की क्षमता भी कम पाई गई है। हां, एंटीबॉडी जब नैचुरल इम्यूनिटी से बनती है तो ये शरीर में ज्यादा असरदार होती है। इसलिए ये कहा जा सकता है कि ओमिक्रोन, वैक्सीन लगवाने वाले लोगों में भी इंफेक्शन का कारण बनता है लेकिन लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की नौबत नहीं आती है।
शोधकर्ताओं की टीम ने अतीत में किसी अन्य वेरिएंट से संक्रमित हुए 120 वॉलंटियर्स के ब्लड सैंपल लिए। इनमें से कुछ को वैक्सीन नहीं लगी थी, कुछ को वैक्सीन लगी थी और कुछ पहले से संक्रमित थे। इसके अलावा कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्हें वैक्सीन लगने के बाद भी इंफेक्शन हुआ था।
इस अध्ययन का मुख्य मकसद ये पता लगाना था कि पहली बार इंफेक्शन के दौरान बनने वाली एंटीबॉडी क्या कोविड के दूसरे वेरिएंट को बेअसर करने में सक्षम हैं। अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता बेंजमिन मेयर का कहना है कि ओमिक्रोन ने साबित किया है कि वह शरीर में मौजूद नैचुरल इम्यूनिटी को भेद पाने में सबसे ज्यादा प्रभावी है और वैक्सीन से बनने वाली एंटीबॉडी को कुछ हद तक भेद सकता है।
इसके अलावा वैक्सीनेटेड लोगों में कोविड के पुराने वेरिएंट्स के खिलाफ एंटीबॉडी लेवल 10 गुना ज्यादा पाया गया है, खासकर उन लोगों के मुकाबले जिनकी इंफेक्शन के बाद इम्यूनिटी मजबूत हुई थी। इसके अलावा इन दोनों का मिश्रण, जिसे हाइब्रिड इम्यूनिटी भी कहते हैं एंटीबॉडी लेवल को बहुत ज्यादा बनाने में मदद करती है।
चूंकि ओमिक्रोन शरीर में मौजूद इम्यूनिटी को भेद पाने में सक्षण है और संक्रमण का कारण बन सकता है लेकिन इससे मौत और अस्पताल में भर्ती होने की संभावना वैक्सीन लगने के बाद कम हो जाती है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि कोविड में म्यूटेशन की शक्ति है इसलिए सतर्कता बहुत ज्यादा जरूरी है, खासकर बीए.5 के सामने आने के बाद।