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Written By: akhilesh dwivedi | Published : November 26, 2018 12:17 PM IST
इबोला और मारबर्ग वायरस जैसे वायरस के संक्रमण का खतरा वर्तमान समय में बहुत अधिक बढ़ गया है। इबोला और मारबर्ग के संक्रमण से रक्तस्राव वाला अर्थात हेमरेजिक बुखार हो सकता है। इबोला वायरस के संक्रमण से होने वाली बीमारी में रक्तस्राव बहुत अधिक हो सकता है। वायरस के प्रकोप से अंग काम करना बंद कर देते हैं। इबोला वायरस के संक्रमण से ज्यादातर लोगों की मौत हो जाती है।
ये दोनों ही वायरस अफ्रीका में शुरू हुआ जहां कई दशकों से इस बीमारी के प्रकोप आते रहते हैं। इबोला और मारबर्ग वायरस जानवरों के शरीर में पाये जाते हैं। यह वायरस इंसान में संक्रमित जानवर के सम्पर्क में आने से आता है।
यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में खून, पसीना या शरीर से निकलने वाले अन्य तरल पदार्थ के संपर्क में आने से हो सकती है। दूषित सुई से भी ये वायरस फैलते हैं।
इबोला और मारबर्ग वायरस का इलाज अभी संभव नही है। इसके इलाज के लिए अभी तक कोई दवा नहीं बनायी जा सकी है। वैज्ञानिक इन खतरनाक वायरस से होने वाली बीमारियों के इलाज की दवा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
स्किन में कोई घाव हो या श्लेष्मा झिल्ली फटी हो तो संक्रमित इंसान के शरीर से खून या अन्य किसी प्रकार के तरल पदार्थ के संपर्क में आने से इबोला या मारबर्ग से संक्रमित हो सकते हैं।
इबोला संक्रमण के लक्षणः इबोला या मारबर्ग के वायरस से संक्रमण होने पर असहनीय सरदर्द, जोड़ो और मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी इत्यादि होते हैं। बहुत तेजी से लक्षण गंभीर होने लगते हैं और उल्टी-दस्त, दर्द और रक्तस्राव होने लगता है। जो लोग मौत के कगार पर होते हैं उनके कान, नाक और मलाशय से भी खून निकल सकता है।
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