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Diwali Celebration water sensor diya Side effects: दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों और सजावट के लिए जाना जाता है। दिवाली के खास मौके पर लोग अपने घरों को दीपों, रंग-बिरंगी लाइटों और मोमबत्तियों से सजाते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में पारंपरिक तेल वाले दीयों के साथ-साथ एक नया ट्रेंड काफी लोकप्रिय हुआ है पानी से जलने वाला दिया। बिना तेल और बिना धुएं के चमकने वाले ये दीये देखने में कुछ ज्यादा ही आकर्षक लगते हैं। इन दियों पर आपको सिर्फ पानी की 2 बूंदें डालनी होती है और ये चमक उठते हैं। किसी भी आम आदमी की तरह मैं भी इन दियों को देखकर काफी खुश हुई थी, लेकिन पानी के दिये बच्चों के लिए कितने खतरनाक हो सकते हैं, ये जाना तो खुशी खत्म हो गई।
दरअसल, पिछले दिनों इंस्टाग्राम पर स्क्रॉल करते समय मुझको बच्चों की डॉक्टर माधवी भारद्वार का वीडियो मिला। इस वीडियो में डॉ. माधवी भारद्वाज ने बताया कि दिवाली पर चलाए जाने वाले पानी के दिये बच्चों के लिए कैसे खतरनाक हो सकते हैं। आज इस लेख में हम इसी के बारे में बात करने वाले हैं।
पानी से जलने वाला दिया एक इनोवेशन है जो दिखने में पारंपरिक मिट्टी के दीये जैसा ही होता है लेकिन इसमें तेल और बत्ती की जगह पानी डालकर जलाया जाता है। इन दीयों को बनाने के लिए अक्सर मैग्नीशियम की धातु, नमक और अन्य केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है। यही कारण है कि जैसे ही इन दियों पर पानी डाला जाता है, यह रासायनिक प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है और रोशनी चमकने लगती हैं। डॉ. माधवी बताती हैं कि बिना किसी प्रकार के तेल, घी या बाती के रोशनी देने के कारण इन दियों को ईको-फ्रेंडली बताया जाता है। लेकिन असलियत में इसमें कई छिपे खतरे होते हैं जिनसे आम लोग अनजान रहते हैं।
डॉक्टर की मानें, तो छोटे बच्चे दिवाली में रंग-बिरंगी रोशनी और दीयों की तरफ बहुत जल्दी आकर्षित हो जाते हैं। उन्हें इन आधुनिक दीयों के पीछे की केमिस्ट्री का कोई अंदाजा नहीं होता।
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अगर बच्चा गलती से दिया छू लेता है तो उसमें मौजूद मैग्नीशियम और अन्य धातुएं त्वचा के संपर्क में आकर जलन या गंभीर जलने का कारण बन सकती हैं। यह साधारण गर्म तेल जैसा नहीं होता बल्कि इसमें रासायनिक प्रतिक्रिया से तापमान अत्यधिक गर्म हो जाता है और त्वचा पर जलन का कारण बन सकता है।
कुछ दीयों में हाइड्रोजन जैसी ज्वलनशील गैस बनती है। अगर कम वेंटिलेशन वाले कमरे में कई दीए एक साथ जल रहे हों तो बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
अगर इन दियों में ज्यादा पानी डाल दिया जाए या दिया गलत तरीके से बनाया गया हो तो अचानक स्पार्क या धमाका हो सकता है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें बच्चों के हाथ या चेहरा झुलस गया। डॉक्टर बताती हैं कि इन दियों से निकलने वाली चिंगारी बहुत तेज होती है। जिसका सामना बच्चों के लिए करना काफी मुश्किल हो सकता है।
बच्चे कई बार खेल-खेल में दीये में रखे पानी को पीने की कोशिश कर सकते हैं या उंगली मुंह में डाल सकते हैं। यह केमिकल अगर निगल लिया जाए तो पेट दर्द, उल्टी, सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्या हो सकती है।
दिवाली बच्चों के लिए सबसे प्यारा त्योहार होता है। रंगोली, मिठाइयां और रोशनी उनके चेहरे पर मुस्कान लाती हैं। लेकिन जरा सी चूक उनकी खुशी को खतरे में डाल सकती है। पानी से जलने वाले दीये देखने में आकर्षक और आधुनिक लग सकते हैं, लेकिन इनमें छिपा खतरा अनदेखा नहीं किया जा सकता। खासकर छोटे बच्चों के लिए, इसलिए इस बार दिवाली में सोच समझकर पानी वाले दिए जलाए।