दिव्यांगों के लिए अब 5 फीसदी आरक्षण

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा, "दिव्यांग भाईयों-बहनों के कल्याण के लिए ऐतिहासिक फैसला है। इससे राष्ट्र की प्रगति में उनका भी समान योगदान सुनिश्चित होगा।"

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Written By: Editorial Team | Published : March 22, 2018 1:51 PM IST

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने दिव्यांगों को आरक्षण का अधिक लाभ देने के लिए परा स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए विनियमन में संशोधन को मंजूरी दे दी। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत सीटों को तीन से बढ़ाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा, "प्रधानमंत्री के 'सबका साथ, सबका विकास' के अनुरूप दिव्यांग भाईयों-बहनों के कल्याण के लिए सरकार ने 20 वर्ष के बाद ऐतिहासिक फैसला किया है। इससे राष्ट्र की प्रगति में उनका भी समान योगदान सुनिश्चित होगा।"

नड्डा ने कहा कि अब दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के अंतर्गत अधिसूचित दिव्यांगता के 21 महत्वपूर्ण प्रकारों में आने वाले सभी दिव्यांगजन चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए पंजीकरण करा सकते हैं।

संशोधित प्रावधान के अनुसार दिव्यांगता के 21 प्रकारों में दृष्टिहीनता, कम नजर आना, कुष्ठ रोगी व्यक्ति, बहरा (कम सुनने वाला), स्थूलता विकलांगता, बौनापन, बौद्धिक विकलांगता, मानसिक बीमारी, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार, सेरेब्रल पाल्सी, मस्क्यूलर डिस्ट्रोफी, क्रोनिक न्यूरोलॉजिकल कंडीशंस, विशिष्ट ज्ञान पाने में कमी, मल्टीपल स्केलेरोसिस, बोलने और भाषा की अपंगता, थैलेसीमिया, हीमोफिलिया, सिकल सेल रोग, एकाधिक विकलांगता (बहरा-अंधपन शामिल), ऐसिड हमलों से पीड़ित, पार्किं संस बीमारी को आरक्षण में शामिल किया जाएगा।

उम्मीदवारों के पंजीकरण के लिए केंद्रीय परामर्श को डीजीएचएस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्टवेयर में संशोधित किया गया है। आरक्षित कोटे के तहत चयनित उम्मीदवार को प्रवेश देने से पहले दिव्यांगता का स्तर निर्धारित करने के लिए चिकित्सा जांच कर सीटों का पंजीकरण/आवंटन किया जाएगा।

स्रोत: IANS Hindi.

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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