
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : May 20, 2026 10:16 AM IST
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अफ्रीकी देशों में इबोला संक्रमण के बाद ऑस्ट्रेलिया में एक और संक्रमण से लोगों की चिंता को बढ़ा दिया है। ऑस्ट्रेलिया के नॉर्दर्न टेरिटरी में डिप्थीरिया के आउटब्रेक हुआ है। इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के दशकों में ऑस्ट्रेलिया में डिप्थीरिया का सबसे बड़ा मामला बन गया है। अब यह पड़ोसी राज्यों क्वींसलैंड और साउथ ऑस्ट्रेलिया तक भी फैल रहा है। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि डिप्थीरिया के अब तक नॉर्दर्न टेरिटरी में 133 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इसके साथ ही साउथ ऑस्ट्रेलिया में डिप्थीरिया संक्रमण के 6 और क्वींसलैंड में डिप्थीरिया के 5 केस सामने आए हैं। ऑस्ट्रेलिया में डिप्थीरिया के मामलों में इस तरह से इजाफा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य मंत्री मार्क बटलर ने ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एबीसी) को बताया कि डिप्थीरिया आउटब्रेक पिछले कई दशकों में सबसे बड़ा है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि डिप्थीरिया के कारण हुई संदिग्ध मौत की जांच भी की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि डिप्थीरिया का फैलाव मुख्य रूप से आदिवासी समुदाय के लोगों को प्रभावित कर रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में डिप्थीरिया संक्रमण का आउटब्रेक होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को वैक्सीनेशन करवाने और वैक्सीन की बूस्टर डोज लेने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ इलाकों में वैक्सीनेशन कवरेज कम होने और लोगों के बीच जागरूकता की कमी के कारण संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा है। इसलिए वैक्सीनेशन के बारे में बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है।
डिप्थीरिया मुख्य रूप से 'कोरीनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया' नामक बैक्टीरिया के कारण होता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, डिप्थीरिया Corynebacterium diphtheriae नाम के बैक्टीरिया से फैलने वाला संक्रमण है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सीधे संपर्क में आने से फैल सकता है। WHO के अनुसार, इस बीमारी में गले के अंदर मोटी परत जम जाती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। गंभीर मामलों में यह संक्रमण दिल, नसों और किडनी को प्रभावित करके शरीर को अंदर से कमजोर करने का काम करता है।
WHO के अनुसार, किसी व्यक्ति को अचानक गले से जुड़ी कोई परेशानी होती है और उसमें ऊपर बताए गए लक्षण नजर आते हैं, तो उसे तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए और अपना इलाज करवाना चाहिए।
यह संक्रमण बच्चों को ज्यादा प्रभावित करता है।
डिप्थीरिया से बचाव का सबसे आसान और असरदार तरीका है वैक्सीनेशन। बच्चों को DTP या DTaP वैक्सीन समय पर लगवाने से डिप्थीरिया का खतरा कम किया जा सकता है। इसके अलावा बुजुर्ग और वयस्क व्यक्ति इस वैक्सीन की बूस्टर डोज लेकर डिप्थीरिया के प्रभाव को कम कर सकते हैं। डिप्थीरिया से बचाव के लिए WHO संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचने की सलाह देता है। अगर परिवार में कोई डिप्थीरिया से संक्रमित हो जाता है तो उस स्थिति में मास्क और दस्तानों को इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर माना जाता है।
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, डिप्थीरिया का खतरा बच्चों में ज्यादा है। यह संक्रमण मुख्य रूप से कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को अपनी चपेट में लेता है। बच्चों के अलावा डिप्थीरिया से बचाव के लिए बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
ऑस्ट्रेलिया में डिप्थीरिया के बढ़ते मामलों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत में भी इस बीमारी का खतरा मौजूद है। भारत में डिप्थीरिया पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि वैक्सीनेशन की वजह से इसके मामलों में काफी कमी आई है, लेकिन कुछ राज्यों में अब भी संक्रमण के मामले सामने आते रहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, भारत उन देशों में शामिल रहा है जहां डिप्थीरिया के मामले समय-समय पर रिपोर्ट होते हैं। हालांकि फिलहाल इस संक्रमण का खतरा भारत में बहुत कम है।
Disclaimer: ऑस्ट्रेलिया में डिप्थीरिया के बढ़ते मामले यह याद दिलाते हैं कि संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए वैक्सीनेशन और जागरूकता कितनी जरूरी है। समय पर टीका, साफ-सफाई और सतर्कता से इस खतरनाक संक्रमण से बचा जा सकता है।