Diarrhea in Bihar: बिहार के गांव में डायरिया का प्रकोप, 40 से अधिक लोग हुए बीमार, जानें बच्चों में क्रोनिक डायरिया के लक्षण
बिहार के औरंगाबाद जिले के नाथू बीघा गांव में बच्चों समेत 40 से अधिक ग्रामीणों के डायरिया (Diarrhea outbreak in Bihar) से पीड़ित होने की खबर है।
Diarrhea in Bihar: बिहार में कोरोना के केसेस पहले से अब कम आ रहे हैं, लेकिन आए दिन दूसरी बीमारियों के होने की खबर आती रहती है। अभी बिहार में वायरल फीवर (Viral Fever), डेंगू (Dengue) के मामले सामने आ रहे हैं, तो अब खबर आ रही है कि बिहार के एक गांव जिसका नाम है नाथू बीघा वहां डायरिया का प्रकोप फैल रहा है। यह गांव औरंगाबाद जिले में स्थित है। डायरिया से अब तक बच्चों समेत 40 से अधिक ग्रामीणों के (Diarrhea outbreak in Bihar) के पीड़ित होने की खबर है।
राज्य के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नाथू बीघा गांव में एक मेडिकल टीम भेजी गई है। हालांकि, गांव में रह रहे लोगों का कहना है कि अभी तक कोई भी टीम उनसे मिलने नहीं आई है। विभाग ने कहा कि ग्रामीणों ने दावा किया कि उनका इलाज पंजीकृत चिकित्सा चिकित्सकों (आरएमपी) द्वारा किया जा रहा है।
गांव में 1 सप्ताह से लोग हैं गंभीर दस्त से ग्रस्त
नाथू बीघा पंचायत सदस्य आरपी मांझी ने का कहना है कि गांव के कुछ लोग पिछले 1 सप्ताह से दस्त की गंभीर (Severe Diarrhea) चपेट में हैं। कुछ लोगों की हालत तो ऐसी है कि वे चलने-फिरने में भी असमर्थ हैं। ग्रामीण आरएमपी दवाओं के साथ उनकी सहायता करते हैं और उनमें से कई को खारा और ग्लूकोज दिया गया है।
डायरिया के कारण कुछ मरीजों की हालत गंभीर
आरपी मांझी का कहना है कि गांव में स्थिति खराब है। कुछ रोगियों की हालत बहुत गंभीर है। हमने मदनपुर ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के प्रभारी डॉ. यतींद्र कुमार से मुलाकात की है। उन्होंने कहा, 'कुछ ग्रामीणों ने हमें नाथूपुर बीघा गांव की गंभीर स्थिति के बारे में बताया। हम एक टीम, एम्बुलेंस और दवाएं भेज रहे हैं। गंभीर मरीजों को सीएचसी मदनपुर और सदर अस्पताल औरंगाबाद ले जाया जाएगा।'
नीति आयोग ने 1 अक्टूबर को एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें कहा गया कि बिहार का स्वास्थ्य ढांचा नीचे से ऊपर है और एक लाख लोगों के लिए केवल छह बेड उपलब्ध हैं।
बच्चों में क्रोनिक डायरिया के लक्षण (symptom of chronic diarrhea in children)
- दिन भर में तीन या इससे अधिक बार कम से कम एक महीने तक पानी जैसा पतला स्टूल होना
- मल में खून आना
- ठंड लगना
- बुखार आना
- बाउल मूवमेंट्स पर कंट्रोल ना कर पाना
- जी मिचलाना या उल्टी करना
- पेट में दर्द या मरोड़ की समस्या