अब जन्म लेते ही पता चलेगा कि नवजात को टाइप 1 डायबिटीज़ का रिस्क है कितना, जानें कैसे

एक ऐसी अनोखी तकनीक का पता लगाया है। जिससे, जन्म लेने के बाद भी इस बात का पता लगाया जा सकेगा कि नवजात बच्चे को भविष्य में टाइप 1 डायबिटीज़ (Type 1 Diabetes) हो सकता है। जर्नल नेचर मेडिसिन (journal Nature Medicine) में छपे इस शोध के बारे में ऐसा कहा जा रहा है कि, यह नवजात शिशुओं में आजीवन रहने वाली इस परेशानी का पता लगना ज्यादा आसान हो जाता है। एक अमेरिकी एनजीओ जेडीआरएफ से जुड़े और इस स्टडी में हिस्सा ले रहे संजोय दत्ता ने कहा कि, टाइप 1 डायबिटीज़ की स्थिति बनने के लिए जेनेटिक या अनुवांशिक कारण ज़िम्मेदार होते हैं। लेकिन, दुर्भाग्य से नवजात बच्चों में इस बीमारी का पता नहीं लगाया जा सकता।

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Written By: Sadhna Tiwari | Published : August 12, 2020 9:38 AM IST

Diabetes in Children : भारतीय मूल के एक रिसर्चर और उनकी टीम ने एक ऐसी अनोखी तकनीक का पता लगाया है। जिससे, जन्म लेने के बाद भी इस बात का पता लगाया जा सकेगा कि नवजात बच्चे को भविष्य में टाइप 1 डायबिटीज़ (Type 1 Diabetes) हो सकता है। जर्नल नेचर मेडिसिन (journal Nature Medicine) में छपे इस शोध के बारे में ऐसा कहा जा रहा है कि, यह नवजात शिशुओं में आजीवन रहने वाली इस परेशानी का पता लगना ज्यादा आसान हो जाता है। एक अमेरिकी एनजीओ जेडीआरएफ से जुड़े और इस स्टडी में हिस्सा ले रहे संजोय दत्ता ने कहा कि, टाइप 1 डायबिटीज़ की स्थिति बनने के लिए जेनेटिक या अनुवांशिक कारण ज़िम्मेदार होते हैं। लेकिन, दुर्भाग्य से नवजात बच्चों में इस बीमारी का पता नहीं लगाया जा सकता। (Diabetes in Newborn Kids)

इस स्टडी के अनुसार, टाइप 1 डायबिटीज़ से ग्रसित 40 प्रतिशत बच्चों में गम्भीर किटोएसिडॉसिस (ketoacidosis) की समस्या पायी गयी।  इस अप्रोच का मकसद इस बात का पता लगाना है कि, कौन-से नवजात बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज़ हो सकता है। जिससे, बच्चों को सही समय पर सही तरीके से इलाज किया जा सकेगा।

क्या है टाइप 1 डायबिटीज़ ?

बड़ों की तरह बच्चों में भी टाइप 1 डायबिटीज़ और टाइप 2 डायबिटीज़ होता है। टाइप 1 डायबिटीज़ में पीड़ित बच्चे के शरीर में इंसुलिन का उत्पादन बिल्कुल नहीं होता या बहुत ही कम मात्रा में होता है। इस स्थिति में बच्चे को इंजेक्शन की मदद से इंसुलिन देना पड़ता है। सही तरीके से सावधानियां बरतने से इस स्थिति को मैनेज करना आसान हो जाता है।  डायबिटीज होने पर बच्चों में के शरीर पर इसके कई साइड-इफेक्ट्स दिखायी देते हैं। इसीलिए, समझ पर डायबिटीज़ के लक्षणों की पहचना करना ज़रूरी है। एक्सपर्ट्स के अनुसार बड़ों की तरह बच्चों की आंखों और किडनियों पर इसका दुष्परिणाम पड़ता है।

छोटे बच्चों में डायबिटीज़ के लक्षण

बार-बार प्यास लगना

हालांकि, शिशुओं के लिए यह बताना मुश्किल होता है कि उन्हें प्यास लगी है। लेकिन. कई बार बच्चे पानी की बोतल या गिलास जैसी चीज़ें उठाकर इस बात की ओर इशारा कर सकते हैं। कि, उन्हें प्यास लगी है। इसीलिए, इस बात पर ध्यान दें कि बच्चा प्यास लगने पर क्या इशारे करता है। इसी तरह अपने पीडियाट्रिक से इस बारे में बात करें कि आपके बच्चे की उम्र के अनुसार उसे कितना पानी पीना चाहिए।

बहुत अधिक पेशाब लगना

उम्र के अनुसार बच्चों में पेशाब करने की संख्या बदलती है। लेकिन, अगर आपका बच्चा बार-बार पेशाब करता है। तो, अपने डॉक्टर से इस बारे में चर्चा करें कि कहीं वह, डायबिटीज़ का लक्षण तो नहीं।

अचानक से वजन घटना

बच्चों का वज़न अगर अचानक से कम हो जाए, तो उसे डॉक्टर को दिखाएं। आमतौर पर दांत निकलने या पैरों पर चलने की शुरुआत करते हैं। तो, उनका वजन कम होने लगता है।  अचानक वजन कम होना डायबिटीज़ का एक लक्षण हो सकता है।

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