वेंटिलेटर से बाहर आने के बाद कैसी है धर्मेन्द्र की तबीयत? वेंटिलेटर सपोर्ट हटने के बाद फेफड़े खुद कैसे काम करते हैं?

अब धर्मेंद्र की हालत पहले से स्थिर है और वो रिकवरी कर रहे हैं। आइए जानते हैं किसी व्यक्ति को वेंटिलेटर की जरूरत कब पड़ती है और वेंटिलेटर सपोर्ट हटने के बाद फेफड़े खुद कैसे काम करते हैं।

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : November 17, 2025 12:26 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Manisha Mendiratta

Health Update Is The Veteran Actor Dharmendra On A Ventilator: बॉलीवुड एक्टर धर्मेंद्र मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल से घर लौट आए हैं। 89 वर्षीय अभिनेता हाल ही में रेगुलर हेल्थ चेकअप के लिए अस्पताल में भर्ती हुए थे। लेकिन बाद में उन्हें घर लाया गया और उनका इलाज घर पर ही चल रहा है। डॉक्टरों की टीम लगातार धर्मेंद्र का इलाज कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पहले धर्मेंद्र वेंटिलेटर पर (Veteran Actor Dharmendra Health updates) थे, लेकिन अब वो वेंटिलेटर से बाहर आ चुके हैं। रिपोर्ट्स की मानें, तो अब धर्मेंद्र की हालत पहले से स्थिर है और वो रिकवरी कर रहे हैं। आइए जानते हैं किसी व्यक्ति को वेंटिलेटर की जरूरत कब पड़ती है और वेंटिलेटर सपोर्ट हटने के बाद फेफड़े खुद कैसे काम करते हैं।

मरीज को कब पड़ती है वेंटिलेटर की जरूरत?

फरीदाबाद स्थित सर्वोदय अस्पताल के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. मनीषा मेहंदीरत्ता के अनुसार, गंभीर बीमारियों, बड़े ऑपरेशन या सांस से जुड़े गंभीर संक्रमण के दौरान कई बार मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ती है। वेंटिलेटर मशीन के जरिए व्यक्ति के फेफड़ों तक हवा पहुंचाई जाती है। इससे सांस लेने की प्रक्रिया आसान बनती है। डॉक्टर का कहना है कि जब मरीज खुद से सांस नहीं लेता या बहुत कम लेता है, तब वेंटिलेटर फेफड़ों में हवा को धक्का देकर पहुंचाता है और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालने में मदद करता है।

वेंटिलेटर हटाने का सही समय कैसे तय होता है?

डॉ. मनीष बताते हैं कि वेंटिलेटर हटाने की प्रक्रिया को विनिंग (Weaning) कहते हैं। किसी व्यक्ति का वेंटिलेटर तब हटाया जाता है, जब ऑक्सीजन लेवल स्थिर हो। इसके अलावा मरीज की श्वसन मांसपेशियां (Respiratory muscles) जैसे डायाफ्राम, इंटरकोस्टल मसल्स दोबारा काम कर रहा हो। मरीज का वेंटिलेटर हटाने से पहले विनिंग टेस्ट जरूर किया जाता है। इसके लिए डॉक्टर कुछ टेस्ट करते हैं-

1. स्पॉन्टेनियस ब्रीदिंग ट्रायल (SBT) : यह सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट है। इसमें मरीज को 30–120 मिनट तक वेंटिलेटर के न्यूनतम सपोर्ट पर रखा जाता है।

2. NIF टेस्ट (Negative Inspiratory Forced): यह टेस्ट दिखाता है कि डायाफ्राम कितनी ताकत से काम कर रहा है। अगर मसल्स की ताकत पर्याप्त हो, तभी मरीज लंबी अवधि तक खुद से सांस ले पाएगा।

3. Vital Capacity टेस्ट: इससे पता चलता है कि मरीज के फेफड़ों में कितनी हवा जमा हो सकती है।

डॉक्टर कहते हैं कि जब किसी मरीज के ये तीनों टेस्ट रिजल्ट पॉजिटिव आ जाते हैं, तब उनका वेंटिलेटर हटाने का फैसला लिया जाता है।

वेंटिलेटर सपोर्ट हटने के बाद फेफड़े खुद कैसे काम करते हैं?

1. डायाफ्राम ताकत वापस लेता है

इस सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर बताते हैं कि वेंटिलेटर के दौरान डायाफ्राम की एक्टिविटी कम हो जाती है, क्योंकि मशीन ज्यादा काम कर रही होती है। जैसे ही वेंटिलेटर हटता है डायाफ्राम अपनी पुरानी ताकत वापस पाने लगता है। हर सांस में नीचे और ऊपर होने लगता है। यह फेफड़ों के अंदर प्रेशर बदलकर हवा खींचता है। इसी वजह से मरीज खुद से सांस लेना शुरू करता है।

2. दिमाग एक्टिव होता है

जैसे ही वेंटिलेटर सपोर्ट हटता है हमारी सांस ऑटोमेटिक ब्रेन स्टेम (medulla oblongata) से कंट्रोल होती है। वेंटिलेटर हटाने पर ब्रेन स्टेम खून में CO₂ और O₂ लेवल को मॉनिटर करता है और जरूरत के अनुसार तेजी या धीमी सांस का सिग्नल भेजता है। इससे मरीज सामान्य रूप से दोबारा सांस लेना लगता है और उसकी मशीन की जरूरतें कम होने लगती है।

3. फेफड़ों की अल्विओली (Air sacs) फिर से खुलती हैं

वेंटिलेटर के दौरान दबाव की वजह से कई बार फेफड़ों की एअर सैक्स (Alveoli) कम एक्टिव हो जाती हैं। इससे स्वाभाविक सांस से धीरे-धीरे अल्विओली खुलने लगती हैं। साथ ही, फेफड़ों के जरिए ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान भी शुरू हो जाता है।

4. खून में ऑक्सीजन बैलेंस

वेंटिलेटर हटते ही शरीर खुद समझ लेता है कि उसे कितनी ऑक्सीजन चाहिए। फेफड़े नॉर्मल सांस में ऑक्सीजन खींचते हैं। नाक, फेफड़े और शरीर की अन्य कोशिकाएं खून में ऑक्सीजन को बैलेंस करने लगती हैं।

वेंटिलेटर हटने के बाद होने वाली परेशानियां

ऐसा जरूरी नहीं है कि वेंटिलेटर हटने के बाद हर मरीज सामान्य रूप से ठीक ही हो जाए। कुछ मरीजों को वेंटिलेटर सपोर्ट हटने के बाद कुछ परेशानियां भी हो सकती हैं। इसमें शामिल हैः

हल्की तेज सांस

गले में खराश

आवाज बैठना

खांसी या बलगम निकालने में दिक्कत

शारीरिक कमजोरी और थकान

निष्कर्ष

डॉ. मनीष के साथ हुई बातचीत के आधार पर हम ये कह सकते हैं कि वेंटिलेटर हटने के बाद फेफड़े तुरंत खुद से काम करना शुरू नहीं करते, बल्कि यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है। मरीज का दिमाग, फेफड़ों की मांसपेशियां, अल्विओली और सांस लेने की पूरी प्रणाली धीरे-धीरे फिर से एक्टिव होती है।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।