
... Read More
Written By: Atul Modi | Published : June 25, 2021 11:29 PM IST
Image credits by: आईसीएमआर के अध्ययन में दावा- कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बावजूद 76 फीसदी लोग मिले संक्रमित
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) कोरोना वैक्सीन एक्शन और संक्रमण से जुड़ा अपना एक अध्ययन सार्वजनिक किया है। इस अध्ययन के मुताबिक कोरोना के खिलाफ वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बावजूद 76 फ़ीसदी लोग कोरोनावायरस से संक्रमित मिले हैं। संक्रमित होने के बाद इनमें से केवल 16% लोग ऐसे थे जिनमें कोरोना के संक्रमण नहीं थे, जबकि केवल 10% लोगों को ही अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अध्ययन के समय कुल 361 लोगों का आरटी पीसीआर टेस्ट किया गया था जिनमें से 274 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई थी। कोरोना से संक्रमित पाए जाने वाले लोग वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के 14 दिन बाद संक्रमित पाए गए थे। इनमें से 35 लोगों ने कोवैक्सीन कि दोनों डोज ली थी, जबकि 239 लोगों ने कोवीशील्ड का टीका लगवाया था। यह अध्ययन 1 मार्च से 10 जून तक चला था।
कोवीशील्ड और कोवैक्सीन को लेकर चल रहे विवाद पर आईसीएमआर ने एक बड़ा खुलासा किया है जिसमें यह कहा गया है कि कोवीशील्ड लेने वालों में अधिक एंटीबॉडी बन रही है जबकि कोवैक्सीन लेने वालों में 77 फ़ीसदी ही एंटीबॉडी मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डेल्टा वैरिएंट के कारण वैक्सीनेशन के बावजूद संक्रमण हो सकता है, क्योंकि यह वैरिएंट एंटीबॉडी को कम करता है। इस साल जनवरी से पूरे देश में चल रहे टीकाकरण कार्यक्रम में करोड़ों लोगों को टीका लगाया जा चुका है, लेकिन मार्च माह में दूसरी लहर के दौरान 80 फीसदी से अधिक मामले डेल्टा वैरिएंट से ही जुड़े थे जोकि काफी तेजी से बढ़ते चले गए। वैज्ञानिकों को आशंका है कि इसी वैरिएंट की वजह से वैक्सीन की दोनों खुराक लेने वाले भी कोरोना की चपेट में आए।
Disclaimer: The content on TheHealthSite.com is only for informational purposes. It is not at all professional medical advice. Always consult your doctor or a healthcare specialist for any questions regarding your health or a medical condition.