
Also Read
Depression in India: कोरोना वायरस के कारण लगाए गए लॉकडाउन को अब 5 महीने होने वाले हैं। मार्च के आखिरी सप्ताह में शुरु हुए इस लॉकडाउन ने भारतीयों की मानसिक स्थिति पर बहुत व्यापक असर डाला है। भारत में बहुत अधिक संख्या में लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। एक हालिया स्टडी में खुलासा किया गया है कि भारत में तकरीबन 43 प्रतिशत आबादी डिप्रेशन महसूस कर रही है।
यह स्टडी हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म जीओब्यूआईआई द्वारा करायी गयी। जिसमें, 10 हजार भारतीयों को शामिल किया गया। इस स्टडी में एक सर्वे की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की गयी कि कोरोना वायरस महामारी के बाद उत्पन्न हुए हालातों में लोग किस तरह जी रहे हैं और लॉकडाउन की स्थिति का सामना किस तरह से कर रहे हैं।
इस स्टडी में हिस्सा ले रहे 26 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें डिप्रेशन के कुछ लक्षण महसूस हो रहे हैं। वहीं, 11 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वे बहुत ज़्यादा डिप्रेशन महसूस कर रहे हैं। जबकि, 6 प्रतिशत लोगों ने माना की गम्भीर रूप से डिप्रेशन में हैं।
स्टडी में पाया गया कि पिछले 5 महीने बहुत ही अलग रहे हैं। इस सरकारी फैसले का देशवासियों की मानसिक सेहत के ऊपर बुरा सप्रभाव पड़ा है। क्योंकि, लॉकडाउन के बाद विभिन्न क्षेत्रों में व्यापार का घाटा, फैक्ट्रीज़ में तालाबंदी, कॉस्ट कटिंग, काम से छंटनी, सैलरी में कटौती और सेहत में लगातार गिरावट या भविष्य को लेकर कई तरह की असुरक्षाएं लोगों के मन में थी। जिसके चलते उन्हें, बहुत अधिक डिप्रेशन महसूस हुआ। तो कई लोगों को इन स्थितियों से गुज़रना भी पड़ा। जिससे, उनका तनाव बहुत अधिक बढ़ गया।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब बहुत अधिक स्ट्रेस महसूस होता है तो, यह डिप्रेशन में तब्दील हो जाता है। इस स्टडी में कहा गया कि मौजूदा लॉकडाउन के चलते लोगों की लाइफस्टाइल में आए बदलावों के चलते 43 फीसदी भारतीय लोगों में डिप्रेशन के लक्षण देखे गए।