सितंबर में भारी बारिश हुई तो दिल्ली में बढ़ेंगे डेंगू-मलेरिया के मामले, नए 'स्ट्रेन' बढ़ा सकते हैं शहर के लोगों की परेशानी
Delhi Dengue: 'स्ट्रेन' के अलावा बारिश जैसे अन्य कई कारक है जो मच्छर जनित बीमारियों के प्रसार के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।
बारिश आते ही डेंगू-मलेरिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। खासकर राजधानी दिल्ली में हर साल वेक्टर बोर्न बीमारियों का खतरा मंडराता रहता है। विशेषज्ञ का कहना है कि, अगर सितंबर में भारी बारिश होती है तो दिल्ली में एक बार फिर डेंगू मलेरिया और अन्य दूसरी मच्छर जनित बीमारियों के होने का खतरा बढ़ सकता है।
दिल्ली में अब तक डेंगू के 205 मामले
एमसीडी के मुताबिक, इस साल अब तक डेंगू के 205 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें जनवरी में 23, फरवरी में 16, मार्च में 22, अप्रैल में 20, मई में 30, जून में 25, जुलाई में 26, अगस्त में कुल 36 मामले सामने आए। डेंगू के कुल चार स्ट्रेन DEN-1, DEN-2, DEN-3 और DEN-4 हैं, जो बीमारी का कारण बनते हैं। पैसों का कहना है कि यदि मामलों को नियंत्रण में रखना है तो स्ट्रेन की पहचान करना सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा।
बढ़ सकते हैं डेंगू के मामले
एम्स भुवनेश्वर के डायरेक्टर डॉ आशुतोष विश्वास कहते हैं "एक बार जब हम डेंगू के स्ट्रेन को जान लेते हैं तो यह संकेत देता है कि बीमारी के मामलों में वृद्धि होने वाली है या मामले हल्के रहेंगे। अब तक की प्रवृत्ति बताती है कि स्ट्रेन डेंगू के मामलों की संख्या में बढ़ोतरी कर सकते हैं।"
स्ट्रेन के अलावा बारिश जैसे अन्य कई कारक है जो मच्छर जनित बीमारियों के प्रसार के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।
डॉ विश्वास कहते हैं, "अगर आने वाले दिनों में अधिक बारिश नहीं होती है तो डेंगू या मलेरिया के मामलों में वृद्धि की संभावना कम रह सकती है। लेकिन अगर पिछले साल की तरह भारी बारिश हुई तो संभावना है कि हम देने के मामलों की संख्या में बढ़ोतरी देख सकते हैं।"
पिछले साल बारिश के कारण डेंगू के बढ़े थे मामले
पिछले वर्ष सितंबर में शहर में भारी बारिश हुई थी जिसके बाद डेंगू के मामलों में वृद्धि देखी गई थी। जब मच्छरों के प्रजनन की बात आती है तो ह्यूमिडिटी और टेंपरेचर भी महत्वपूर्ण कारक होते हैं हालांकि पिछले कुछ वर्षों में डेंगू से मृत्यु दर कम रही है लेकिन जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
डॉक्टर विश्वास ने कहा कि, एक व्यक्ति के दूसरी बार डेंगू से संक्रमित होने की संभावना अधिक रहती है क्योंकि एक नया स्ट्रेन शरीर पर फिर से हमला कर सकता है और गंभीर लक्षणों का विकास कर सकता है।
डॉ विश्वास ने कहा, यदि कोई नया स्ट्रेन शरीर पर हमला करता है तो कोई गंभीर लक्षण विकसित कर सकता है इसे एंटीबॉडी डिपेंडेंट में वृद्धि कहा जाता है। हालांकि वही स्ट्रेन एक ही व्यक्ति को प्रभावित करने की संभावना नहीं रखता है। यह एक संक्रामक या एयरबोर्न डिजीज नहीं है और इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका है। आस-पड़ोस को साफ और पानी को किसी जगह पर जमने ना देना, क्योंकि यही वह जगह है जहां मच्छर पैदा होते हैं।
2015 में दिल्ली में बड़े पैमाने पर डेंगू का प्रकोप देखा गया
पिछले साल दिल्ली में 9613 डेंगू के मामले दर्ज किए गए थे जो 2015 के बाद से सबसे अधिक 23 मौतों के साथ साल 2016 के बाद से सबसे अधिक है। बता दें कि, 2015 में दिल्ली में बड़े पैमाने पर डेंगू का प्रकोप देखा गया था अक्टूबर में मामलों की संख्या 10600 को पार कर गई थी। 1996 के बाद से यह दिल्ली का सबसे खराब डेंगू का प्रकोप था।
Source: TOI