दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे हैं डेंगू और मलेरिया के मामले, इस तरह रखें खुद को सेफ

यूं तो डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छर जनित बीमारियां मानसून के मौसम में हर साल ही आंतक मचाती हैं, लेकिन इस साल कोरोना वायरस के चलते इस तरह किसी का खास ध्यान नहीं गया। लेकिन इसका मतलब कतई यह नहीं है कि इस साल डेंगू और मलेरिया जैसे संक्रामक रोगों के मामले सामने आए ही नहीं।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : August 12, 2020 11:42 AM IST

यूं तो डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छर जनित बीमारियां मानसून के मौसम में हर साल ही आंतक मचाती हैं, लेकिन इस साल कोरोना वायरस के चलते इस तरह किसी का खास ध्यान नहीं गया। लेकिन इसका मतलब कतई यह नहीं है कि इस साल डेंगू और मलेरिया जैसे संक्रामक रोगों के मामले सामने आए ही नहीं। सोमवार को नगरपालिका रिपोर्ट द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस साल 8 अगस्त तक महज राष्ट्रीय राजधानी में मलेरिया के 45 और डेंगू के 35 मामले सामने आए हैं। जाहिर ही बात है कि मरीजों की यह संख्या अधिक है। ऐसे में दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) के आयुक्त ने हाल ही में इनसे बचाव और इनकी रोकथाम के लिए गाइडलाइंस जारी की है।

एसडीएमसी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, नोडल एजेंसी जो पूरे शहर के लिए वेक्टर जनित रोगों के डेटा को सारणीबद्ध करती है, उनसे दिल्ली में 8 अगस्त तक डेंगू के 35 और मलेरिया के 45 मामले दर्ज किए हैं। डेंगू के 35 मामलों में से 7 मामले सिर्फ अगस्त में आए हैं, 11 जुलाई में और बाकी फरवरी और जून के बीच दर्ज किए गए। अगस्त के महीने में कोई मलेरिया के मामले दर्ज नहीं किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि वेक्टर बॉर्न बीमारियों की जांच के लिए उन्होंने अलग से क्लीनिक बनाए हैं। साथ ही अधिकारियों ने रोगों के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए भी जरूरी कदम उठाए हैं।

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डेंगू से बचाव

1. एक बार ध्यान से अपने किचन और घर में इस्तेमाल होने वाले सभी ऐसे उपकरणों पर नज़र दौड़ाएं जिनके सम्पर्क में पानी आता हो। उदाहरण के लिए पानी उबालने के लिए इस्तेमाल होने वाले केटल्स में कहीं पानी उबालकर छोड़ तो नहीं दिया गया। या फिर एसी और फ्रिज़ टपकने वाला पानी तो उनकी ट्रे में जमा ना हो गया हो। अगर ऐसा है तो पानी फेंक दें और ट्रे को सुखने दें।

2. गार्डनिंग का शौक रखने वाले लोग अपने घर में कुछ समय के लिए पौधे ना रखें। दरअसल पौधों पर कई तरह के कीड़ों के अलावा मच्छरों का भी बसेरा होता है। जो आपके लिए डेंगू का खतरा पैदा करते हैं।

3. खिड़कियों पर परदे लगाएं ना लगाएं, पर उनपर नेट लगवाना ना भूलें। नेट घर के बाहर से मच्छरों को घर में प्रवेश करने से रोक देगी।

मलेरिया से बचाव के तरीके

1. ग्रेपफ्रूट में मौजूद क्विनाइन मलेरिया प्रेरक परजीवी को बेअसर करने का काम करता है। यह परजीवी को नष्ट करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सहयोग करता है। यदि आपको मलेरिया के शुरुआती लक्षण नजर आ रहे हैं या फिर मलेरिया से पीड़ित हैं, तो ग्रेपफ्रूट और ग्रेपफ्रूट के रस का सेवन करना चाहिए। क्विनाइन को आप ग्रेपफ्रूट के गूदे को उबालकर पा सकते हैं। यह आहार फाइबर, विटामिन ए और सी का एक पावरहाउस है जिसमें काफी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है। यह एक प्रसिद्ध एंटीऑक्सीडेंट भी है और मलेरिया को बेअसर करने के लिए एक अच्छा घरेलू उपचार भी हो सकता है।

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2. मलेरिया के प्रमुख लक्षणों में शरीर और जोड़ों में दर्द शामिल है। तुलसी एक लोकप्रिय जड़ी बूटी है, जो सूजन और जोड़ों के दर्द को कम करती है। मलेरिया के लक्षणों का इलाज करने के लिए यह एक अद्भुत घरेलू उपाय हो सकता है। मलेरिया से पीड़ित व्यक्ति को तुलसी की कुछ पत्तियों को चाय में या फिर पीने में उबालकर उसमें शहद डालकर पीने से लाभ होता है। जब बुखार अधिक हो तो तुलसी और काली मिर्च का पेस्ट बनाकर भी आप पीड़ित व्यक्ति को दे सकते हैं।

3. दालचीनी में कई औषधीय तत्व होते हैं। इसमें सिनामाल्डेहाइड होता है, जो सूजन को कम करने में मदद करता है। यह मसाला एंटी-पैरासिटिक गुणों से भरपूर होता है। मलेरिया से होने वाले शारीरिक दर्द से छुटाकार पाने के लिए इसे खाना लाभदायक हो सकता है। इसे पानी में उबाल कर इस पानी को शहद के साथ लिया जा सकता है। यह भूख, ऐंठन, मतली आदि को भी कम करने में सहायक है। दालचीनी के पानी को शहद के साथ लेना मलेरिया से लड़ने के लिए एक उपयोगी घरेलू उपाय हो सकता है।

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