Delta Variant In Delhi: दिल्‍ली में कोरोना से संक्रमित 80% लोगों के सैंपल में आया डेल्‍टा वेरिएंट, तीसरी लहर के लिए करनी होगी ये तैयारी

Delta Variant In Delhi: दिल्‍ली के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री सतेंद्र जैन ने यह भी कहा कि दिल्‍ली में मिलने वाले कोरोना के 80% फ्रेश केस में भी डेल्‍टा वेरिएंट मिल रहा है।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Published : August 11, 2021 11:11 AM IST

कोरोना वायरस के सबसे खतरनाक वेरिएंट डेल्‍टा (Delta Variant In Delhi) की चपेट में देश की राजधानी दिल्‍ली भी आ चुकी है। दिल्‍ली सरकार ने खुद कहा कि दिल्‍ली में मिले कोरोना संक्रमण के 80 प्रतिशत सैंपल में डेल्‍टा वेरिएंट मिला है। दिल्‍ली के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री सतेंद्र जैन ने यह भी कहा कि दिल्‍ली में मिलने वाले कोरोना के 80% फ्रेश केस में भी डेल्‍टा वेरिएंट मिल रहा है। उन्‍होंने कहा "कोरोना संक्रमितों के सैंपल हम लैब में टेस्टिंग में भेज रहे हैं तो 80 प्रतिशत सैंपलों में डेल्‍टा वेरिएंट मिला है। इससे पहले हम सैंपलों को ICMR की लैब में भेज रहे थे, उन्‍होंने भी आधे से ज्‍यादा सैंपलों में डेल्‍टा वेरिएंट मिलने की पुष्टि की थी। अब हम सैंपलों को अपनी लैब में भेज रहे हैं, वहां भी डेल्‍टा वेरिएंट ही सामने आ रहा है।"

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जब सतेंद्र जैन सवाल किया गया कि दिल्‍ली में ऑक्‍सीजन की शॉर्टेज के कारण कितने लोगों की मौत हुई है तो इसके जवाब में स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने अभी तक दिल्‍ली से कोरोना के कारण हुई मौतों का डाटा नहीं मांगा है। उन्‍होंने कहा "हमें केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक ऐसा कोई लेटर नहीं मिला है जिसमें ऑक्‍सीजन-संबंधी मौतों का आंकड़ा मांगा गया हो।" सतेंद्र जैन ने साफ तौर पर बताया कि जुलाई महीने में जीनोम सीक्वेंसिंग (जीनोम सीक्वेंसिंग का मतलब होता है किसी वायरस के रंग, रूप और उसकी प्रकृति का पता लगाना) के लिए भेजे गए 83.3 प्रतिशत सैंपल में डेल्टा वेरिएंट (Delta variant (B.1.617.2) सामने आया है। अगर अप्रैल की बात करें तो केवल 53.9% सैंपल में डेल्‍टा वेरिएंट मिला था।

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तीसरी लहर के लिए करनी होगी ये तैयारी

एक्‍सपर्ट का कहना है कि तीसरी लहर से निपटने के लिए जहां लोगों का जागरुक होना बहुत जरूरी हैं वहीं सरकार को भी तैयारी करने की जरूरत है। तीसरी लहर से निपटने के लिए अस्‍पतालों की हाल सुधारनी होगी, मैनपॉवर बढ़ानी होगी और सरकार को तुरंत छोटे-बड़े हॉस्पिटल्स में आईसीयू बेड की संख्‍या बढ़ानी होगी। सिर्फ बड़े ही नहीं बल्कि छोटे हॉस्पिटल्स में भी तैयारियां अपने लेवल पर होनी चाहिए। अस्पताल में डॉक्टर, नर्स, सुरक्षा कर्मी इन सभी लोगों को कोविड की ट्रेनिंग करानी चाहिए। इससे लहर से निपटने से आसानी होगी। हर व्यक्ति का इस्तेमाल होना चाहिए। ट्रेंड मैन पावर होना बहुत जरूरी होता है। डेंटिस्ट डॉक्टर्स के साथ ही एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्रों की भी ट्रेनिंग करानी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें ड्यूटी पर लगाया जा सके।

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