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Written By: Atul Modi | Updated : June 25, 2021 8:34 PM IST
Image credits by: क्या है कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वैरिएंट जिसने बढ़ा दी है भारत की चिंता
डेल्टा प्लस वेरिएंट (Delta Plus Variant In India) कोरोना वायरस का एक रूप है जो इसके दो म्यूटेंट से मिल कर तीसरा बना हुआ है और यह उन सबसे अधिक संक्रामक है। इसे B.1.617 कहते हैं और यह E 484Q और L 452R से मिल कर बना है। अध्ययनों की मानें तो इस म्यूटेंट का पहला केस अक्टूबर 2020 में महाराष्ट्र में मिला था। तब से ही दिसंबर से E 484Q और L 452R के केसों में एक उछाल देखने को मिल रहा है।
चूंकि यह स्ट्रेन दो अन्य म्यूटेंट्स द्वारा मिल कर बना है इसलिए इसके लिए मानव के शरीर में जा कर इम्यूनिटी को कमजोर करना और भी अधिक आसान बन जाता है। स्टडीज के मुताबिक यह वायरस और भी अधिक खतरनाक और ज्यादा तेजी से फैलने वाला है। यह स्ट्रेन यूके में पाए गए अल्फा वेरिएंट से भी अधिक संक्रामक है।
डेल्टा की तरह डेल्टा प्लस से संक्रमण के मामले भी सबसे पहले भारत में मिले हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक भारत में डेल्टा प्लस वैरिएंट के 22 मामले सामने आए हैं जिसमें 16 महाराष्ट्र के जलगांव और रत्नागिरी में हैं। बाकी मामले केरल और मध्य प्रदेश में हैं। केरल के पलक्कड़ व पथनमथिट्टा में और एमपी के भोपाल और शिवपुरी जिलों में इससे संक्रमित मरीज मिले हैं। दरअसल, जिन इलाकों में डेल्टा प्लस वैरिएंट के मरीज मिले हैं वहां कोविड पॉजिटिविटी रेट काफी ज्यादा रहे हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि कोरोना वायरस का डेल्टा प्लस वैरिएंट भारत के अलावा अभी 9 देशों में पाया गया है। ये देश हैं- अमेरिका, यूके, पुर्तगाल, स्विजरलैंड, जापान, पोलैंड, नेपाल, चीन, रूस। जहां तक बात वायरस के डेल्टा वैरिएंट की है तो यह भारत सहित दुनिया के 80 देशों में पाया गया है। भारत में कोरोना की दूसरी लहर की वजह भी यही डेल्टा वेरियेंट ही था।
अभी तक जितने भी वैरिएंट आए हैं, डेल्टा उनमें सबसे तेजी से फैलता है। हालांकि अल्फा वैरिएंट भी काफी संक्रामक है, लेकिन डेल्टा इससे 60 पर्सेंट अधिक खतरनाक है। डेल्टा के दो म्यूटेशन- 452R और 478K इम्युनिटी को चकमा दे सकते हैं। डेल्टा से मिलते-जुलते कप्पा वैरिएंट भी वैक्सीन को चकमा देने में कामयाब दिखता है, लेकिन फिर भी यह बहुत ज्यादा नहीं फैला जबकि डेल्टा वैरिएंट सुपर-स्प्रेडर निकला।
देश में कोरोना वायरस की खतरनाक दूसरी लहर इसी वैरिएंट के चलते आई थी। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि हर डरावना म्यूटेशन एक खतरनाक वायरस का रूप ले जबकि कुछ एक्सपर्ट्स को आशंका है कि कहीं यह कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर (COVID-19 3rd Wave) वजह न बन जाए।
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