Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
-
- हिंदी
Delhi to declare Rabies a notifiable Disease: दिल्ली सरकार ने कुत्तों से होने वाली बीमारी रेबीज (Rabies) को महामारी घोषित करने का ऐलान किया है। राजधानी में कुत्तों से होने वाले रेबीज से इंसानों की मौत के आंकड़े को शून्य करने के लिए सरकार ने ये महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि महामारी रोग अधिनियम (एपिडेमिक डिजीज एक्ट) के तहत दिल्ली सरकार ने इंसानों में होने वाले रेबीज को नोटिफाएबल डिजीज घोषित करने फैसला लिया गया है।
इस नई अधिसूचना के लागू होने के बाद, रेबीज के संदिग्ध, संभावित या पक्के मामलों की सूचना तुरंत संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को देनी होगी। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि बीमारी पर बेहतर नजर रखी जा सके, मामलों की समय पर रिपोर्टिंग हो सके और रेबीज को फैलने से रोकने के लिए तुरंत कदम उठाए जा सकें। सरकार इंसानों और जानवरों, जैसे कुत्तों, के लिए रेबीज टीकाकरण की सुविधाओं को भी और मजबूत कर रही है।
दिल्ली सरकार द्वारा रेबीज के खिलाफ जारी किए गए एक्शन प्लान में इंसानों के साथ-साथ कुत्तों और दूसरे जानवरों के लिए भी रेबीज वैक्सीनेशन की सुविधाओं पर फोकस किया जाएगा। इस नोटिफिकेशन से अधिकारियों को रेबीज की बीमारी के ट्रेंड्स को ट्रैक करने, इंसानों और जानवरों के हेल्थ सिस्टम के बीच कोऑर्डिनेशन बेहतर बनाने और ज्यादा जोखिम वाले इलाकों में रेबीज को रोकने में मदद मिलेगी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में हर साल रेबीज से लगभग 59,000 लोगों की मौत होती है। इन मौतों का 36 फीसदी से ज्यादा हिस्सा भारत से आता है। WHO का आंकड़ा बताता है कि भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों में रेबीज के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए जाते हैं। इंसानों में रेबीज होने का मुख्य कारण कुत्तों के काटने से फैलता है।
मायो क्लीनिक की रिपोर्ट के अनुसार, रेबीज (Rabies) एक बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों की लार से इंसानों में फैलती है। यह वायरस सीधे शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी) पर हमला करता है। रेबीज का इलाज अगर समय पर नहीं होता है तो इससे व्यक्ति की मौत तक हो सकती है।
रेबीज का वायरस 'लिस्सावायरस' (Lyssavirus) परिवार से आता है। रेबीज किसी भी संक्रमित कुत्ता, बिल्ली, बंदर, नेवला या चमगादड़ के काटने से इंसानों में फैलता है। काटने के अलावा यदि संक्रमित जानवर की लार किसी खुले घाव, कटी हुई त्वचा या आंख/मुंह के संपर्क में आती है, तो भी रेबीज इंसानों में फैल सकता है। आवारा जानवरों के अलावा अगर आपके पालतू जानवर को रेबीज का टीका नहीं लगा है और वह किसी संक्रमित जानवर के संपर्क में आया है, तो वह भी इसे फैला सकता है।
जब रेबीज वायरस किसी व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करता है, तो उसके दिमाग तक पहुंचने में महीनों तक का समय लग सकता है। रेबीज के सामान्य लक्षणों में शामिल
घाव को धोएं: बिना देरी किए घाव को बहते पानी और साबुन से कम से कम 10-15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं। यह वायरस को काफी हद तक कम कर देता है।
एंटीसेप्टिक लगाएं: घाव पर डिटॉल, स्पिरिट या पोविडोन आयोडीन लगाएं।
इन उपायों के अलावा अगर आपको किसी आवरा जानवर ने काटा है या आपने उसके साथ संपर्क बनाया है, तो इस बारे में डॉक्टर से बात करें और रेबीज वैक्सीनेशन करावएं।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।