ICMR की स्टडी के बावजूद दिल्ली में कोविड-19 मरीजों को दी जाएगी प्लाज्मा थेरेपी

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि आईसीएमआर (ICMR) ने यह बिल्कुल नहीं कहा कि प्लाज्मा थेरेपी का कोई लाभ नहीं है, बल्कि यह कहा है कि यदि किसी मरीज को वेंटिलेटर पर रखा जाता है तो शायद प्लाज्मा थेरेपी से कोई फायदा नहीं होगा। हालांकि, इससे पहले कि कोई मरीज स्टेज 3 पर पहुंचे, उसे फायदा होता है। मंत्री का कहना है कि वह खुद इस थेरेपी की मदद से सही हुए हैं।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Published : September 11, 2020 10:30 AM IST

हाल ही में आई ICMR की स्टडी में कहा गया कि कोरोनावायरस के खतरे को करने या कोविड-19 से मौत को रोकने के लिए ​प्लाज्मा थेरेपी कारगार नहीं है। स्टडी में कहा गया कि यदि कोई यह सोच रहा है कि प्लाज्म थेरेपी से कोरोना संक्रमित मरीज की जान बचाई जा सकती है, तो ऐसा नहीं है। हालांकि इसके इस्तेमाल से कुछ लक्षण कंट्रोल में आ सकते हैं। इसके बावजूद दिल्ली सरकार राजधानी के मरीजों का इलाज कराने के लिए प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल करेगी। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंत्र जैन का कहना है कि कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए दिल्ली सरकार गंभीर मामलों में प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल जारी रखेगी।

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि आईसीएमआर (ICMR) ने यह बिल्कुल नहीं कहा कि प्लाज्मा थेरेपी का कोई लाभ नहीं है, बल्कि यह कहा है कि यदि किसी मरीज को वेंटिलेटर पर रखा जाता है तो शायद प्लाज्मा थेरेपी से कोई फायदा नहीं होगा। हालांकि, इससे पहले कि कोई मरीज स्टेज 3 पर पहुंचे, उसे फायदा होता है। मंत्री का कहना है कि वह खुद इस थेरेपी की मदद से सही हुए हैं।

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क्या है ICMR की स्टडी?

द इंडिया काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने हाल ही में जारी एक स्टडी में कहा है कि COVID-19 के लिए प्लाज्मा थेरेपी न तो मृत्यु जोखिम को कम करती है और न ही यह वायरस की गति को रोक सकती है। प्लाज्मा थेरेपी में, ऐसे व्यक्ति के ब्लड से एंटीबॉडी को लिया जाता है जो कोरोना संक्रमित होने के बाद पूरी तरह से सही हो चुका है और फिर इन्हें कोरोना संक्रमित व्यक्ति के शरीर में डाला जाता है। इससे कोरोना के खिलाफ लड़ने में मदद मिलती है और इम्यून सिस्टम भी बूस्ट होता है। इंडिया काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा 464 मध्यम-बीमार रोगियों पर यह शोध किया गया जिन्हें सांस लेने में कठिनाई और ऑक्सीजन सेचुरेशन स्तर 93 प्रतिशत से कम पर परीक्षण किया गया था।

इन लोगों को दो ग्रुप में बांटा गया था, जिसमें 235 लोगों को प्लाज्मा दिया गया जबकि 229 को केवल सामान्य निगरानी में रखा गया। जो लोग प्लाज्मा थेरेपी पर थे उन्हें 200 मिलीलीटर प्लाज्मा की दो खुराक के साथ 24 घंटे के लिए स्थानांतरित किया गया था। फिर दोनों ग्रुप की तुलना 28 दिनों के बाद की गई। कुल 34 रोगियों या 13.6 प्रतिशत लोग जो प्लाज्मा थेरेपी पर थे, वो या तो रिकवर नहीं कर पाएं या उनकी मौत हो गई। जबकि 31 मरीज़ या 14.6 प्रतिशत लोग जो प्लाज्मा के बजाय सामान्य निगरानी पर थे वे मर गए।

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कुछ लक्षणों को मार सकती है प्लाज्मा थेरेपी

अध्ययन में कहा गया है कि हर ग्रुप में 17 रोगियों को गंभीर बीमारी है। इस लिहाज से पता चलता है कि प्लाज्मा थेरेपी का कुछ खास कमाल नहीं है। हालांकि प्लाज्मा थेरेपी से कुछ लाभ जरूर हुआ। जैसे कि मरीजों में सांस की समस्या और थकान में कमी देखी गई। जबकि बुखार और खांसी जैसे लक्षणों में कोई कमी नहीं आई। बता दें कि दिल्ली, ओडिशा, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे कई राज्य कोरोनावायरस के प्रकोप से निपटने के लिए प्लाज्मा थेरेपी पर जोर देते आए हैं। दिल्ली में, 700 से अधिक रोगियों को प्लाज्मा थेरेपी दी गई है और दिल्ली सरकार द्वारा व्यापक रूप से इसे प्रचारित भी किया गया।

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