Artificial Rain: दिल्लीवालों को प्रदूषण से जल्द मिलेगी मुक्ति, पहली बार करवाई जाएगी कृत्रिम बारिश

Artificial rain in Delhi: दिल्ली की हवा में लगातार बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने कृत्रिम बारिश करवाने का फैसला लिया है।

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : October 24, 2025 9:04 AM IST

Artificial rain in Delhi: दिवाली में हुई आतिशबाजी के बाद प्रदूषण की मार झेल रही देश की राजधानी को जल्द राहत मिलने वाली है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ऐलान किया है कि राजधानी को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए कृत्रिम बारिश करवाई जाएगी। 23 अक्टूबर को दिल्ली में कृत्रिम बारिश करवाने के लिए सेसना विमान क्लाउड सीडिंग मिशन के लिए रवाना हो गया है। अगर मौसम रही रहता है तो आने वाले 3 दिनों में कभी भी दिल्ली में कृत्रिम बारिश (Delhi Main Hogi Artificial Rain) हो सकती है।

दिल्ली में कब होगी कृत्रिम बारिश

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में 28, 29 और 30 अक्टूबर को बादलों की मौजूदगी की संभावना जताई है। अगर हालात अनुकूल रहे, तो 29 अक्टूबर को दिल्ली में पहली बार कृत्रिम बारिश हो जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि दिल्ली में कृत्रिम बारिश की पहल सिर्फ तकनीकी तौर पर अहम नहीं है, बल्कि दिल्ली में प्रदूषणसे निपटने का एक वैज्ञानिक तरीका भी है। सरकार चाहती है कि दिल्ली की हवा साफ हो और लोग खुलकर सांस ले सकें।

क्या होती है कृत्रिम बारिश?- What is artificial rain?

कृत्रिम बारिश वह प्रक्रिया है जिसमें वैज्ञानिक तकनीक की मदद से बादलों में ऐसे केमिकल छोड़े जाते हैं, जो बारिश करवाने में मदद करते हैं। कृत्रिम बारिश का मुख्य उद्देश्य वातावरण में मौजूद नमी को संगठित करके बारिश के रूप में धरती पर गिराना होता है। इसे मौसम विज्ञान की भाषा में इसे क्लाउड सीडिंग (Cloud Seeding) भी कहा जाता है।

कृत्रिम बारिश कैसे करवाई जाती है?- How is artificial rain made

कृत्रिम बारिश करवाने के लिए विशेष तकनीक और वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाई जाती है। यह काम आमतौर पर मौसम वैज्ञानिक और विशेषज्ञ टीमों द्वारा किया जाता है।

- कृत्रिम बारिश करवाने के लिए सबसे पहले ऐसे बादलों की पहचान की जाती है जिनमें नमी मौजूद हो लेकिन वे बारिश कराने में सक्षम न हों।

- इसके लिए सिल्वर आयोडाइड (Silver Iodide), सोडियम क्लोराइड (NaCl) या पोटेशियम आयोडाइड जैसे केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है।

- इन केमिकल्स पदार्थों को हवाई जहाज, रॉकेट या ड्रोन के जरिए बादलों में छोड़ा जाता है। ये पदार्थ बादलों में मौजूद जल वाष्प को ठोस या तरल कणों में बदल देते हैं, जिससे बादल भारी होकर बारिश करने लगते हैं।

- जब बादल पर्याप्त भारी हो जाते हैं, तो वे संघनित होकर वर्षा के रूप में पानी छोड़ते हैं।

कृत्रिम बारिश के फायदे- Advantages of artificial rain

सूखे क्षेत्रों में फसलों को बचाने के लिए कृत्रिम बारिश बहुत उपयोगी होती है।

झीलों, नदियों और बांधों में पानी का स्तर बढ़ाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

बड़े शहरों में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भी कृत्रिम बारिश की जाती है ताकि धूल और प्रदूषक तत्व नीचे बैठ जाएं।

जंगलों में लगी आग को बुझाने के लिए भी कृत्रिम बारिश मददगार होती है।

Highlights

दिल्ली में करवाई जाएगी कृत्रिम बारिश

29 अक्टूबर को हो सकती है कृत्रिम बारिश

बारिश से दिल्ली में प्रदूषण कम होगा

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