दिल्ली की जहरील हवा कर रही है लोगों को बीमार, अस्पतालों में बढ़ी एलर्जी, खांसी और साइनस के मरीजों की संख्या

वायु प्रदूषण के बढ़ते कहर के कारण दिल्ली के अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। दिल्ली के एम्स, राम मनोहर लोहिया, संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल, भीमराव अम्बेडकर अस्पताल जैसे तमाम अस्पतालों में प्रदूषण की वजह से बीमार मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।

दिल्ली की जहरील हवा कर रही है लोगों को बीमार, अस्पतालों में बढ़ी एलर्जी, खांसी और साइनस के मरीजों की संख्या
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Written by Ashu Kumar Das |Published : November 5, 2025 1:15 PM IST

देश की राजधानी दिल्ली हर साल सर्दियों की शुरुआत के साथ ही प्रदूषण की चादर में लिपट जाती है। इस साल फिर दिल्ली उसी स्थिति में आ चुकी है। नवंबर का महीना शुरू हुआ है और दिल्ली की हवा में प्रदूषण ही प्रदूषण नजर आ रहा है। हवा में फैला धुंध और धुएं का यह मिला-जुला रूप जिसे हम स्मॉग (Smog) कहते हैं, लोगों की सांसें तक छीन लेता है। बढ़ते प्रदूषण के कारण न केवल हवा जहरीली हो जाती है, बल्कि इसका सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। वायु प्रदूषण के बढ़ते कहर के कारण दिल्ली के अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। दिल्ली के एम्स, राम मनोहर लोहिया, संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल, भीमराव अम्बेडकर अस्पताल जैसे तमाम अस्पतालों में प्रदूषण की वजह से बीमार मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।

वायु प्रदूषण का शरीर पर असर

दिल्ली के एमबीबीएस डॉक्टर और जनरल फिजिशियन डॉ. सुरिंदर कुमार के अनुसार, दिल्ली की हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM2.5, PM10), सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और ओजोन जैसे तत्व हमारे फेफड़ों, दिल और आंखों पर गहरा असर डालते हैं। लंबे समय तक ऐसी हवा में सांस लेने से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर घटता है, जिससे कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

दिल्ली के अस्पतालों में बढ़ रहे हैं इन बीमारियों के मरीज

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1. अस्थमा के मरीज

डॉ. सुरिंदर कुमार बताते हैं कि वायु प्रदूषण के कारण दिल्ली के अस्पतालों में पिछले 1 से 2 महीने के बीच अस्थमा और सांस से जुड़ी बीमारीयों के मरीज बढ़ गए हैं। वायु प्रदूषणके कारण एम्स, सफदरजंग और निजी अस्पतालों में रोजाना 1200 से 2600 मरीज अस्थमा के आ रहे हैं। वायु प्रदूषण के कारण अस्पतालों में अस्थमा के दौरे, खांसी, सीने में जकड़न और सांस फूलने की शिकायतों वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

2. क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD)

क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज एक गंभीर फेफड़ों की बीमारी है, जिसमें सांस की नलियां स्थायी रूप से सिकुड़ जाती हैं। वायु प्रदूषण के कारण AIIMS, Safdarjung Hospital, LNJP में COPD के मरीजों की संख्या में 50 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल आया है। दिल्ली के तमाम अस्पतालों में रोजाना 70 से 80 मरीज COPD के आ रहे हैं। दिवाली से पहले ये संख्या 20 से 35 हुआ करती थी।

3. आंखों से जुड़ी परेशानी

दिल्ली में वायु प्रदूषण के कारण लोगों को आंखों से जुड़ी परेशानियां भी हो रही है। आंखों में जलन, खुजली, कंजक्टिवाइटिस (Conjunctivitis), आंखों में जलन, लालिमा और खुजली की शिकायतें लेकर लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। दिल्ली के LNJP, संजय गांधी मेमोरियल और भीवराम अंबेडकर अस्पताल में आंखों की बीमारी के मरीजों की संख्या 100 से 120 हो गई है। आंखों से जुड़ी परेशानी बच्चों और बाइक चलाने वाले लोगों में ज्यादा देखी जा रही है।

4. एलर्जी और सर्दी-जुकाम

वायु प्रदूषण के कारण दिल्ली में एलर्जी, सर्दी, खांसी और जुकाम की परेशानी भी देखी जा रही है। इस तरह के मरीजों की संख्या ENT विभागों में बढ़ रही है। दिल्ली के अस्पतालों के ENT विभाग में रोजाना 120 से 150 मरीज एलर्जी, सर्दी-जुकाम, नाक, गले और साइनस की सूजन की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।

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प्रदूषण बन सकती है साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी

दिल्ली के प्रमुख डॉक्टरों का कहना है कि अगर प्रदूषण के स्तर को तुरंत नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में यह एक साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी साबित हो सकता है। सर गंगा राम अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक मिश्रा कहते हैं कि प्रदूषण के दिनों में हृदय रोग और स्ट्रोक के केस बढ़ना एक गंभीर चिंता का विषय है।