रूखी आंखों से घट जाती है पढ़ने की रफ्तार, जानें इस बीमारी के लक्षण और बचाव

कंप्‍यूटर और एसी के अधिक प्रयोग के कारण आंखों में पर्याप्‍त मात्रा में आंसू नहीं बन पाते हैं। आंसू, आंखों के कार्निया एवं कन्जंक्टाइवा को नम और गीला रखता है जिससे आंखें सूखती नहीं।

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Written By: Yogita Yadav | Published : November 17, 2018 5:57 PM IST

आंखें अगर रूखी हों, तो पढ़ने की रफ्तार घट जाती है। आंखों का रूखापन एक बीमारी है, जिसमें आंखों से पर्याप्त मात्रा में आंसू नहीं निकलते हैं। इसे ड्राई आई सिंड्रोम कहते हैं। इससे आंखों के कार्य काफी प्रभावित होते हैं। इस सिंड्रोम पर शोध करने वाले शोधार्थी बताते हैं कि क्रोनिक ड्राई आई (आंखों के रूखेपन की बीमारी) से पीड़ित लोगों में पढ़ने की गति कम होती है। यह भी पढ़ें - क्‍या है किडनी फेल होना,किडनी डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट क्‍या है सही

क्‍या कहता है शोध 

शोध में पाया गया कि इस रोग से पीड़ित लोगों में पढ़ने की गति सामान्य से 10 फीसदी कम होती है। साथ ही, इससे औसतन 30 मिनट से अधिक समय तक पढ़ने में कठिनाई हो सकती है।

नैदानिक रूप से जिनकी आंखें अधिक रूखी पाई जाती हैं उनमें प्रति मिनट 32 शब्द कम पढ़ने की क्षमता होती है, जबकि रोग से रहित लोग प्रति मिनट 272 शब्द पढ़ सकते हैं।

अमेरिका के जॉन्स हॉकिंस विल्मर आई इंस्टीट्यूट के एसेन एकपेक ने कहा, "आंखों में रूखेपन की वजह से लोग लंबे समय तक पढ़ने में असमर्थ होते हैं क्योंकि उनकी आंखों में पर्याप्त आंसू नहीं निकलने से आंखें गीली नहीं हो पाती हैं। ऐसा हमारा अनुमान है। " यह भी पढ़ें – 20 साल पहले हुआ था भारत का पहला सफल लिवर ट्रांसप्लान्ट

यह शोध ऑप्टोमेट्री एंड विजन साइंस नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोध में 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 186 लोगों को शामिल किया गया था।

क्‍या है ड्राई आई सिंड्रोम

कंप्‍यूटर और एसी के अधिक प्रयोग के कारण आंखों में पर्याप्‍त मात्रा में आंसू नहीं बन पाते हैं। आंसू, आंखों के कार्निया एवं कन्जंक्टाइवा को नम और गीला रखता है जिससे आंखें सूखती नहीं। दरसअसल हमारी आंखों में टियर फिल्म पायी जाती है। इसकी सबसे बाहरी परत को लिपिड या ऑयली परत कहते हैं। लिपिड परत आंसू के अधिक बहने, गर्मी एवं हवा में आंसू के सूखने या उड़ने को कम करती है। लिपिड या तैलीय परत आंखों की पलकों को चिकनाई प्रदान करती है, जिससे पलकों को झपकाने में आसानी होती है। लेकिन अधिक देर तक कंप्यूटर पर काम करने, बहुत ज्यादा टीवी देखने और लगातार एसी में रहने से आंखों की टियर फिल्म प्रभावित होती है और आंखें सूखने लगतीं हैं, इसे ड्राई आई सिंड्रोम कहते हैं। यह भी पढ़ें – एक आसन हर रोज : खुद से प्यार करना सिखाता है न्यूड योगा

ड्राई आई सिंड्रोम के लक्षण

आंखों से संबंधित इस समस्‍या के कारण आंखों में जलन, चुभन, सूखा लगना, खुजली होना, भारीपन, आंखों की कंजक्टिवा का सूखा दिखाई पड़ना, आंखों में लालिमा, तथा आंखों को कुछ देर खुला रखने में दिक्‍कत होने जैसी समस्‍यायें होती हैं। ड्राई आई सिन्ड्रोम से पीडि़त व्यक्ति अपनी पलकों को बार-बार व जोर से झपकाते हैं। यह भी पढ़ें – प्रोबायोटिक की मदद से बढ़ाई जा सकती है बोन डेंसिटी : शोध

ड्राई आई सिंड्रोम से बचाव

  • जिस कमरे में हो उसका तापमान कम रखें, वातावरण में थोड़ी नमी बनाए रखें।
  • पेय पदार्थों का सेवन अधिक मात्रा में करें।
  • हरी सब्जियां, मौसमी फल व दूध का सेवन अधिक करें।
  • एयरकंडीशनर की हवा सीधे आंखों पर न पड़ने दीजिए।
  • कंप्‍यूटर पर काम करते समय पलकों को झपकाते रहें, इससे आंख के आंसू जल्दी सूखते नहीं।
  • कंप्यूटर पर काम करते समय हर आधे घंटे के बाद पांच से दस मिनट के लिए अपनी नजर स्क्रीन से हटा लें।
  • टीवी देखते हुए या कंप्‍यूटर पर काम के दौरान एन्टीरिफ्लेक्टिव कोटिंग एंव एंटीरिफ्लेक्टिव चश्मे का प्रयोग करें।
  • शराब और धूम्रपान से बचें।
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