
Also Read
Maharashtra continues to record the highest number of deaths in India.
Deaths in India: कोविड-19 संक्रमण के फैलने की गति को देखकर जहां लोग परेशान हैं वहीं, भारत में कोरोना वायरस महामारी से जुड़े एक अनुमान से चिंता और बढ़ सकती है। दरअसल, ऐसा अनुमान लगाया गया है कि लॉकडाउन की वजह से एड्स, टीबी और मलेरिया को रोकने वाले कार्यक्रम और स्वास्थ्य योजनाएं स्थगित की गयी है। जिसके चलते, इन बीमारियों से देश में बहुत अधिक लोगों की मृत्यु हो सकती है।
वैज्ञानिकों ने कहा है कि, कोरोना वायरस महामारी के बीच विकासशील देशों के सामने एक बड़ी चुनौती है टीबी, मलेरिया और एड्स के मरीज़ों को मौत से बचाना। क्योंकि, वे आवश्यक स्तर पर इन बीमारियों की रोकथाम और इलाज के लिए कुछ कर नहीं पा रहे हैं। जिससे भविष्य में टीबी, मलेरिया और एड्स से मरने वालों की संख्या में बहुत अधिक इजाफा हो सकता है। इन साइंटिस्ट ने यह भी सलाह दी कि, महामारी से बचाव के प्रयासों के दौरान पहले से मौजूद इन बीमारियों के खतरों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। क्योंकि, उसके परिणाम गम्भीर हो सकते हैं।
यह रिसर्च ब्रिटेन की प्रतिष्ठित मेडिकल पत्रिका लैंसेट में छापा गया। जिसमें, साइंटिस्ट ने कहा कि विकासशील और गरीब देशों में कोरोना वायरस की वजह से अन्य चुनौतियां बढ़ सकती हैं। रिसर्च में इस तरह भी इशारा किया गया कि, भारत जैसे देशों में कोरोना वायरस से बचाव के बीच टीबी, मलेरिया और एड्स से मरने वालों की संख्या में इजाफा होने की संभावना अधिक है। यह अनुमान लगाया गया कि, अगले पांच वर्षों में भारत जैसे विकासशील देशों में टीबी से मरने वालों में की संख्या में 20 प्रतिशत, मलेरिया से होने वाली मौतों में 30 फीसदी और एचआईवी या एड्स इंफेक्शन से 10 फीसदी अधिक लोगों की मृत्यु होगी। रिसर्च में बताया गया कि, मौजूदा समय में ज्यादातर विकासशील और गरीब देशों में सारा ध्यान कोरोना से सुरक्षा और बचाव में लगाया जा रहा है। जिससे, वहां पहले से मौजूद अन्य बीमारियों की रोकथाम के लिए ज़्यादा प्रयास नहीं किए जा रहे। (Deaths in India)
एक्सपर्ट्स ने हाल ही में छापी गयी इस रिसर्च में कुछ सुझाव भी दिए हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, विकासशील और गरीब देशों को कोरोना वायरस महामारी के लिए अपनी पॉलिसी के साथ अपने क्षेत्र में टीबी, मलेरिया और एड्स की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। अगर, अभी भी इसकी शुरुआत की जाए, तो कई लोगों की जानें बचायीं जा सकती हैं। इन देशों को कोरोना वायरस के साथ इन बीमारियों की रोकथाम के लिए एक कारगर रणनीति बनानी चाहिए।
कोरोना वायरस का पहला मामला दिसंबर 2019 में चीन के वुहान में पाया गया। जबकि, भारत में मार्च 2020 में कोविड-19 के पहले पॉजिटीव केस का पता चला। पिछले 6 महीनों में कोरोना वायरस ने महामारी का आकार ले लिया है। दुनियाभर में इसे रोकने के प्रयास चल रहे हैं। जिसकी वजह से ज़्यादातर विकासशील और गरीब देश अपने देश में अन्य स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। जिससे, कई बीमारियों का ख़तरा बढ़ गया है।