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सोमवार को जम्मू-कश्मीर की प्रख्यात संस्कृतिकर्मी प्रो रीता जितेंद्र की डीडी काशिर के एक लाइव प्रोग्राम के दौरान ही मृत्यु हो गई। वे आजादी से पहले से रेडियो और टेलीविजन के लिए काम करती रहीं हैं। उन्होंने रेडियो का सफर तब शुरू किया जब रेडियो स्टेशन लाहौर में हुआ करता था।
मंच से ऐसे हुईं विदा
जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी की पूर्व सचिव, शिक्षाविद एवं संस्कृतिकर्मी प्रो रीता जितेंद्र सोमवार सुबह डीडी कशिर के लाइव प्रोग्राम गुड मॉर्निंग जेएंडके में साक्षात्कार दे रहीं थीं। वे अपने बारे में बता रहीं थीं कि कैसे उन्होंने नाटक लिखने शुरू किए। इसी दौरान उन्होंने अंतिम सांस लीं। उनके इस तरह चले जाने से जहां सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई हैं वहीं लोग यह देख भर हैरान हैं कि बहुत कम उम्र में ही संस्कृति जगत में पैर जमा लेने वाली यह शख्सियत विदा भी मंच से ही हुई।
ऐसे होती है 'सडन डेथ'
बात करते हुए, खेलते हुए, परफॉर्मेंस देते हुए यूं अचानक चले जाने के संभावित कारणों में सबसे बड़ा कारण कार्डियक अरेस्ट है। जबकि स्ट्रोक और हृदयाघात से भी बहुत से लोगों का इस तरह देहावसान हो जाता है। हर साल अमेरिका में ही स्ट्रोक से तकरीबन 140,000 लोगों की मृत्यु हो जाती है। जबकि हृदयाघात के कारण 600,000 से ज्यादा लोगों की जान चली जाती है। 326,200 से ज्यादा लोग हर साल कार्डियक अरेस्ट के कारण इस तरह विदा हो जाते हैं।
कार्डियक अरेस्ट क्या है?
कार्डियक अरेस्ट अक्सर बिना चेतावनी के अचानक होता है। यह दिल में एक इलेक्ट्रीकल मलफंक्शन (विद्युतीय खराबी) के कारण होता है, इससे दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। ऐसी स्थिति को एरिथिमिया (arrhythmia) कहते हैं! दरअसल जब दिल धड़कता है तो उससे वैद्युत संवेग पैदा होता है, जिसकी मदद से शरीर में रक्त का संचार होता है। धड़कन अनियंत्रित होने पर शरीर में रक्त का संचार कभी तेजी से होता है तो कभी धीमी गति से, ऐसे में शरीर के बाकी हिस्सों जैसे कि फेंफड़े और दिमाग आदि पर असर पड़ता है। इसके रुकने पर व्यक्ति का उसके दिमाग पर जोर नहीं रहता और वह व्यक्ति चेतना खो देता है और उसकी नब्ज बंद हो जाती है।
कैसे करता है असर
कार्डियक अरेस्ट के कारण, शरीर में ऑक्सीजन का वितरण रूक जाता है। जिसके कारण दिल पर बुरा असर पड़ता है और मरीज की जान भी जा सकती है। इसके इलाज के लिए पीड़ित को जल्द से जल्द सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रेसस्टिसेशन) दिया जाता है। जिससे दिल की धड़क को नियमित किया जा सके। सीपीआर में बीमार को डिफाइब्रिलेटर से बिजली के झटके दिए जाते हैं, जिससे हृदयगति सामान्य हो सके।
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यह दिल के दौरे से अलग है, लेकिन यह दिल के दौरे का कारण हो सकता है. गौरतलब है कि कार्डियक अरेस्ट एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसका कुछ खास स्थितियों में अगर समय से इलाज किया जाए तो मरीज की जान बच सकती है।
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दिल की दूसरी खराबियां भी कार्डियक अरेस्ट के लिए वजह बन सकती हैं। इनमें दिल की मांस-पेशियों का मोटा हो जाना (कार्डियोमायोपैथी), दिल का बंद होना, खून में ज्यादा मात्रा में फाइब्रोनिजन का पाया जाना, और लंबे समय तक क्यू-टी सिंड्रोम रहना शामिल है। क्यू-टी सिंड्रोम में भी दिल की धड़कन कभी तेज तो कभी धीमी पड़ जाती है।
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बचाव
कार्डियक अरेस्ट के दौरान गोल्डन सेकेंड सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। इस दौरान यदि प्रयास िकिए जाएं तो व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार इन हालातों में बचाव के लिए सबसे पहले देखना चाहिए कि मरीज सही से सांस ले पा रहा है या नहीं, अगर नहीं ले पा रहा है तो ‘सीपीआर’ प्रणाली पर काम करना चाहिए, इसके तहत मरीज के सीने पर हाथों से दबाव दिया जाता है। मरीज के सीने को एक मिनट के भीतर 100 से 120 बार तक दबाना चाहिए। हर 30 बार दबाने के बाद उसकी सांस को जांच लेना चाहिए। बिना देर किए मिनटों मे किसी डौक्टर को दिखाना चाहिए।